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इजराइल चुनाव में नेतन्याहू गठबंधन को बढ़त: 72.4% वोटों की गिनती में नेतन्याहू खेमे को 54 सीटें मिलने का अनुमान; सरकार गठन पर सस्पेंस बरकरार

तेल अवीव। इजराइल के संसदीय चुनाव में वोटों की गिनती के बीच राजनीतिक तस्वीर लगातार बदल रही है। शुरुआती ओपिनियन पोल और एग्जिट पोल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को झटका लगने के अनुमान के बाद अब रुझानों में उनका खेमा आगे दिखाई दे रहा है। हालांकि, सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत का आंकड़ा अभी भी चुनौती बना हुआ है।

चुनाव के ताजा रुझानों के मुताबिक, करीब 72.4 प्रतिशत वोटों की गिनती के बाद नेतन्याहू के गठबंधन को 54 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं, गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिलती दिख रही हैं। अरब पार्टियों के जॉइंट लिस्ट गठबंधन और राअम पार्टी को मिलाकर 18 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।

इजराइल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए किसी गठबंधन को कम से कम 61 सांसदों का समर्थन हासिल करना जरूरी है। ऐसे में मौजूदा रुझानों के आधार पर किसी भी खेमे के लिए स्पष्ट बहुमत हासिल करना आसान नहीं दिख रहा है।

ट्रम्प ने नेतन्याहू की बढ़त का लिया श्रेय

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नेतन्याहू की चुनावी स्थिति में सुधार का श्रेय अपने समर्थन को दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर दावा किया कि उनके समर्थन के बाद चुनाव का माहौल बदला है। ट्रम्प के मुताबिक, पहले नेतन्याहू की हार की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन अब मुकाबला बराबरी का हो गया है और उनकी जीत की संभावना भी बन सकती है।

इस बयान के बाद इजराइल के चुनाव में अमेरिकी समर्थन की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, चुनाव के अंतिम नतीजे आने तक किसी भी गठबंधन की स्थिति को निर्णायक नहीं माना जा सकता।

मतदान में दर्ज हुई भारी भागीदारी

इजराइल में इस बार मतदान को लेकर भी उत्साह देखने को मिला। केंद्रीय चुनाव समिति के अनुसार, रात 10 बजे तक लगभग 77.7 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। यह 1999 के बाद सबसे अधिक मतदान बताया गया है। वर्ष 2022 के पिछले संसदीय चुनाव में इसी समय तक करीब 70.6 प्रतिशत मतदान हुआ था।

मतदान केंद्र बंद होने के समय कतारों में खड़े मतदाताओं को भी वोट डालने का अवसर दिया गया। इसके अलावा सेना में तैनात जवानों और कुछ विशेष श्रेणियों के मतदाताओं के मतों की गिनती की प्रक्रिया भी चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकती है।

चुनाव के प्रमुख मुद्दों ने बढ़ाई राजनीतिक चुनौती

इजराइल के चुनाव में राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य भर्ती, न्यायपालिका की भूमिका और युद्ध की स्थिति प्रमुख मुद्दे रहे। वर्ष 2023 में हमास के हमले को रोकने में हुई सुरक्षा चूक को लेकर विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए। विपक्षी नेताओं ने इस घटना की जिम्मेदारी तय करने और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।

दूसरा बड़ा मुद्दा हरेदी समुदाय के लोगों को सैन्य सेवा से मिलने वाली छूट रहा। इजराइल में अनिवार्य सैन्य सेवा को लेकर लंबे समय से विवाद है। विपक्षी नेता चाहते हैं कि धार्मिक समुदाय के अधिक लोगों को भी सेना या नागरिक सेवा में शामिल किया जाए, जबकि नेतन्याहू के राजनीतिक सहयोगियों में इस छूट को बनाए रखने के समर्थक शामिल हैं।

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों में बदलाव की कोशिश और गाजा सहित क्षेत्रीय संघर्षों को लेकर सरकार की नीतियां भी चुनावी बहस के केंद्र में रहीं।

अरब पार्टियों की भूमिका हो सकती है अहम

चुनाव के रुझानों में अरब पार्टियों को मिलने वाली सीटें भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। यदि नेतन्याहू और विपक्षी गठबंधन में से कोई भी अपने दम पर बहुमत हासिल नहीं कर पाता, तो छोटी पार्टियों का समर्थन सरकार गठन में निर्णायक साबित हो सकता है।

हालांकि, अरब पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाने को लेकर विपक्ष के भीतर भी मतभेद सामने आए हैं। गादी आइजनकोट और उनके सहयोगियों के सामने चुनौती होगी कि वे विभिन्न दलों के बीच सहमति बनाकर 61 सांसदों का समर्थन जुटा पाते हैं या नहीं।

वहीं, नेतन्याहू ने मजबूत दक्षिणपंथी सरकार बनाने पर जोर दिया है और अरब पार्टियों के समर्थन पर निर्भर सरकार का विरोध किया है। इससे गठबंधन बनाने की प्रक्रिया और जटिल हो सकती है।

बहुमत नहीं मिला तो दोबारा चुनाव की आशंका

इजराइल में सरकार गठन के लिए चुनाव के बाद राजनीतिक दलों के बीच बातचीत होगी। निर्धारित प्रक्रिया के तहत सरकार बनाने के लिए नामित नेता को पहले 28 दिन मिलते हैं। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति इस अवधि को 14 दिन और बढ़ा सकते हैं।

यदि कोई भी नेता निर्धारित समय में सरकार बनाने और संसद का विश्वास हासिल करने में सफल नहीं होता, तो राजनीतिक संकट गहरा सकता है। ऐसी स्थिति में दोबारा चुनाव कराने की संभावना भी पैदा हो सकती है। हालांकि, फिलहाल इसे अंतिम विकल्प के तौर पर ही देखा जा रहा है।

अंतिम नतीजों पर टिकी निगाहें

इजराइल में मतगणना आगे बढ़ने के साथ सीटों के अनुमान बदलते रहे हैं। शुरुआती रुझानों में नेतन्याहू गठबंधन को बड़ी बढ़त दिखाई गई थी, लेकिन बाद के आंकड़ों में यह अंतर कम होता नजर आया। विपक्षी गठबंधन और अरब पार्टियों की स्थिति भी लगातार बदल रही है।

ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अंतिम परिणामों में कौन-सा गठबंधन बहुमत के करीब पहुंचता है और सरकार गठन के लिए किन दलों के बीच समझौता होता है। फिलहाल नेतन्याहू गठबंधन की बढ़त के बावजूद इजराइल की अगली सरकार को लेकर तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है।

नोट: यहां दिए गए सीटों के आंकड़े उपलब्ध कराए गए चुनावी अपडेट के आधार पर हैं। अंतिम परिणामों में बदलाव संभव है।

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