न्यूज़ वाणी ब्यूरो बांदा।
बांदा। जनपद मुख्यालय से लेकर अतर्रा कस्बे और ग्रामीण अंचलों तक कथित झोलाछाप चिकित्सकों का नेटवर्क मरीजों की जिंदगी के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। बिना मान्य चिकित्सकीय डिग्री और निर्धारित प्रशिक्षण के इलाज किए जाने की शिकायतों ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक रसूख, संगठनों के नाम और प्रशासनिक उदासीनता के बीच यदि ऐसे प्रतिष्ठानों का संचालन हो रहा है तो इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करना जरूरी है। इसी पड़ताल के दौरान अतर्रा थाना क्षेत्र के गर्गन पुरवा में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें कथित चिकित्सक की योग्यता, क्लीनिक के पंजीकरण और उसके संचालन को लेकर कई सवाल खड़े हुए।
मीडिया टीम गर्गन पुरवा स्थित राजकुमार कुशवाहा के क्लीनिक पहुंची और उनसे चिकित्सकीय योग्यता के बारे में जानकारी मांगी। उपलब्ध विवरण के अनुसार, उन्होंने अपनी शिक्षा इंटरमीडिएट तक बताई। जब उनसे चिकित्सकीय डिग्री तथा क्लीनिक और मेडिकल स्टोर के वैध पंजीकरण संबंधी दस्तावेज दिखाने को कहा गया तो उन्होंने दस्तावेज प्रस्तुत करने के बजाय कथित तौर पर प्राइवेट प्राथमिक चिकित्सा मित्र मेडिकल सोसाइटी के अध्यक्ष बबलू गुप्ता से फोन पर बात करने को कहा। मीडिया कर्मियों ने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी पदाधिकारी से बातचीत नहीं, बल्कि संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन करना है।
इसी दौरान फोन पर हुई बातचीत में दूसरी ओर से कथित तौर पर क्लीनिक के अंदर जाने पर सवाल उठाते हुए बाहर निकलने को कहा गया और फोन काट दिया गया। इस घटनाक्रम ने क्लीनिक के संचालन और दस्तावेजों की उपलब्धता को लेकर संदेह और गहरा दिया। हालांकि, क्लीनिक का पंजीकरण है या नहीं, संचालक के पास कोई वैधानिक चिकित्सकीय योग्यता है या नहीं तथा वहां किस प्रकार का इलाज किया जा रहा है, इन सभी बिंदुओं की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग की जांच और अभिलेखों के सत्यापन से ही हो सकेगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मीडिया टीम ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. ब्रजेन्द्र सिंह को फोन कर पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। सीएमओ ने कार्यालय आकर लिखित शिकायत देने को कहा और बताया कि वह सरकारी कार्य से लखनऊ जा रहे हैं। मीडिया टीम ने उन्हें जानकारी दी कि वह अन्य स्थानों पर भी ऐसे मामलों की पड़ताल कर रही है और दोपहर तीन बजे तक मिलने का प्रयास करेगी। इस पर सीएमओ ने संबंधित चिकित्सक को सूचित करने तथा फोटो और वीडियो उपलब्ध कराने पर कार्रवाई करने की बात कही।
इसके बाद मीडिया टीम को क्लीनिक के काउंटर की दीवार पर प्राइवेट प्राथमिक चिकित्सा मित्र मेडिकल सोसाइटी का एक पंपलेट चस्पा मिला। पंपलेट पर अध्यक्ष बबलू गुप्ता, कोषाध्यक्ष अखिलेश यादव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष उमेश सर्राफ, संयोजक रामराज गुप्ता आनंद तथा प्रखंड संयोजक डीके गुप्ता के नाम और पद अंकित थे। पंपलेट पर 15 जुलाई 2025 को सदर विधायक के होटल अतिथि के पास आयोजित एक पुराने कार्यक्रम का उल्लेख था। इसमें डिप्लोमा धारकों, फार्मासिस्टों और चिकित्सा मित्रों से अधिक संख्या में पहुंचकर एकजुटता प्रदर्शित करने का आह्वान किया गया था। हालांकि, किसी संगठन के पंपलेट का क्लीनिक पर लगा होना अपने आप में उस संगठन की ओर से अवैध चिकित्सा संचालन को संरक्षण देने का प्रमाण नहीं है। इसकी भूमिका और संबंधित व्यक्तियों के दावों की जांच आवश्यक है।
