देश के पहाड़ी राज्यों खासकर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बादल फटने, अचानक बाढ़ आने और भूस्खलन की बढ़ती घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार ने लोकसभा में अहम जानकारी दी है. सरकार के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन के साथ मानव गतिविधियां भी आपदा के जोखिम को बढ़ा रही हैं.
जलवायु परिवर्तन का असर अब पहाड़ी क्षेत्रों में साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। भारी बारिश के दौरान क्लाउड बर्स्ट, फ्लैश फ्लड और लैंडस्लाइड जैसी घटनाओं में बढ़ोतरी ने सरकार और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। मौसम के बदलते पैटर्न को देखते हुए संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में सतर्कता बढ़ाने और समय रहते बचाव की तैयारियां करने के निर्देश दिए गए हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, तापमान में बढ़ोतरी और मौसम के असामान्य बदलावों के कारण कम समय में अत्यधिक बारिश जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है। पहाड़ों में तेज बारिश के बाद अचानक नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ने से फ्लैश फ्लड की स्थिति बन सकती है, जबकि कमजोर ढलानों पर भूस्खलन का खतरा भी बढ़ जाता है।
सरकार ने प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी मजबूत करने, मौसम संबंधी चेतावनियों को तेजी से लोगों तक पहुंचाने और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को तैयार रखने पर जोर दिया है। स्थानीय प्रशासन को भी ऐसे इलाकों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं, जहां भारी बारिश के दौरान जान-माल का खतरा अधिक हो सकता है।
बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं के बीच विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ बेहतर आपदा प्रबंधन और मजबूत शुरुआती चेतावनी प्रणाली बेहद जरूरी है।
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