नई दिल्ली। मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्तों की ओर से SIR और चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े कुछ फैसलों पर सवाल और लिखित टिप्पणियां की गई थीं। हालांकि, आयोग से जुड़े सूत्रों ने स्पष्ट किया कि किसी मुद्दे पर सवाल उठाना, स्पष्टीकरण मांगना या टिप्पणी करना अपने आप में औपचारिक असहमति यानी डिसेंट नहीं माना जाता।
रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान आयोग के फैसलों से जुड़े मामलों में कई बार लिखित आपत्तियां या टिप्पणियां दर्ज कीं। इनमें मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने और चुनावी प्रक्रियाओं में बदलाव जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं।
राहुल गांधी ने उठाया वोटर लिस्ट का मुद्दा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक वीडियो जारी कर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने वोट चोरी को संविधान के खिलाफ बताते हुए कहा कि इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। विपक्ष लंबे समय से SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है।
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने मौजूदा घटनाक्रम को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई के संदर्भ में उठाया। उन्होंने दावा किया कि यदि चुनाव आयुक्तों की ओर से किसी प्रक्रिया पर आपत्तियां थीं, तो उन पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण दिया जाना चाहिए।
तिवारी ने SIR को लेकर भी सवाल उठाते हुए इसकी प्रक्रिया की समीक्षा करने की मांग की। उन्होंने Form 6 में किए गए बदलावों को लेकर भी आपत्ति जताई और कहा कि ऐसे बदलावों के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल भी SIR को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने प्रक्रिया के दौरान वास्तविक मतदाताओं के प्रभावित होने की आशंका जताते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की थी।
ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पहले भी उठी
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग इससे पहले भी विपक्ष की ओर से उठाई जा चुकी है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अप्रैल 2026 में दावा किया था कि विपक्ष के 73 राज्यसभा सांसदों ने उनके खिलाफ नोटिस दिया था। इसमें कदाचार से जुड़े आरोप लगाए गए थे।
इससे पहले लोकसभा और राज्यसभा में भी उनके खिलाफ कार्रवाई से संबंधित प्रस्तावों का मुद्दा उठाया गया था। हालांकि, संबंधित पीठासीन अधिकारियों ने प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया।
16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR
चुनाव आयोग ने 14 मई को 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR के तीसरे चरण की घोषणा की थी। इसमें दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड और उत्तराखंड सहित कई राज्य शामिल हैं।
बताई गई समयसीमा के अनुसार, प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर तक चलेगी। इस दौरान करोड़ों मतदाताओं के विवरण का सत्यापन किया जा रहा है। जिन राज्यों में यह प्रक्रिया चल रही है, उनमें कुछ राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव भी होने हैं।
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट और सत्यापित करना है। इस प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करने तथा अपात्र या दोहराए गए नामों की पहचान करने की प्रक्रिया की जाती है। इसी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच पारदर्शिता, दस्तावेजों और नाम हटाए जाने जैसे मुद्दों पर विवाद बना हुआ है।
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