इस संबंध में जब प्रांतीय संयोजक रामराज गुप्ता आनंद से बांदा के चमरौड़ी स्थित उनके मेडिकल स्टोर पर मुलाकात कर सवाल किए गए तो उन्होंने संगठन के बारे में जानकारी होने से इनकार किया और कहा कि वह अवैध गतिविधियों का समर्थन नहीं करते। उन्होंने ऐसे मामलों में प्रशासन द्वारा कार्रवाई किए जाने की बात कहकर अपना पक्ष रखा। दूसरी ओर, मीडिया टीम को मिली जानकारी में डीके गुप्ता के पूर्व में चिकित्सक डॉ. नरेश के यहां कंपाउंडर के रूप में काम करने की बात सामने आई। बताया गया कि डॉ. नरेश झांसी में सेवाएं देते थे और अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। आरोप है कि डीके गुप्ता उनके नाम का सहारा लेकर इलाज कर रहे हैं। इसी तरह बबलू गुप्ता के मेडिकल स्टोर में फार्मासिस्ट की डिग्री के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस, फार्मासिस्ट की नियुक्ति और चिकित्सकीय योग्यता का सत्यापन स्वास्थ्य विभाग के लिए आवश्यक है।
इस पूरे मामले को और गंभीर बनाता है जनपद में कोडीनयुक्त कफ सिरप की कथित नशीली खेप की बरामदगी का प्रकरण। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बिसंडा थाना पुलिस ने बड़ी खेप पकड़ी थी, जिसकी बाजार कीमत करोड़ों रुपये बताई गई और तस्करों की गिरफ्तारी भी हुई थी। पुलिस द्वारा नेटवर्क की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, इस तस्करी प्रकरण को गर्गन पुरवा के क्लीनिक अथवा पंपलेट पर अंकित व्यक्तियों से जोड़ने वाला कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। इसलिए दोनों मामलों के बीच संबंध होने का दावा करना अनुचित होगा। यदि जांच में कोई कड़ी सामने आती है तो संबंधित एजेंसियों को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
मीडिया टीम इसके बाद ग्रामीण अंचल के पथरा क्षेत्र पहुंची, जहां कुछ क्लीनिक खुले मिले, लेकिन संबंधित चिकित्सक मौजूद नहीं थे। वहां भी क्लीनिकों के संचालन, चिकित्सकीय योग्यता और पंजीकरण की जांच किए जाने की जरूरत महसूस हुई। इसी बीच सीएमओ कार्यालय से डॉ. मदन सिंह का फोन आया। उन्होंने सरकारी कार्य से हाईकोर्ट जाने की बात कहते हुए अपनी बात सोमवार को रखने का अनुरोध किया। सीएमओ के लखनऊ दौरे और डॉ. मदन सिंह के हाईकोर्ट जाने के कारण मीडिया टीम फोटो और वीडियो उपलब्ध कराने के लिए अधिकारियों से मुलाकात नहीं कर सकी।
अब सवाल यह है कि जनपद में मरीजों का इलाज करने वाले प्रतिष्ठानों की नियमित जांच कौन कर रहा है? बिना मान्य योग्यता के चिकित्सा करने, नियमों के विरुद्ध क्लीनिक चलाने और अपात्र व्यक्तियों द्वारा दवाओं का कारोबार किए जाने की शिकायतों पर स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है? क्या विभाग इन प्रतिष्ठानों के लाइसेंस, संचालकों की योग्यता, दवाओं के भंडारण और उपचार संबंधी अभिलेखों की जांच करेगा या मामला लिखित शिकायत की औपचारिकता तक सीमित रह जाएगा?
मरीजों की जिंदगी से जुड़े इस गंभीर विषय पर केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग को आरोपित प्रतिष्ठानों का नियमानुसार निरीक्षण कर दस्तावेजों का सत्यापन करना चाहिए। जहां अनियमितताएं प्रमाणित हों, वहां कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए और दोषियों को किसी भी प्रकार के प्रभाव या दबाव के कारण संरक्षण न मिले। साथ ही, जिन व्यक्तियों पर आरोप लगाए गए हैं, उनका पक्ष लेकर तथ्यों की निष्पक्ष जांच भी जरूरी है। फिलहाल मीडिया टीम की पड़ताल जारी है और जनपदवासियों की निगाहें स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं।
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