भागलपुर। विक्रमशिला सेतु के एक हिस्से के ध्वस्त होने के बाद गंगा जलमार्ग पर परिवहन गतिविधि अचानक बढ़ गई है। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) के अधिकारियों ने बताया कि पिछले 10 दिनों में करीब 12 बड़े मालवाहक जहाज गंगा के रास्ते पटना और वाराणसी की ओर रवाना हुए हैं।
सामान्य दिनों में जहां महीने भर में केवल दो से चार जहाज ही गुजरते थे, वहीं अब जलमार्ग पर आवाजाही कई गुना बढ़ गई है। भागलपुर से जुड़े आईडब्ल्यूएआई अधिकारियों के अनुसार सिर्फ इस सप्ताह चार बड़े मालवाहक जहाज गंगा में गुजरे हैं, जिनमें साहिबगंज से लोड की गई गिट्टी और पत्थर की खेप थी। सड़क मार्ग प्रभावित होने के कारण कारोबारी अब जलमार्ग को बेहतर और सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक आने वाले एक सप्ताह में सात से अधिक मालवाहक जहाजों के गुजरने की संभावना है।

विक्रमशिला सेतु ध्वस्त होने के बाद गंगा जलमार्ग पर बढ़ी हलचल
गंगा में बढ़ी नावों की संख्या
भागलपुर शहर के आसपास की गंगा में काम कर रही नावों की संख्या भी बढ़ गई है। आईडब्ल्यूएआई के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में क्षेत्र में 70 से अधिक नावें चल रही हैं, और हर घंटे लगभग 20 नावें गंगा में संचालन करती हैं। स्थानीय व्यापारी और नाविक मानते हैं कि सड़क मार्ग पर जाम और पुल के ध्वस्त होने से यातायात प्रभावित होने के कारण अब लोग और व्यापारी जलमार्ग को प्राथमिकता दे रहे हैं।
जुलाई से शहर के पास से गुजारेंगे बड़े मालवाहक जहाज
आईडब्ल्यूएआई ने जुलाई महीने से शहर के पास से बड़े जहाज और मालवाहक पोतों को गुजरने की तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि अगले 15-20 दिनों में गंगा का जलस्तर बढ़ने लगेगा, जिसे ध्यान में रखते हुए नई रूट योजना पर काम किया जा रहा है। जाहिर है, जहाजों को बरारी पुल घाट और माणिक सरकार घाट के पास बनी नई धारा से मुख्य गंगा धारा में प्रवेश कराया जाएगा। इसका उद्देश्य सुरक्षित और सुगम जल परिवहन सुनिश्चित करना है।
पुल से सटे मार्ग में जहाजों के गुजरने का खतरा हमेशा बना रहता है, इसलिए इस बार शहर की ओर वाले रास्ते से गुजरने की योजना बनाई गई है। साथ ही पुल के मलबे को हटाने के लिए पुल निगम को पत्र भेजा जा चुका है। अधिकारियों का कहना है कि मलबा हटाकर उसे विभाग को रिपोर्ट करना आवश्यक है।
छह जिलों में लगे ऑटोमेटिक टाइड गेज
आईडब्ल्यूएआई ने जलमार्ग विकास परियोजना के तहत बक्सर, सारण, पटना, मुंगेर, बेगूसराय और भागलपुर में ऑटोमेटिक टाइड गेज स्थापित किए हैं। इन गेज के माध्यम से राष्ट्रीय जलमार्ग एक पर बक्सर से भागलपुर के बीच गंगा नदी के जलस्तर की सटीक और रियल टाइम जानकारी उपलब्ध होगी। भागलपुर में यह गेज विक्रमशिला पुल के पास नवगछिया की ओर स्थापित किया गया है। जुलाई से इसे चालू करने की तैयारी है। इससे बड़े मालवाहक जहाज और पर्यटक पोत जलस्तर की तात्कालिक जानकारी प्राप्त कर सकेंगे, जिससे संचालन में सुरक्षा और सुविधा बढ़ेगी।
गंगा जलमार्ग बन रहा प्राथमिक विकल्प
आईडब्ल्यूएआई अधिकारियों के अनुसार, विक्रमशिला सेतु के ध्वस्त होने और सड़क मार्ग प्रभावित होने के बाद गंगा जलमार्ग ने भागलपुर समेत आसपास के जिलों में एक भरोसेमंद परिवहन विकल्प के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। स्थानीय व्यापारी और व्यवसायी अब माल भेजने और लेने के लिए सड़क की अपेक्षा जलमार्ग को प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि इससे समय की बचत होती है और माल भी सुरक्षित रहता है।
भविष्य की योजनाएं और सुरक्षा उपाय
आईडब्ल्यूएआई अधिकारियों ने बताया कि बड़े जहाजों और मालवाहक पोतों को शहर के पास से गुजरते समय सुरक्षा और नियंत्रण के सभी उपाय लागू होंगे। इस बार जहाजों को बरारी और माणिक सरकार घाट के पास नई धारा से ही प्रवेश कराया जाएगा, ताकि पुल और शहर के आसपास के इलाकों में किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके। आगामी सप्ताह में बड़ी संख्या में मालवाहक जहाजों के गुजरने की संभावना है। प्राधिकरण के अधिकारियों ने सभी नाविकों, मालवाहक जहाजों और पर्यटक पोत संचालकों को सावधानी बरतने और नियमों का पालन करने का निर्देश दिया है।
-1779084156530.jpg)
भागलपुर के लिए अवसर और चुनौती
गंगा जलमार्ग का बढ़ता महत्व न केवल व्यापारियों के लिए अवसर ला रहा है, बल्कि प्रशासन के लिए भी चुनौती बन गया है। पुल ध्वस्त होने के कारण जलमार्ग पर बढ़ती आवाजाही को सुरक्षित और सुगम बनाना प्रशासन की प्राथमिकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जलमार्ग पर बढ़ती आवाजाही से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। वहीं प्रशासन मलबा हटाने, जलस्तर नियंत्रण और सुरक्षा उपायों पर लगातार निगरानी रख रहा है।
News Wani
