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जौहर ट्रस्ट पर ईडी की कार्रवाई तेज, सरकारी धन के इस्तेमाल और कथित मनी लांड्रिंग के सबूतों की जांच

रामपुर:  पूर्व मंत्री आजम खां और उनसे जुड़े जौहर ट्रस्ट की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जौहर यूनिवर्सिटी समेत ट्रस्ट से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी कर वित्तीय लेनदेन, सरकारी धन के इस्तेमाल और कथित मनी लांड्रिंग से जुड़े दस्तावेज व डिजिटल रिकॉर्ड खंगाले।

जांच में यूनिवर्सिटी के निर्माण में सरकारी विभागों के बजट के इस्तेमाल का मामला सामने आया है। आयकर विभाग की जांच के मुताबिक, ट्रस्ट ने यूनिवर्सिटी के 59 भवनों के निर्माण पर करीब 45 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया था, जबकि जांच में यह खर्च करीब 494 करोड़ रुपये पाया गया। जांच एजेंसियों को आशंका है कि बड़े पैमाने पर ऐसी रकम को ट्रस्ट में डायवर्ट किया गया, जिसका इस्तेमाल निर्माण कार्यों में हुआ।

सूत्रों के मुताबिक, जौहर यूनिवर्सिटी के विभिन्न अवस्थापना कार्यों में कई सरकारी विभागों की धनराशि खर्च हुई। इनमें सीएंडडीएस, जल निगम, लोक निर्माण विभाग, संस्कृति विभाग, ग्राम्य विकास, पिछड़ा वर्ग, नगर विकास और सिंचाई विभाग शामिल हैं। जांच में इन विभागों से जुड़े करीब 150 करोड़ रुपये के खर्च के प्रमाण मिलने की बात सामने आई है।

सांसद और विधायक निधि से भी हुआ था खर्च

जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण और अवस्थापना कार्यों में सांसद व विधायक निधि से भी करोड़ों रुपये खर्च किए जाने का मामला सामने आया था। बताया गया है कि करीब 4.57 करोड़ रुपये विभिन्न जनप्रतिनिधियों की निधि से लगाए गए थे। मामला न्यायालय तक पहुंचने के बाद पूरी राशि वापस करनी पड़ी थी।

नकद जमा और कथित फर्जी दान की भी जांच

जांच एजेंसियां ट्रस्ट के बैंक खातों में जमा बड़ी मात्रा में नकदी और दान की रकम की भी पड़ताल कर रही हैं। वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच ट्रस्ट के खातों में आय की तुलना में अधिक नकदी जमा होने की बात जांच में सामने आई। एजेंसियों को कथित तौर पर बिना हिसाब वाली रकम को दान के रूप में दिखाकर खातों में जमा किए जाने की आशंका है।

ईडी ने सहारनपुर में ट्रस्ट का लेखा-जोखा संभालने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट के कार्यालय और आवास तथा दिल्ली में एक सहयोगी ट्रस्ट के ठिकाने पर भी तलाशी ली। अधिकारियों ने जौहर यूनिवर्सिटी में ट्रस्ट से जुड़े कमरों की तलाशी लेकर दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जुटाए तथा कर्मचारियों से पूछताछ की।

जांच का फोकस सरकारी धन के कथित दुरुपयोग, ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन, संदिग्ध दानदाताओं और निर्माण कार्यों में धन के स्रोत पर है। ईडी इन सभी पहलुओं को मनी लांड्रिंग से जुड़े मामलों के संदर्भ में जांच रही है।

इनमें सीएंडडीएस, लोक निर्माण विभाग, संस्कृति विभाग, ग्राम्य विभाग विभाग, पिछड़ा वर्ग विभाग, नगर विकास और सिंचाई विभाग शामिल थे। जल निगम का दो अलग-अलग मदों में बजट खर्च किया गया था। इससे पुल, सड़क, रिवरफ्रंट, नहर को चौड़ा करने, इमारतों के निर्माण समेत तमाम कार्य कराए गए थे।
सबसे ज्यादा सीएंडडीएस और जल निगम का करीबन 75 करोड़ रुपये और लोक निर्माण विभाग का 13.73 करोड़ रुपये व्यय हुआ था। हालांकि बाद में विभागीय अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
सांसद-विधायक निधि का मनमाना प्रयोग
आजम खां के प्रभाव की वजह से उनकी यूनिवर्सिटी पर सांसद और विधायक निधि का करीब 4.57 करोड़ रुपये भी लगाया गया। मामला हाईकोर्ट में पहुंचने पर पूरी रकम वापस करनी पड़ी थी। यूनिवर्सिटी के अवस्थापना कार्यों के लिए दो दर्जन विधायकों ने अपनी निधि में से 10 लाख रुपये से लेकर 45 लाख रुपये तक दिए थे।

