फतेहपुर। जोर से बोलो जय माता दी, जय काली कल्याण करो मां, जग जननी जय-जय मां… मंत्र, जाप, पाठ और आरती। शनिवार को घर हो या मंदिर अथवा दुर्गा पंडाल, हर जगह भक्तिमय माहौल देखने को मिला। शारदीय नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना के लिए सिद्धपीठों, देवी मंदिरों और दुर्गा पंडालों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। घरों में भी धार्मिक अनुष्ठान किए गए।
मां दुर्गा की सातवीं शक्ति का नाम कालरात्रि है। शारदीय नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की उपासना करने का विधान है। पुजारियों के अनुसार, मां के शरीर का रंग घने अंधकार की तरह काला है। उनके बाल बिखरे हुए हैं और गले में बिजली की तरह चमकने वाली माला सुशोभित है। मां के तीन नेत्र हैं। उनकी नासिका से निकलने वाली सांसों से अग्नि की ज्वालाएं निकलती रहती हैं।
मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है, लेकिन वे दुष्टों का विनाश करने वाली हैं। दानव, दैत्य, राक्षस, भूत और प्रेत आदि उनके स्मरण मात्र से भयभीत हो जाते हैं। मां कालरात्रि ग्रह-बाधाओं को भी दूर करने वाली मानी जाती हैं। उनकी पूजा-अर्चना करने से भक्तों को पापों से मुक्ति मिलने, शत्रुओं का नाश होने और तेज में वृद्धि होने की मान्यता है। मां जगदंबा की कृपा प्राप्त करने के लिए नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि का जाप और पूजन किया जाता है।
उधर, मंदिरों और दुर्गा पंडालों में अद्भुत छटा देखने को मिली। शहर में पूरे दिन माता के भजन गूंजते रहे। वहीं, कई स्थानों पर विशाल भंडारों का आयोजन किया गया, जिनमें श्रद्धालुओं को पूरे दिन प्रसाद वितरित किया गया।

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