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लखनऊ हत्याकांड में बड़ा खुलासा: ड्राइवर को 2 लाख में दिलाया गया असलहा, 40 लाख की सुपारी का सौदा; पांच और संदिग्ध रडार पर

लखनऊ। महाराणा प्रताप चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष और प्रॉपर्टी डीलर धीरेंद्र प्रताप सिंह की अपहरण के बाद हत्या के मामले में पुलिस की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। पूछताछ में हत्याकांड की साजिश से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए हैं। पुलिस के मुताबिक, धीरेंद्र की हत्या के लिए उनके ड्राइवर रवि तिवारी को असलहा खरीदने के लिए दो लाख रुपये दिए गए थे। इसके अलावा उसे एक लाख रुपये अलग से दिए गए थे।

पुलिस जांच में सामने आया है कि हत्या के बदले रवि को 40 लाख रुपये देने अथवा बांगरमऊ में दो दुकानें और 10 लाख रुपये नकद देने का सौदा तय हुआ था। रवि ने अपने साथी ओमकार को भी साजिश में शामिल कर लिया था। पूछताछ के दौरान दोनों ने पांच अन्य लोगों के नाम बताए हैं। इनमें कथित तौर पर सुपारी देने वालों और शूटरों से जुड़े लोग भी शामिल हैं।

अमीनाबाद से उपलब्ध कराया गया था असलहा

पुलिस के अनुसार, वारदात में इस्तेमाल असलहा रवि को अमीनाबाद से उपलब्ध कराया गया था। इसके लिए उसे दो लाख रुपये दिए गए थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हथियार किसने उपलब्ध कराया और इसके लिए पैसे किस व्यक्ति ने दिए थे।

मामले की जांच के लिए पुलिस की पांच टीमें लगाई गई हैं। एसटीएफ भी जांच में सहयोग कर रही है और उन्नाव में संदिग्धों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

पूछताछ में सामने आए पांच और नाम

रवि ने पूछताछ के दौरान उन्नाव निवासी मोनू सिंह का नाम भी लिया था और दावा किया था कि वह वारदात के समय घटनास्थल पर मौजूद था। हालांकि, आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच में मोनू मौके पर दिखाई नहीं दिया। इसके बाद पुलिस रवि के इस बयान की भी जांच कर रही है।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रवि ने मोनू का नाम क्यों लिया और क्या किसी अन्य व्यक्ति के कहने पर उसे मामले में फंसाने की कोशिश की गई।

पोस्टमॉर्टम में दो गोलियां लगने की पुष्टि

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में धीरेंद्र प्रताप सिंह के शरीर में दो गोलियां लगने की पुष्टि हुई है। एक गोली सिर में लगी थी, जबकि दूसरी गोली सीने को आरपार करते हुए निकल गई। जांच के लिए विसरा भी सुरक्षित कराया गया है।

धीरेंद्र की गुमशुदगी के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी। बाद में ड्राइवर रवि की निशानदेही पर उनका शव नहर से बरामद किया गया। पुलिस ने धीरेंद्र की एसयूवी को भी कब्जे में लिया है, जिसमें गोली का एक खोखा फंसा हुआ मिला था।

धीरेंद्र ने ड्राइवर को शादी में दिए थे सात लाख रुपये

परिजनों के मुताबिक, रवि करीब 10 वर्षों से धीरेंद्र के साथ था और उनका बेहद विश्वासपात्र माना जाता था। वह उनकी निजी और कारोबारी गतिविधियों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां रखता था।

कुछ महीने पहले रवि के परिवार में शादी हुई थी। बताया गया है कि धीरेंद्र ने शादी के खर्च के लिए रवि को करीब सात लाख रुपये दिए थे। इसके बावजूद पुलिस की जांच में रवि पर हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप सामने आया है।

सरकारी जमीन के विवाद से जुड़ रही हत्या की वजह

अब तक की जांच में हत्या के पीछे बांगरमऊ में सरकारी जमीन से जुड़ा विवाद सामने आया है। बताया जा रहा है कि धीरेंद्र ने सरकारी जमीन पर हुए कथित कब्जों की शिकायत प्रशासन से की थी। इसी वजह से कुछ लोगों से उनकी रंजिश होने की आशंका जताई जा रही है।

पुलिस बांगरमऊ पहुंचकर कई लोगों से पूछताछ कर चुकी है। तहसील प्रशासन से भी सरकारी जमीन पर कब्जे और उससे संबंधित शिकायतों की जानकारी मांगी गई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि धीरेंद्र की शिकायत से किन लोगों के हित प्रभावित हो रहे थे।

जांच में कुछ भूमाफिया और प्रभावशाली लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस जमीन विवाद, सरकारी जमीन पर कब्जे और हत्या की कथित सुपारी के बीच संबंध तलाश रही है।

पुलिस ने कोर्ट में दाखिल की रिमांड अर्जी

हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने और अन्य आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस ने रवि की कस्टडी रिमांड के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल की है। रिमांड के दौरान पुलिस उससे हथियार की बरामदगी, सुपारी देने वालों, शूटरों और अन्य साजिशकर्ताओं के बारे में पूछताछ करेगी।

पुलिस उपायुक्त दक्षिणी मोहम्मद मुश्ताक के मुताबिक, हत्याकांड में शूटरों समेत चार से पांच अन्य लोगों के बारे में जानकारी मिली है। उनकी तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं। पुलिस का कहना है कि हत्या की पूरी वजह और साजिश में शामिल सभी लोगों की भूमिका जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।

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