चंडीगढ़। डिजिटल इंडिया अभियान को नई गति देते हुए चंडीगढ़ प्रशासन ने राशन सब्सिडी वितरण प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। अब शहर के लगभग 75 हजार पात्र लाभार्थियों को राशन सब्सिडी पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के डिजिटल रुपया ऐप के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। यह पहल देश में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस नई व्यवस्था के तहत लाभार्थियों को डिजिटल रुपया वॉलेट उपलब्ध कराया जाएगा, जिसमें सरकार द्वारा दी जाने वाली राशन सब्सिडी सीधे जमा होगी। इसके लिए लाभार्थियों को PNB डिजिटल रुपया ऐप डाउनलोड कर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। वॉलेट सक्रिय होने के बाद सब्सिडी सीधे उसी में ट्रांसफर की जाएगी।

प्रशासन का मानना है कि डिजिटल रुपये के माध्यम से सब्सिडी वितरण प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज, सुरक्षित और पारदर्शी बनेगी। इससे भुगतान में होने वाली देरी कम होगी और लाभ सीधे पात्र व्यक्ति तक पहुंचेगा। साथ ही सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर बेहतर निगरानी भी संभव होगी। डिजिटल रुपया भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी की गई आधिकारिक डिजिटल मुद्रा है, जिसकी वैल्यू नकद रुपये के बराबर होती है। हालांकि यह पूरी तरह डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध रहती है और इसका उपयोग मोबाइल ऐप के जरिए किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल रुपया भविष्य में सरकारी भुगतान व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बना सकता है।
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चंडीगढ़ प्रशासन की यह पहल डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के साथ-साथ सरकारी सब्सिडी वितरण प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में भी अहम मानी जा रही है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में पेंशन, छात्रवृत्ति, गैस सब्सिडी और अन्य सरकारी योजनाओं के भुगतान में भी डिजिटल रुपये का इस्तेमाल बढ़ाया जा सकता है। हालांकि इस व्यवस्था के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। डिजिटल साक्षरता, स्मार्टफोन की उपलब्धता और ऐप के उपयोग की जानकारी सभी लाभार्थियों तक पहुंचाना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होगा। इसके अलावा साइबर सुरक्षा और तकनीकी सहायता को भी मजबूत बनाए रखना आवश्यक होगा, ताकि लाभार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चंडीगढ़ का यह प्रयोग सफल साबित होता है, तो यह देशभर में डिजिटल रुपया आधारित सरकारी भुगतान प्रणाली लागू करने का आधार बन सकता है। इससे न केवल सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिलेगी।
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