शिमला: हिमाचल प्रदेश में महिला आरक्षण और महिला सशक्तिकरण को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत के संसद में दिए एक बयान के बाद विवाद खड़ा हो गया है. उनके बयान पर लोकनिर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे तथ्यहीन और हास्यास्पद बताया है. दरअसल, कंगना रनौत ने शुक्रवार को संसद में अपने संबोधन के दौरान हिमाचल विधानसभा में महिला विधायकों को लेकर टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा था कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा में 68 विधायकों में से केवल एक ही महिला विधायक है. उनके इस बयान के बाद विवाद शुरू हो गया और सोशल मीडिया पर लोग इसे गलत बताते हुए उनकी आलोचना करने लगे.
विक्रमादित्य सिंह का करारा जवाब
लोकनिर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कंगना के बयान को खारिज करते हुए कहा कि वर्तमान में हिमाचल विधानसभा में तीन महिला विधायक हैं, जिनमें एक भाजपा और दो कांग्रेस से हैं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिन्हें यह तक जानकारी नहीं है, वह महिला सशक्तिकरण की बात कर रही है, जो पूरी तरह हास्यास्पद है. विक्रमादित्य ने महिला आरक्षण बिल को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस बिल के समर्थन में है, लेकिन भाजपा इसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है. उनका आरोप है कि चुनावी माहौल को देखते हुए यह मुद्दा उठाया गया.
‘राजनीतिक फायदे के लिए लाया गया बिल’
विक्रमादित्य ने कहा कि जब कई राज्यों में विधानसभा चुनाव चल रहे थे, उसी दौरान महिला आरक्षण बिल को संसद में लाया गया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन 2023 में जो बिल लाया गया, उसे सही तरीके से पारित नहीं किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने राजनीतिक लाभ के लिए इस बिल को पेश किया. उन्होंने भाजपा पर महिलाओं के नाम पर राजनीति करने का आरोप भी लगाया.
कंगना रनौत के बयान के बाद हिमाचल की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है. एक ओर भाजपा महिला सशक्तिकरण की बात कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक एजेंडा बता रही है. आने वाले समय में यह मुद्दा और ज्यादा तूल पकड़ सकता है.
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