फतेहपुर। झंडा गीत के अमर रचयिता और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पद्मश्री श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ की 131वीं जयंती बुधवार को भारतीय दोसर वैश्य महासमिति की ओर से श्रद्धा और देशभक्ति के वातावरण में मनाई गई। पार्षद चौक स्थित उनकी प्रतिमा स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में पद्मश्री पार्षद जी की प्रतिमा पर तिलक लगाकर माल्यार्पण किया गया। इसके बाद मिठाई वितरित कर उनके बताए आदर्शों और सिद्धांतों पर चलने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम के दौरान उनके द्वारा रचित कालजयी ‘झंडा गीत’ को पुनः पाठ्यपुस्तकों में शामिल किए जाने की पुरजोर मांग भी उठाई गई। महासमिति के जिलाध्यक्ष नारायण बाबू गुप्ता के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ के जीवन संघर्ष और स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि उनका जीवन राष्ट्रप्रेम, त्याग और समर्पण की मिसाल है।
जिलाध्यक्ष नारायण बाबू गुप्ता ने बताया कि श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ का जन्म 9 सितंबर 1896 को कानपुर जनपद के नर्वल गांव में हुआ था। उन्होंने अपना पूरा जीवन देश की आजादी के लिए समर्पित कर दिया और फतेहपुर को अपनी कर्मभूमि बनाकर स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूती प्रदान की।
मुख्य अतिथि महासमिति के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष विनोद कुमार गुप्ता ने कहा कि पार्षद जी ने शिक्षक की नौकरी से त्यागपत्र देकर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की और स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े। वह करीब 19 वर्षों तक लगातार कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। आजादी की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। करीब 10 वर्षों तक फरारी का जीवन बिताने के बावजूद उनके कदम स्वतंत्रता आंदोलन से पीछे नहीं हटे।
महिला इकाई की जिलाध्यक्ष कविता गुप्ता ने कहा कि पार्षद जी ने जिला कारागार की बैरक नंबर नौ में रहते हुए लोगों के भीतर देशभक्ति और स्वतंत्रता की भावना जगाने के उद्देश्य से अमर ‘झंडा गीत’ की रचना की। यह गीत आगे चलकर देश की आजादी की लड़ाई में जन-जन के भीतर राष्ट्रप्रेम की अलख जगाने का माध्यम बना।
महासमिति के संरक्षक राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने कहा कि पार्षद जी के त्याग और देशप्रेम का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने वर्ष 1921 में संकल्प लिया था कि जब तक देश आजाद नहीं होगा, तब तक वह नंगे पैर रहेंगे। उन्होंने अपने इस संकल्प को पूरी निष्ठा के साथ निभाया।
महामंत्री अमित गुप्ता ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए बताया कि वर्ष 1934 में हरिपुरा कांग्रेस अधिवेशन में श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ द्वारा रचित झंडा गीत को राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता मिली। 15 अगस्त 1952 को लाल किला, दिल्ली में पार्षद जी ने स्वयं झंडा गीत का गायन किया था। इसके बाद 19 अगस्त 1962 को उन्हें अभिनंदन पत्र एवं ताम्रपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ का जीवन आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके त्याग, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति की गाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उनके जीवन एवं कृतित्व को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। साथ ही झंडा गीत को भी पुनः पाठ्यपुस्तकों में स्थान दिया जाना चाहिए, ताकि बच्चों में राष्ट्रप्रेम और देश के स्वतंत्रता संग्राम के प्रति गौरव की भावना मजबूत हो सके।
कार्यक्रम में राम विशाल गुप्ता, संजय गुप्ता, मनीष गुप्ता, अरुण जायसवाल एडवोकेट, आनंद गुप्ता, विनायक जी, गुरु प्रसाद, अशोक गुप्ता, शौक गुप्ता, रज्जन गुप्ता, दीपक कुमार, सुशील गुप्ता, दुर्गेश गुप्ता, प्रीतिजा गुप्ता, अनीता गुप्ता, सरोज गुप्ता, सीमा गुप्ता, जागृति गुप्ता, राजेश गुप्ता, मुकेश गुप्ता समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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