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बाँदा में आयोजित हुआ भव्य माँ केन उत्सव, बनारस की तर्ज पर हुई माँ केन की महाआरती – हजारों दीपों से जगमगाया केन घाट

बाँदा। न्यूज़ वाणी ब्यूरो। जनपद बाँदा में केन नदी के तट पर भक्ति, आस्था और श्रद्धा का अनूठा नजारा देखने को मिला। केन नदी आरती स्थल घाट पर जिला गंगा समिति, गंगा समग्र और विश्व हिंदू महासंघ गौ रक्षा समिति के संयुक्त तत्वावधान में भव्य माँ केन उत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बनारस की तर्ज पर माँ केन की महाआरती हुई, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। दीपों की रोशनी से पूरा घाट जगमगा उठा और जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।

उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने हाथों में दीप लेकर माँ केन की आरती की और नदी में दीपदान कर अपनी श्रद्धा प्रकट की। कार्यक्रम में भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, रंगोली प्रतियोगिता, आतिशबाजी और महाप्रसाद वितरण सहित कई धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन हुए। पूरे घाट पर ‘जय माँ केन’ और ‘हर-हर गंगे’ के जयकारे गूंजते रहे।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सनातनी किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कौशल्या नंदगिरी (टीना माँ), जो उत्तर प्रदेश सरकार के किन्नर कल्याण बोर्ड की सदस्य एवं राज्यमंत्री हैं, तथा पद्मश्री सम्मानित जल योद्धा उमाशंकर पांडेय शामिल हुए।

विशिष्ट अतिथि के रूप में वैष्णो किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर स्वामी मुस्कान सखी माँ, संस्थापक किन्नर जन कल्याण ट्रस्ट एवं विश्व हिंदू महासंघ किन्नर प्रकोष्ठ कौशांबी की जिला अध्यक्ष, तथा जिला मुख्य विकास अधिकारी अजय कुमार पांडेय मौजूद रहे। विशेष अतिथि के रूप में वन विभाग के प्रभागीय वनाधिकारी पंकज कुमार शुक्ला, उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल के प्रदेश संयुक्त महामंत्री चारु चंद्र खरे, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के जिला महामंत्री कमलेश कुमार गुप्ता और जिला प्रभारी गोपाल चंद्र अवस्थी शामिल हुए।

इसके अलावा महोबा की किन्नर प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष किशोरी सखी, जिला उपाध्यक्ष रैना किन्नर और विश्व हिंदू महासंघ उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष प्रिंट मीडिया प्रकोष्ठ प्रवीण सिंह चंदेल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

नदी संरक्षण का दिया संदेश

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आचार्य महामंडलेश्वर टीना माँ ने कहा कि माँ केन केवल एक नदी नहीं, बल्कि बाँदा की जीवनदायिनी हैं। जिस प्रकार माँ अपने बच्चों का पालन-पोषण करती हैं, उसी प्रकार केन नदी इस क्षेत्र के लोगों का जीवन संवारती है। उन्होंने कहा कि बनारस की तर्ज पर आयोजित महाआरती देखकर उन्हें बेहद प्रसन्नता हुई। उन्होंने आयोजन समिति और महेश कुमार प्रजापति की पूरी टीम को आशीर्वाद देते हुए इस आयोजन को प्रतिवर्ष जारी रखने की कामना की।

पद्मश्री जल योद्धा उमाशंकर पांडेय ने कहा कि नदियों का संरक्षण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। केन जैसी निर्मल नदी को बचाने के लिए सभी को आगे आना होगा। नदी में गंदा पानी और प्लास्टिक न डालना ही उसकी सच्ची पूजा है।

मुख्य विकास अधिकारी अजय कुमार पांडेय ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि नदी संरक्षण और स्वच्छता के क्षेत्र में ऐसे कार्यक्रम समाज को जागरूक करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। जिला प्रशासन की ओर से भी इस दिशा में हरसंभव सहयोग किया जाएगा।

वन प्रभागीय अधिकारी पंकज कुमार शुक्ला ने कहा कि वन विभाग केन नदी के किनारे हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। नदी, जंगल और पर्यावरण एक-दूसरे से जुड़े हैं। इनके संरक्षण से ही आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित हो सकता है।

हर साल और भव्य आयोजन का लिया संकल्प

विश्व हिंदू महासंघ गौ रक्षा समिति के जिला अध्यक्ष महेश कुमार प्रजापति ने सभी अतिथियों, श्रद्धालुओं और कार्यकर्ताओं का आभार जताया। उन्होंने कहा कि माँ केन की महाआरती का भव्य आयोजन बाँदा के लिए गर्व की बात है। समिति का संकल्प है कि माँ केन को स्वच्छ और निर्मल रखने, गौ माता की रक्षा करने तथा सामाजिक एवं धार्मिक जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि नदी केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। केन नदी सुरक्षित रहेगी तो बाँदा का भविष्य भी सुरक्षित रहेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले वर्षों में माँ केन उत्सव को और अधिक भव्य रूप दिया जाएगा।

कार्यक्रम में जिला उपाध्यक्ष पिंकी प्रजापति, रोशनी प्रजापति, जिला अध्यक्ष अधिवक्ता प्रकोष्ठ दीपक शुक्ला, जिला प्रवक्ता संजय काकोनिया, जिला सह प्रभारी आलोक कुमार निगम, जिला महामंत्री राकेश कुमार त्रिपाठी, जिला कोषाध्यक्ष प्रेम गुप्ता, वीरेंद्र गुप्ता, जिला अध्यक्ष खाटू श्याम सेवा मंडल बाँदा लोहा सिंह, संतोष धुरिया, रजनीश प्रजापति, सदर तहसील उपाध्यक्ष ऋषि पाठक, विनय तिवारी, नीरज कुमार गुप्ता, जयवीर सिंह सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी मौजूद रहे।

माँ केन उत्सव ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ नदी संरक्षण और पर्यावरण स्वच्छता का संदेश भी दिया। हजारों दीपों से जगमगाता केन घाट देर तक श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना रहा।

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