कानपुर। कानपुर नगर निगम में 15वें वित्त आयोग के तहत विकास कार्यों के लिए प्रस्तावित करीब 594.10 करोड़ रुपये के बजट को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। वार्डवार प्रस्तावित बजट में बड़े अंतर के बाद पार्षदों के बीच राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है। कई पार्षदों ने आरोप लगाया है कि कुछ वार्डों में करोड़ों रुपये के विकास कार्य प्रस्तावित किए गए, जबकि विरोधी तेवर रखने वाले कई पार्षदों के वार्डों में बजट बेहद कम या शून्य रखा गया।
15वें वित्त आयोग के तहत नगर निगम के छह जोन के विभिन्न वार्डों में सड़क, नाला और अन्य विकास कार्यों के लिए पिछले दो वर्षों में करीब 594.10 करोड़ रुपये के कार्य प्रस्तावित किए गए हैं। इन प्रस्तावित कार्यों और टेंडर प्रक्रिया को लेकर अब जांच शुरू हो गई है।
कुछ वार्डों में करोड़ों, कई में बजट शून्य
वार्डवार आंकड़ों में काफी असमानता सामने आई है। जोन-2 के वार्ड-62 के पार्षद भवानी शंकर राय के लिए सबसे अधिक करीब 14.41 करोड़ रुपये के विकास कार्य प्रस्तावित किए गए हैं। वहीं कई ऐसे वार्ड हैं, जहां विकास कार्यों के लिए कोई राशि प्रस्तावित नहीं की गई।
वार्ड-38 के पार्षद हरि स्वरूप तिवारी, वार्ड-4 के अंकित मौर्य और वार्ड-10 की पार्षद लक्ष्मी कोरी के वार्ड में प्रस्तावित बजट शून्य बताया गया है। इसे लेकर संबंधित पार्षदों ने नगर निगम की बजट प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं।
जोन-2 में सबसे अधिक बजट को लेकर चर्चा
जोन-2 के कई वार्डों में अपेक्षाकृत अधिक बजट प्रस्तावित होने को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के विधानसभा क्षेत्र में आता है। पार्षदों का आरोप है कि बजट आवंटन में सभी वार्डों को समान प्राथमिकता नहीं दी गई।
हालांकि, बजट आवंटन के पीछे वास्तविक कारण और प्रक्रिया को लेकर नगर निगम की ओर से विस्तृत स्थिति स्पष्ट किया जाना बाकी है।
अलग-अलग जोन में भी दिखा बजट का बड़ा अंतर
जोन-1 में वार्ड-32 के पार्षद आकर्ष बाजपेयी के लिए करीब 5.91 करोड़ रुपये और वार्ड-109 के पार्षद हाजी सुहेल अहमद के लिए करीब 3.57 करोड़ रुपये प्रस्तावित बताए गए हैं। वहीं वार्ड-94 के पार्षद सैय्यद अनवर अली के वार्ड में बजट शून्य बताया गया है।
जोन-3 में वार्ड-88 की पार्षद कंचन शुक्ला के लिए करीब 8.50 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं, जबकि वार्ड-38 के हरि स्वरूप तिवारी के वार्ड में कोई राशि प्रस्तावित नहीं है।
जोन-4 में वार्ड-15 के पार्षद सौरभ देव के लिए करीब 6.96 करोड़ और वार्ड-42 के जीतेंद्र बाजपेयी के लिए 6.21 करोड़ रुपये प्रस्तावित बताए गए हैं। दूसरी ओर कुछ वार्डों में बजट शून्य होने का दावा किया गया है।
जोन-5 में वार्ड-34 के पार्षद नीरज गुप्ता के लिए करीब 9.45 करोड़ और वार्ड-93 के पार्षद नवीन पंडित के लिए 5.70 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं, जबकि वार्ड-50 की पार्षद अनुप्रिया दुबे के लिए करीब 32 लाख रुपये की राशि प्रस्तावित बताई गई है।
जोन-6 में वार्ड-44 की पार्षद कुंती के लिए करीब 7.01 करोड़ रुपये, जबकि वार्ड-40 के भाजपा पार्षद महेंद्र पांडे के लिए करीब 52.50 लाख रुपये प्रस्तावित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
पार्षदों ने लगाए भेदभाव के आरोप
भाजपा पार्षद विकास जायसवाल ने आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों में उनके वार्ड में विकास कार्यों के लिए कोई बजट नहीं दिया गया। उनका कहना है कि रिकॉर्ड में करीब 70 लाख रुपये का बजट दिखाया जा रहा है, लेकिन संबंधित कार्य उनके प्रस्ताव पर स्वीकृत नहीं हुआ था और उसका टेंडर भी निरस्त किया जा चुका है।
वहीं भाजपा पार्षद और बागी तेवर अपनाने वाले हरि स्वरूप तिवारी ने आरोप लगाया कि उनके वार्ड को 15वें वित्त आयोग से अब तक पर्याप्त बजट नहीं मिला। उन्होंने नगर निगम की कार्यप्रणाली और बजट आवंटन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
वार्ड-10 की पार्षद लक्ष्मी कोरी ने दावा किया कि उनके वार्ड को 14वें और 15वें वित्त आयोग से अपेक्षित विकास बजट नहीं मिला। उन्होंने क्षेत्र में पानी की समस्या और नलकूप की जरूरत का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बजट की कमी का सीधा असर स्थानीय विकास पर पड़ रहा है।
50 लाख की सड़क को लेकर भी सवाल
वार्ड-37 के भाजपा पार्षद पवन गुप्ता ने आरोप लगाया कि 15वें वित्त आयोग से करीब 50 लाख रुपये की राशि ऐसी सड़क पर खर्च की गई, जो जलकल विभाग के कार्यालय से अधिकारी के सरकारी आवास तक जाती है। उन्होंने इसे जनता की प्राथमिक जरूरतों के बजाय अधिकारियों के हित से जोड़ते हुए जांच की मांग की।
पवन गुप्ता ने यह भी आरोप लगाया कि कई पार्षदों के प्रस्तावों को प्राथमिकता नहीं दी गई और बजट आवंटन में पारदर्शिता का अभाव रहा।
594 करोड़ के टेंडर भी जांच के दायरे में
मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद 15वें वित्त आयोग से संबंधित करीब 594 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के टेंडर भी जांच के दायरे में आ गए हैं। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने प्रस्ताव तैयार होने से लेकर उनकी स्वीकृति और निर्माण कार्यों तक की प्रक्रिया की जांच शुरू कराई है।
अब जांच में यह देखा जाएगा कि किस वार्ड में किस आधार पर बजट प्रस्तावित किया गया, प्रस्ताव किस स्तर से तैयार हुए, टेंडर प्रक्रिया नियमों के अनुरूप हुई या नहीं और स्वीकृत धनराशि का इस्तेमाल निर्धारित विकास कार्यों में किया गया या नहीं।
बजट आवंटन को लेकर लगे आरोपों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल 15वें वित्त आयोग के 594 करोड़ रुपये के प्रस्तावित विकास कार्यों ने कानपुर नगर निगम की कार्यप्रणाली और बजट वितरण को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।
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