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विज्ञापनों की आड़ में साइबर जासूसी का खतरा, बिना क्लिक किए डिवाइस में मालवेयर पहुंचाने की कोशिश

इजराइल की कंपनी डिस्कवर टेक पर विज्ञापनों के माध्यम से मोबाइल और कंप्यूटर में जासूसी करने वाले मालवेयर पहुंचाने की कोशिश से जुड़े गंभीर आरोप सामने आए हैं। टोरंटो यूनिवर्सिटी की सिटिजन लैब की जांच के मुताबिक, इस गतिविधि में यूजर्स को विज्ञापन पर क्लिक करने की जरूरत नहीं थी। कुछ मामलों में विज्ञापन दिखाई दिए बिना भी डिवाइस तक संदिग्ध कोड पहुंचने की आशंका जताई गई है।

जांच में 1.20 लाख से अधिक वेबसाइटों और 75 हजार से ज्यादा ऐप से जुड़े विज्ञापनों के रिकॉर्ड मिले। रिपोर्ट के अनुसार, इस नेटवर्क के विज्ञापन संयुक्त राष्ट्र (UN), नाटो और कई सरकारी संस्थानों से जुड़े नेटवर्क तक भी पहुंचे। भारत में इस्तेमाल होने वाले ट्रूकॉलर, एमएक्स प्लेयर और लूडो स्टार जैसे ऐप के नाम भी जांच में सामने आए हैं।

विज्ञापनों के जरिए डिवाइस की जानकारी जुटाने की कोशिश

जांचकर्ताओं के अनुसार, संदिग्ध विज्ञापनों के माध्यम से यूजर्स के डिवाइस की पहचान करने और उनके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ऐप व वेबसाइटों से संबंधित जानकारी जुटाने की कोशिश की जाती थी। इसके बाद चुनिंदा डिवाइस को निशाना बनाकर जासूसी सॉफ्टवेयर पहुंचाने का प्रयास किया जा सकता था।

इस तरह की गतिविधि में विज्ञापन सामान्य दिखाई दे सकते हैं, जिससे यूजर्स के लिए खतरे को पहचानना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, विज्ञापनों के रिकॉर्ड मिलने का मतलब यह नहीं है कि उनसे जुड़े सभी डिवाइस हैक हो गए या सभी यूजर्स की जासूसी हुई।

161 देशों तक पहुंचने का दावा

रिपोर्ट के मुताबिक, डिस्कवर टेक के विज्ञापन नेटवर्क की गतिविधियां 161 देशों तक दर्ज की गईं। कंपनी के एक सर्वर पर जनवरी से जून 2026 के बीच 36.4 लाख से अधिक संभावित यूजर्स से जुड़े रिकॉर्ड मिलने की बात कही गई है।

जांच में यह भी सामने आया कि विज्ञापनों के माध्यम से मोबाइल नंबर जुटाने की कोशिश करने वाला ‘डार्क कार्टोग्राफर’ नाम का एक अन्य समूह 30 से ज्यादा देशों में सक्रिय था। इस गतिविधि का उद्देश्य लोगों की पहचान से जुड़ी जानकारी प्राप्त करना बताया गया है।

मीडिया संस्थानों और सरकारी नेटवर्क तक पहुंचे विज्ञापन

जांच में बीबीसी, न्यूयॉर्क टाइम्स, फॉक्स न्यूज, सीबीसी और याहू जैसी वेबसाइटों पर संदिग्ध विज्ञापन दिखने के रिकॉर्ड मिलने की बात कही गई है। इसके अलावा अमेरिका के रक्षा विभाग, स्वीडन के सशस्त्र बलों और नॉर्वे की पुलिस के नेटवर्क तक भी ऐसे विज्ञापन पहुंचने की जानकारी सामने आई।

रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र, नाटो, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी और अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय से जुड़े नेटवर्क का भी उल्लेख किया गया है। इससे विज्ञापन आधारित साइबर सुरक्षा जोखिमों की गंभीरता का पता चलता है।

गूगल ने कंपनी को प्रमाणित विज्ञापन सूची से हटाया

रिपोर्ट के अनुसार, डिस्कवर टेक वर्ष 2020 से गूगल की प्रमाणित विज्ञापन कंपनियों की सूची में शामिल थी। सिटिजन लैब की जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद गूगल ने कंपनी को इस सूची से हटा दिया।

यह मामला ऑनलाइन विज्ञापनों की सुरक्षा और डिजिटल निजता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यूजर्स को अपने मोबाइल और कंप्यूटर का सॉफ्टवेयर अपडेट रखना चाहिए, भरोसेमंद स्रोतों से ही ऐप डाउनलोड करने चाहिए और संदिग्ध वेबसाइटों से बचना चाहिए।

महत्वपूर्ण: जांच में सामने आए विज्ञापनों और संभावित यूजर्स के आंकड़े सीधे तौर पर सफल साइबर हमलों या प्रभावित डिवाइसों की संख्या नहीं बताते। मामले से जुड़े निष्कर्षों को जांच रिपोर्ट के संदर्भ में ही समझना जरूरी है।

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