नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर फॉर्म-6 में कथित बदलाव का मुद्दा राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जाने के बाद भाजपा ने आरोपों को खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 के मूल स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया है। SIR की प्रक्रिया के लिए इसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ा गया था। भाजपा ने अपने पक्ष में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई और चुनाव आयोग के पुराने स्पष्टीकरण का हवाला दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से रिकॉर्ड और जवाब मांगा। अदालत ने कहा कि केवल आरोपों या मीडिया रिपोर्ट के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किसी अधिकारी ने अकेले फैसला लिया था।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान के फैसले निर्धारित प्रक्रिया के तहत सर्वसम्मति या बहुमत से होने चाहिए। यदि रिकॉर्ड से यह साबित होता है कि कोई फैसला जरूरी प्रक्रिया का पालन किए बिना लिया गया, तो अदालत उस पर कार्रवाई या रोक लगाने पर विचार कर सकती है।
फॉर्म-6 को लेकर विवाद क्यों?
फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में पहली बार नाम जुड़वाने के लिए किया जाता है। SIR के दौरान इसी फॉर्म और उससे जुड़ी घोषणा की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आए हैं।
विपक्ष का आरोप है कि फॉर्म-6 में नियमों के विपरीत बदलाव किए गए और इससे मतदाता सूची की पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि बदलाव को गैरकानूनी बताना जल्दबाजी है और अदालत ने अभी ऐसा कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
SIR में बड़ी संख्या में नाम हटने का मुद्दा भी उठा
SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का मुद्दा भी चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कई नाम प्रारंभिक सूची से बाहर हुए हैं, हालांकि अंतिम सूची जारी होने से पहले पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल किए जा सकते हैं।
चुनाव आयोग की ओर से पात्र लेकिन छूट गए मतदाताओं को दोबारा सूची में शामिल कराने के लिए अभियान चलाने की बात कही गई है। बूथ लेवल अधिकारी ऐसे मतदाताओं की मदद कर सकते हैं।
चुनाव आयोग के फैसलों पर भी उठे सवाल
सुप्रीम कोर्ट में यह सवाल भी सामने आया कि क्या चुनाव आयोग के सभी फैसले निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए गए थे। अदालत ने संकेत दिया कि इस संबंध में रिकॉर्ड देखने के बाद ही कोई निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
फिलहाल फॉर्म-6, SIR और मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। मामले में अदालत की आगे की सुनवाई और चुनाव आयोग की ओर से पेश किए जाने वाले रिकॉर्ड पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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