कर्नाटक: पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की निर्धारित सीमा को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। कर्नाटक सरकार की ओर से कराई गई प्रयोगशाला जांच में दावा किया गया है कि राज्य के सात जिलों से लिए गए 14 पेट्रोल सैंपलों में से 11 में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित 20 प्रतिशत से अधिक पाई गई। कुछ सैंपलों में यह मात्रा 30 प्रतिशत से भी ज्यादा दर्ज होने की बात कही गई है। इस मामले ने पेट्रोल की गुणवत्ता, वाहनों के माइलेज और उपभोक्ताओं के हितों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच के सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, इंडियन ऑयल के एक सैंपल में 31.2 प्रतिशत और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के एक सैंपल में 30.5 प्रतिशत एथेनॉल मिलने का दावा किया गया। वहीं, भारत पेट्रोलियम के कुछ सैंपलों में भी एथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक बताई गई है। इसके अलावा नायरा और शेल जैसी कंपनियों के पेट्रोल के नमूनों में भी निर्धारित सीमा से ज्यादा एथेनॉल मिलने की बात सामने आई है।
पेट्रोल की गुणवत्ता और वाहन चालकों की चिंता
पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ने को लेकर वाहन मालिकों की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, वाहन की तकनीकी क्षमता और इंजन के डिजाइन के आधार पर अधिक एथेनॉल मिश्रण का असर माइलेज तथा कुछ इंजन और ईंधन प्रणाली के पुर्जों पर पड़ सकता है। ऐसे में उपभोक्ताओं के सामने यह सवाल है कि उन्हें पेट्रोल में एथेनॉल की वास्तविक मात्रा की जानकारी कैसे मिलेगी।
कर्नाटक सरकार की ओर से सामने आए आंकड़ों में दावा किया गया है कि यदि अधिक एथेनॉल मिश्रण के कारण वाहनों का माइलेज 10 प्रतिशत तक घटता है, तो देशभर के वाहन मालिकों को सालाना लगभग 62 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। इसके अलावा वाहनों की सर्विसिंग और मरम्मत पर करीब 39 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आने का अनुमान जताया गया है।
तेल कंपनियों ने जांच रिपोर्ट पर उठाए सवाल
कर्नाटक सरकार की जांच के बाद इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने जांच की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। तीनों कंपनियों का कहना है कि देशभर में आपूर्ति किया जा रहा E20 पेट्रोल भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के निर्धारित मानक IS 17021 के अनुरूप है।
कंपनियों ने दावा किया कि पेट्रोल के नमूने लेने, उन्हें सुरक्षित रखने और प्रयोगशाला तक पहुंचाने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है। उनका कहना है कि यदि सैंपल लेने और जांच कराने की प्रक्रिया नियमों के अनुसार नहीं हुई है, तो रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
दोबारा जांच कराने की मांग
तेल कंपनियों ने कर्नाटक सरकार से सैंपल लेने की पूरी प्रक्रिया के दस्तावेज, पेट्रोल पंपों की जांच रिपोर्ट और इस्तेमाल किए गए परीक्षण तरीकों की जानकारी मांगी है। कंपनियों ने यह भी मांग की है कि संबंधित सैंपलों की दोबारा जांच किसी अधिकृत प्रयोगशाला में कराई जाए।
उनका प्रस्ताव है कि दोबारा जांच के दौरान राज्य सरकार और तेल कंपनियों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहें, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संपन्न हो सके।
E20 पेट्रोल को लेकर उठे कई सवाल
सरकार की ओर से पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने का उद्देश्य आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना और वैकल्पिक ईंधन को प्रोत्साहित करना है। हालांकि, कर्नाटक में सामने आए जांच के दावों ने ईंधन की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के पालन को लेकर बहस शुरू कर दी है।
फिलहाल इस मामले में जांच रिपोर्ट और तेल कंपनियों के दावों के बीच मतभेद बना हुआ है। दोबारा जांच के नतीजों से ही स्पष्ट हो सकेगा कि पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित मानकों के अनुरूप थी या नहीं। उपभोक्ताओं को भी इस मामले में स्पष्ट और प्रमाणिक जानकारी मिलने का इंतजार है।
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