तेल अवीव। इजराइल में संसदीय चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज है। देश की संसद की 120 सीटों के लिए मतदान जारी है। इस चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट से कड़ी चुनौती मिल रही है। चुनाव से पहले सामने आए छह ओपिनियन पोल में से चार में आइजनकोट के गठबंधन को बढ़त दिखाई गई है। वहीं, एक सर्वे में नेतन्याहू के गठबंधन को बढ़त और दूसरे में बहुमत मिलने का अनुमान जताया गया है।
इजराइल में सरकार बनाने के लिए संसद की कम से कम 61 सीटों का समर्थन जरूरी है। यहां चुनाव प्रणाली के तहत मतदाता सीधे प्रधानमंत्री के बजाय राजनीतिक दलों को वोट देते हैं। पार्टियों को मिले कुल वोटों के अनुपात के आधार पर संसद में सीटें आवंटित की जाती हैं। हालांकि, किसी पार्टी को संसद में प्रतिनिधित्व पाने के लिए कम से कम 3.25 प्रतिशत वैध वोट हासिल करना जरूरी है।
चुनाव में चार बड़े मुद्दे बने चर्चा का केंद्र
1. हमास के हमले की जिम्मेदारी: 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इजराइल की सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठे थे। विपक्ष सरकार से इस घटना की जांच और जवाबदेही तय करने की मांग करता रहा है। यह मुद्दा चुनाव में भी अहम माना जा रहा है।
2. सैन्य सेवा में छूट का विवाद: इजराइल में हरेदी यहूदी समुदाय के कुछ लोगों को धार्मिक अध्ययन के आधार पर सैन्य सेवा से छूट मिलती रही है। इस व्यवस्था को लेकर लंबे समय से विवाद है। आलोचकों का कहना है कि युद्ध और सुरक्षा चुनौतियों के बीच सैन्य सेवा का बोझ सभी समुदायों में समान रूप से बंटना चाहिए। नेतन्याहू और आइजनकोट के रुख में इस मुद्दे पर अंतर चुनावी बहस का हिस्सा है।
3. सुप्रीम कोर्ट की शक्तियां: न्यायपालिका की शक्तियों में बदलाव की कोशिशों को लेकर इजराइल में पहले भी बड़े विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं। न्यायपालिका की स्वतंत्रता और सरकार की शक्तियों की सीमा को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद चुनाव के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं।
4. राष्ट्रीय सुरक्षा और युद्ध: गाजा में संघर्ष, हमास की गतिविधियां और लेबनान की ओर से सुरक्षा चुनौतियां मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण विषय हैं। सरकार की युद्ध नीति और देश को सुरक्षित रखने की रणनीति पर भी राजनीतिक दलों के बीच बहस जारी है।
नेतन्याहू और आइजनकोट की सैन्य पृष्ठभूमि
बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने शुरुआती जीवन में इजराइली सेना की विशेष कमांडो यूनिट में सेवा दी थी। उनके बड़े भाई योनातन नेतन्याहू 1976 में युगांडा के एंटेबे में बंधकों को छुड़ाने के सैन्य अभियान के दौरान मारे गए थे।
वहीं, गादी आइजनकोट ने 1978 में गोलानी ब्रिगेड में एक सामान्य सैनिक के रूप में सैन्य करियर शुरू किया। करीब चार दशक की सेवा के बाद वह 2015 में इजराइल के सेना प्रमुख बने और 2019 तक इस पद पर रहे। गाजा युद्ध के दौरान दिसंबर 2023 में उनके बेटे गाल की मौत हो गई थी। इसके अगले दिन उनके भतीजे माओर कोहेन आइजनकोट भी दक्षिणी गाजा में लड़ाई के दौरान मारे गए थे।
चुनाव परिणाम पर टिकी दुनिया की नजर
इजराइल के इस चुनाव में सुरक्षा, सैन्य सेवा, न्यायपालिका और युद्ध से जुड़े मुद्दे मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं। ओपिनियन पोल में आइजनकोट के गठबंधन को मिली बढ़त ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। हालांकि, सर्वेक्षणों के अनुमान अंतिम परिणाम की गारंटी नहीं होते। वास्तविक तस्वीर मतदान के आधिकारिक नतीजों और सरकार बनाने के लिए होने वाले गठबंधन के प्रयासों के बाद ही स्पष्ट होगी।
नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। मतदान और ओपिनियन पोल से संबंधित दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
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