आजम खां की पत्नी एवं तत्कालीन सांसद तजीन फात्मा ने अपनी सांसद निधि से तीन बार 22.39 लाख रुपये दिये थे। एमएलसी सरोजनी अग्रवाल ने विश्वविद्यालय के लॉ संकाय में मूट कोर्ट के निर्माण के लिए 45 लाख रुपये और विधानमंडल क्षेत्र विकास निधि योजना से तीन बार में 50 लाख रुपये दिये थे।
इसी तरह अखिलेश यादव ने अपनी निधि से लॉ संकाय में शौचालय के निर्माण के लिए 20 लाख रुपये, पूर्व मंत्री राजेंद्र चौधरी ने लॉ संकाय में डीन व प्रिसिंपल कक्ष के निर्माण के लिए 10 लाख रुपये और विधानमंडल क्षेत्र विकास निधि योजना के तहत 10 लाख रुपये दिए थे।
बैंक में करोड़ों रुपये नकद जमा किए
ट्रस्ट ने वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक बैंकों में अपनी आय से अधिक नगदी जमा कराई थी। जांच में यह भी सामने आया कि दान की रकम को स्वेच्छा के बजाय जबरदस्ती जमा कराया गया। बिना हिसाब-किताब वाली रकम को दान दिखाकर खाते में जमा कराया गया। ट्रस्ट ने कई वर्षों का अपना आईटीआर भी जमा नहीं किया था।
इन तत्कालीन विधायकों ने भी दी थी निधि

  • बुक्कल नवाब – 40 लाख रुपये
  • मधु गुप्ता – 30 लाख
  • बलराम यादव – 15 लाख
  • रमेश यादव – 20 लाख
  • राम सुंदर दास – 20 लाख
  • यशवंत सिंह – 10 लाख
  • विजय यादव – 20 लाख
  • अंबिका चौधरी – 15 लाख
  • अहमद हसन – 10 लाख
  • लीलावती कुशवाहा – 50 लाख
  • एसआरएस यादव – 25 लाख
  • अशोक बाजपेई – 25 लाख
  • राम सकल गुर्जर – 10 लाख
  • राम जतन राजभर – 10 लाख
जौहर ट्रस्ट पर सरकारी धन लुटाने पर मनी लांड्रिंग का फंदा, ईडी ने खंगाले ठिकाने
पूर्व मंत्री आजम खां और उनके परिजनों द्वारा संचालित जौहर ट्रस्ट पर मनी लांड्रिंग का फंदा भी कसने लगा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को जौहर ट्रस्ट से जुड़े भवनों जिसमें रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी भी शामिल है, और पदाधिकारियों के ठिकानों पर छापे मारकर अहम सुबूत जुटाए हैं।

ईडी की टीमों ने सहारनपुर में जौहर ट्रस्ट का लेखा-जोखा संभालने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट दीपक गुप्ता का कार्यालय और आवास पर भी छापा मारा है। दिल्ली में एक सहयोगी ट्रस्ट के ठिकानों को खंगाला गया है। देर शाम तक सभी ठिकानों पर छापे की कार्रवाई जारी थी।
राजधानी स्थित ईडी के जोनल कार्यालय की टीमों ने सुबह सात बजे सुरक्षा बलों की मौजूदगी में सभी ठिकानों पर एक-साथ छापे मारे। जौहर यूनिवर्सिटी में ट्रस्ट से जुड़े सभी कमरों की गहन तलाशी ली गई। अधिकारियों ने जौहर यूनिवर्सिटी के भवनों के निर्माण में सरकारी विभागों के धन के दुरुपयोग की जांच के सुबूत तलाशे और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए।
इसके अलावा दिल्ली में जौहर ट्रस्ट की एक अन्य सहयोगी ट्रस्ट के दफ्तर की छानबीन भी हुई है। इससे पहले ईडी ने रामपुर पुलिस से पूर्व मंत्री आजम खां के खिलाफ दर्ज 84 एफआईआर और उनके खिलाफ अब तक हुई कानूनी कार्रवाई की जानकारी मांगी थी।

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