फतेहपुर। जनपद में वन्यजीव संरक्षण कानूनों को ठेंगा दिखाते हुए चोरी-छिपे तोते के बच्चे और कछुओं की अवैध बिक्री का धंधा तेजी से फल-फूल रहा है। शहर से लेकर कस्बाई इलाकों तक कथित रूप से कुछ लोग गुप्त तरीके से प्रतिबंधित पक्षियों और जीवों की खरीद-फरोख्त कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं।
सूत्रों के अनुसार सुबह और शाम के समय कुछ स्थानों पर पिंजरों में बंद तोते के बच्चे और छोटे कछुए ग्राहकों को ऊंचे दामों में बेचे जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि वन विभाग, स्थानीय प्रशासन और वन्यजीव तस्करी पर कार्रवाई करने वाली एजेंसियों को इसकी भनक तक नहीं लग रही, या फिर जानबूझकर कार्रवाई से दूरी बनाई जा रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार तोते और कई प्रजाति के कछुओं की खरीद-बिक्री भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत प्रतिबंधित है। इसके बावजूद जनपद में खुलेआम यह अवैध कारोबार चलना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रहती है। जानकारों की मानें तो इन मासूम जीवों को पकड़ने के दौरान बड़ी संख्या में उनकी मौत भी हो जाती है। तस्कर जंगलों और ग्रामीण इलाकों से बच्चों को पकड़कर बाजारों तक पहुंचाते हैं, जहां इन्हें शौक के नाम पर बेचा जाता है। इससे वन्यजीवों की संख्या पर भी बुरा असर पड़ रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब समय-समय पर वन विभाग और अन्य एजेंसियां अभियान चलाने का दावा करती हैं, तो फिर यह अवैध कारोबार आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है? लोगों ने जिलाधिकारी और उच्च अधिकारियों से मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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