टेक्सास। अमेरिका में 2009 के फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर हुए भीषण गोलीकांड के दोषी पूर्व सैनिक निदाल हसन को गोली मारकर मौत की सजा दिए जाने का रास्ता साफ हुआ है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब सेना को सजा की तारीख और स्थान तय करना है। हालांकि, कानूनी अपील के कारण सजा पर रोक लगने की संभावना भी बनी हुई है।
5 नवंबर 2009 को मेजर निदाल हसन ने टेक्सास स्थित फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर अचानक गोलीबारी कर दी थी। इस हमले में 13 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 31 लोग घायल हुए थे। घटना के दौरान हसन भी घायल हुआ और कमर के नीचे से लकवाग्रस्त हो गया।
सैन्य अदालत ने हत्या के मामलों में दोषी ठहराया
हसन सैन्य मनोचिकित्सक के तौर पर काम कर रहा था। हमले के बाद उसने हत्याओं की बात स्वीकार की थी। वर्ष 2013 में सैन्य अदालत ने उसे पहले से हत्या की योजना बनाने और हत्या के प्रयास से जुड़े कुल 45 मामलों में दोषी ठहराया।
मामले के मुताबिक, हसन ने अपने हमले को धार्मिक और वैचारिक मकसद से जोड़ते हुए इसे जिहाद बताया था। उसने हमले पर पछतावा भी नहीं जताया था। सैन्य मानसिक स्वास्थ्य पैनल के सामने उसने कहा था कि वह चाहता था कि हमले में उसकी भी मौत हो जाती।
1961 के बाद सैन्य व्यवस्था में पहला ऐसा मामला
अगर हसन की मौत की सजा लागू होती है तो 1961 के बाद वह अमेरिकी सैन्य न्याय व्यवस्था में मौत की सजा पाने वाला पहला व्यक्ति होगा। सैन्य व्यवस्था में इससे पहले प्राइवेट जॉन ए. बेनेट को 1961 में मौत की सजा दी गई थी।
अमेरिकी सैन्य डेथ रो में वर्तमान में चार कैदी मौत की सजा का इंतजार कर रहे हैं। सैन्य नियमों के तहत किसी कैदी को मौत की सजा देने के लिए राष्ट्रपति की पुष्टि जरूरी होती है।
गोली से मौत की सजा बेहद दुर्लभ
अमेरिका में मौत की सजा के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल घातक इंजेक्शन का किया जाता है। इसके मुकाबले गोली मारकर मौत की सजा देने के मामले बेहद कम रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 1976 में अमेरिका में मौत की सजा दोबारा शुरू होने के बाद गोली से सिर्फ छह लोगों को मौत दी गई है।
हसन के मामले में राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद भी अंतिम प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। सेना के सचिव को सजा की तारीख और स्थान तय करना होगा, जबकि कानूनी अपील इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकती है।
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