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नेशनल अवॉर्ड से कार्तिक आर्यन की चमकी किस्मत, ‘चंदू चैंपियन’ के लिए किया जबरदस्त ट्रांसफॉर्मेशन; अनंत नाग का संघर्ष भी रहा प्रेरणादायक

मुंबई। अभिनेता कार्तिक आर्यन को फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ में शानदार अभिनय के लिए 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट एक्टर का सम्मान मिला। उन्हें यह पुरस्कार ममूटी के साथ साझा करना पड़ा, जिन्हें ‘ब्रह्मयुगम’ के लिए बेस्ट एक्टर चुना गया। कार्तिक ने इस फिल्म में पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर की भूमिका निभाने के लिए अपनी फिटनेस और बॉक्सिंग पर लंबे समय तक मेहनत की थी।

किरदार के लिए 14 महीने तक की कड़ी ट्रेनिंग

‘चंदू चैंपियन’ में मुरलीकांत पेटकर के किरदार को पर्दे पर प्रभावी ढंग से निभाने के लिए कार्तिक आर्यन ने करीब 14 महीने तक ट्रेनिंग की। इस दौरान उन्होंने अपने शरीर में बड़ा बदलाव किया और बॉक्सिंग की तकनीक पर भी विशेष मेहनत की।

ट्रेनिंग की शुरुआत करीब 90 किलो वजन से हुई थी। लक्ष्य वजन को लगभग 69 से 75 किलो के बीच लाने के साथ शरीर को एक बॉक्सर जैसी फिटनेस देना था। ट्रेनिंग में हैंड-आई कोऑर्डिनेशन, फुटवर्क और पंचिंग तकनीक पर विशेष ध्यान दिया गया।

कार्तिक की ट्रेनिंग में नेशनल लेवल के बॉक्सर और फिटनेस कोच त्रिदेव पांडे ने मदद की। कठिन अभ्यास के दौरान उन्हें कई बार चोट भी लगी, लेकिन उन्होंने फिल्म की जरूरत के मुताबिक अपना प्रशिक्षण जारी रखा।

डाइट में भी किया बड़ा बदलाव

फिल्म के लिए कार्तिक ने अपनी डाइट को भी काफी अनुशासित किया। ट्रेनिंग के दौरान उनके भोजन में अंडे शामिल किए गए और लंबे समय तक उन्होंने मिठाइयों से दूरी बनाए रखी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके शरीर का फैट भी काफी कम किया गया था।

यह ट्रांसफॉर्मेशन सिर्फ वजन कम करने तक सीमित नहीं था। उन्हें मुरलीकांत पेटकर के किरदार के लिए बॉक्सर जैसी बॉडी लैंग्वेज और खेल से जुड़ी तकनीक भी सीखनी पड़ी।

छोटे बजट से शुरू हुआ कार्तिक का सफर

कार्तिक आर्यन का फिल्मी सफर भी संघर्षों से भरा रहा है। ग्वालियर से मुंबई पहुंचे कार्तिक ने कॉलेज के साथ फिल्मों के ऑडिशन देना शुरू किया था। शुरुआती दौर में उन्हें लगातार असफलताओं का सामना करना पड़ा।

साल 2011 में उन्हें ‘प्यार का पंचनामा’ में काम करने का मौका मिला। इस फिल्म के लिए उन्हें करीब 70 हजार रुपये मिले थे। फिल्म में उनके लंबे संवाद ने दर्शकों का ध्यान खींचा, लेकिन इसके बाद भी उन्हें लगातार सफलता नहीं मिली।

2018 में आई ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ ने उनके करियर को नई दिशा दी। इसके बाद ‘लुका छुपी’, ‘पति पत्नी और वो’ और ‘भूल भुलैया 2’ जैसी फिल्मों ने उन्हें लोकप्रिय अभिनेताओं की कतार में स्थापित किया।

‘चंदू चैंपियन’ ने दिखाया अभिनय का अलग अंदाज

कार्तिक ने अपनी शुरुआती फिल्मों में रोमांटिक और कॉमेडी भूमिकाओं से पहचान बनाई थी, लेकिन बाद के दौर में उन्होंने अलग तरह के किरदारों पर भी काम किया। ‘सत्यप्रेम की कथा’ के बाद ‘चंदू चैंपियन’ में मुरलीकांत पेटकर का किरदार उनके करियर की अलग शैली को दिखाता है।

एक समय जिस अभिनेता को फिल्म के लिए हजारों रुपये मिले थे, उसी कार्तिक की फीस बाद के वर्षों में करोड़ों रुपये तक पहुंच गई। उन्होंने एक इंटरव्यू में कोविड काल के दौरान महज 10 दिन की शूटिंग के लिए 20 करोड़ रुपये फीस मिलने की बात भी बताई थी।

अनंत नाग का सफर भी रहा संघर्षपूर्ण

दूसरी ओर, भारतीय सिनेमा के वरिष्ठ अभिनेता अनंत नाग ने भी लंबे संघर्ष के बाद फिल्म जगत में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्हें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

अनंत नाग की शुरुआती पढ़ाई आसान नहीं रही। बचपन में वे कई स्कूलों और आश्रमों में रहे। बाद में मुंबई आने पर कन्नड़ से सीधे अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई करने में उन्हें परेशानी हुई। वे 10वीं की परीक्षा में असफल हुए, हालांकि बाद में पढ़ाई पूरी की। उन्होंने 11वीं तक शिक्षा प्राप्त की।

उनके परिवार की इच्छा थी कि वे डॉक्टर या इंजीनियर बनें। अनंत नाग ने सेना में जाने की भी कोशिश की, लेकिन कम वजन के कारण मेडिकल आधार पर उनका चयन नहीं हो सका। खराब नजर के चलते एयरफोर्स में भी उनका चयन नहीं हुआ।

थिएटर ने बदली जिंदगी की दिशा

सेना में रास्ता बंद होने के बाद अनंत नाग थिएटर से जुड़े। अगले कुछ वर्षों में उन्होंने 50 से अधिक नाटकों में अभिनय किया। कन्नड़, कोंकणी, मराठी और हिंदी थिएटर में काम करने के दौरान उन्हें कई अनुभवी रंगकर्मियों से सीखने का अवसर मिला।

साल 1973 में उन्होंने कन्नड़ फिल्म ‘संकल्प’ से फिल्मों में कदम रखा। इसी दौर में हिंदी सिनेमा में भी उनकी पहचान बनी। ‘अंकुर’, ‘निशांत’, ‘मंथन’ और ‘भूमिका’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने पसंद किया। टीवी धारावाहिक ‘मालगुडी डेज’ ने उन्हें घर-घर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पांच दशक से ज्यादा लंबे करियर में अनंत नाग ने 300 से अधिक फिल्मों में काम किया और कन्नड़ के साथ हिंदी, तेलुगु, तमिल, मराठी तथा मलयालम सिनेमा में भी अभिनय किया। उन्हें कई फिल्म और राज्य स्तरीय सम्मान मिल चुके हैं। 2025 में उन्हें पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया।

कार्तिक आर्यन और अनंत नाग की कहानियां भारतीय सिनेमा में अलग-अलग पीढ़ियों के दो ऐसे सफर को सामने रखती हैं, जहां अभिनय के साथ संघर्ष, प्रशिक्षण और लगातार काम करने की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

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