Breaking News

सपा छात्र सभा की नीली ड्रेस पर छिड़ी बहस, भीम आर्मी और भाजपा ने उठाए सवाल

कानपुर। समाजवादी पार्टी की छात्र सभा के नए ड्रेस कोड को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। छात्र सभा ने अपने कार्यकर्ताओं के लिए अब नीली जींस और नीली टी-शर्ट को ड्रेस कोड बनाया है। पार्टी की ओर से इसे युवाओं और खासकर Gen-Z छात्रों के बीच संवाद बढ़ाने की पहल बताया जा रहा है।

नई ड्रेस को लेकर विपक्षी दलों और संगठनों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। भीम आर्मी ने सवाल उठाते हुए कहा कि केवल नीला रंग अपनाने से आंबेडकरवादी विचारधारा से जुड़ाव साबित नहीं होता। वहीं भाजपा नेताओं ने भी सपा पर ड्रेस बदलने के बजाय विचारधारा और मानसिकता में बदलाव करने की जरूरत बताई।

कॉलेज और यूनिवर्सिटी में 15 दिन चलेगा अभियान

नई ड्रेस के साथ छात्र सभा ने 15 सितंबर से प्रदेशभर के कॉलेजों, यूनिवर्सिटी और हॉस्टलों में 15 दिन का विशेष अभियान शुरू किया है। इस दौरान छात्र-छात्राओं से संवाद कर उनकी समस्याएं और आने वाली सरकार से अपेक्षाएं जानी जाएंगी।

छात्र सभा के प्रदेश सचिव सिराज हुसैन के मुताबिक, आज कॉलेज और यूनिवर्सिटी में बड़ी संख्या में युवा जींस और टी-शर्ट पहनते हैं। ऐसे में छात्रों के बीच आसानी से संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से ड्रेस कोड में बदलाव किया गया है।

उन्होंने कहा कि नई ड्रेस को नई सपा, नए लोगों और नई Gen-Z से जोड़कर देखा जा रहा है। उनके अनुसार नीले रंग का चयन किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी के रंग से जुड़ा हुआ नहीं है।

युवाओं से लिए जाएंगे सुझाव

अभियान के दौरान छात्र सभा युवाओं से शिक्षा, रोजगार और अन्य मुद्दों को लेकर सुझाव भी लेगी। संगठन का कहना है कि छात्रों से मिले उपयोगी सुझावों को पार्टी के चुनावी घोषणापत्र में शामिल करने पर विचार किया जाएगा।

सपा की ओर से युवाओं के बीच अपनी पिछली सरकार की योजनाओं और कामों को भी रखा जाएगा। इसमें लैपटॉप वितरण, कन्या विद्या धन और ‘पढ़ो बेटी, बढ़ो बेटी’ जैसी योजनाओं का उल्लेख किया जाएगा।

नीले रंग को लेकर क्यों बढ़ी राजनीतिक चर्चा?

नीला रंग लंबे समय से दलित और आंबेडकरवादी राजनीति के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल होता रहा है। इसी वजह से छात्र सभा की नई नीली ड्रेस को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

भीम आर्मी के प्रदेश उपाध्यक्ष कौशल वाल्मीकि ने कहा कि केवल नीली ड्रेस पहनने से डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों से जुड़ाव साबित नहीं होता। उन्होंने सपा पर राजनीतिक लाभ के लिए नीले रंग का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और कहा कि विचारधारा से जुड़ाव केवल पहनावे से नहीं बल्कि नीतियों और कार्यों से दिखाई देता है।

भाजपा ने भी साधा निशाना

भाजपा युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष शिवांग मिश्रा ने भी सपा के नए ड्रेस कोड पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पार्टी को केवल ड्रेस बदलने के बजाय अपनी विचारधारा और मानसिकता में बदलाव पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने सपा के पुराने बयानों और नेताओं से जुड़े विवादों का जिक्र करते हुए कहा कि केवल पहनावा बदलने से राजनीतिक छवि नहीं बदलती। वहीं सपा की ओर से नीली ड्रेस को युवाओं के बीच संवाद स्थापित करने और Gen-Z को संगठन से जोड़ने की पहल बताया जा रहा है।

इस तरह छात्र सभा के नए ड्रेस कोड ने युवाओं के बीच संगठन की पहुंच बढ़ाने की कोशिश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की राजनीति में नीले रंग के प्रतीक और उसके राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

About NW-Editor

Check Also

पुलिस चौकी में सपा विधायक और भाजपा पार्षद आमने-सामने भिड़े, अमन को छुड़ाने पर बढ़ा विवाद

कानपूर। पुलिस चौकी में एक युवक को लेकर उस समय तनाव की स्थिति बन गई, …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *