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‘पत्नी का हर कदम पति के साथ होना जरूरी नहीं’: मद्रास HC ने 16 साल से अलग रह रहे दंपती को दी तलाक की मंजूरी

नई दिल्ली। मद्रास हाईकोर्ट ने तलाक से जुड़े एक मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि पत्नी से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह पति जहां भी जाए, हर परिस्थिति में उसके साथ चले। अदालत ने स्पष्ट किया कि नौकरी या अन्य कारणों से पति के किसी दूसरे शहर में जाने पर पत्नी का उसके साथ जाना अनिवार्य नहीं है।

मामला करीब 16 साल से अलग रह रहे एक दंपती से जुड़ा है। दोनों की शादी सितंबर 1992 में हुई थी और उनके चार बच्चे हैं। पति की उम्र वर्तमान में 67 वर्ष है। लंबे समय से अलग रहने और रिश्ते में आई गहरी कड़वाहट को देखते हुए हाईकोर्ट ने आखिरकार दोनों के बीच तलाक को मंजूरी दे दी।

अदालत ने तलाक मंजूर करते हुए पति को पत्नी को 7 लाख रुपये गुजारा भत्ता देने का भी निर्देश दिया।

नौकरी के लिए मुंबई गया था पति

पति ने तलाक के लिए दायर याचिका में बताया था कि वह नौकरी के सिलसिले में तमिलनाडु के शिवगंगा से मुंबई चला गया था, लेकिन पत्नी उसके साथ मुंबई नहीं गई। इसके बाद उसने पत्नी पर किसी दूसरे व्यक्ति के साथ अवैध संबंध होने का आरोप भी लगाया था।

पति ने वर्ष 2014 में शिवगंगा फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दाखिल की थी। हालांकि, सितंबर 2021 में फैमिली कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी।

फैमिली कोर्ट का कहना था कि पति खुद नौकरी के लिए मुंबई गया था और पत्नी को अपने साथ नहीं ले गया। ऐसे में वह अपनी ही गलती का फायदा उठाकर तलाक की मांग नहीं कर सकता।

हाईकोर्ट ने रिश्ते में गहरी दरार को माना अहम आधार

फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ पति ने मद्रास हाईकोर्ट में अपील की। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावना तलाशने का प्रयास किया, लेकिन बातचीत से कोई समाधान नहीं निकल सका।

अदालत ने पाया कि पति-पत्नी करीब 16 वर्षों से अलग रह रहे हैं और पत्नी की ओर से भी पति के पास वापस लौटने की कोई औपचारिक कोशिश सामने नहीं आई। ऐसे हालात में कोर्ट ने माना कि वैवाहिक रिश्ते में गहरी दरार पड़ चुकी है और दोनों के दोबारा साथ आने की संभावना बेहद कम है।

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय तक अलग रहना, वैवाहिक जीवन का प्रभावी रूप से समाप्त हो जाना और रिश्ते का पूरी तरह टूट जाना परिस्थितियों के आधार पर मानसिक क्रूरता के दायरे में आ सकता है।

अवैध संबंध का आरोप नहीं माना

पति ने पत्नी पर दूसरे व्यक्ति के साथ अवैध संबंध होने का आरोप भी लगाया था, लेकिन हाईकोर्ट ने इस आरोप को स्वीकार नहीं किया।

जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस एमडी सुमति की पीठ ने कहा कि जिस व्यक्ति को पत्नी का कथित प्रेमी बताया गया था, उसे मामले में पक्षकार ही नहीं बनाया गया। अदालत ने माना कि ऐसे आरोप लगाए जाने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति को भी मामले में शामिल किया जाना जरूरी है। ऐसा नहीं किए जाने पर केवल इस आधार पर लगाए गए आरोप को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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