लखनऊ में पुलिस ने देह व्यापार से जुड़े एक बड़े अंतरराज्यीय रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए तुर्कमेनिस्तान की एक महिला को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और पश्चिम बंगाल समेत देश के कई राज्यों तक फैले होने की आशंका है। पुलिस को शक है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और सुनियोजित तरीके से विदेशी महिलाओं को भारत लाकर इस अवैध धंधे में धकेला जा रहा था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, विदेशी महिला को लखनऊ लाए जाने के बाद ही इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई हैं, जिनसे यह संकेत मिले हैं कि गिरोह में स्थानीय एजेंटों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी संपर्क मौजूद हो सकते हैं। जांच एजेंसियां अब इस बात की तह तक जाने की कोशिश कर रही हैं कि महिला को भारत लाने में किन-किन लोगों की भूमिका रही और इस पूरे ऑपरेशन का मास्टरमाइंड कौन है।
अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह महिलाओं की तस्करी और उन्हें अलग-अलग शहरों में भेजने के लिए फर्जी दस्तावेजों और नेटवर्क का इस्तेमाल करता था। पुलिस अब कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे रैकेट की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। कई संदिग्धों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित की गई हैं।
मामले में गिरफ्तार विदेशी महिला की मेडिकल जांच भी कराई गई है। डॉक्टरों की रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ है कि उसके निजी अंगों से संबंधित किसी प्रकार की सर्जरी की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, पुलिस इस पहलू को भी जांच का हिस्सा मानते हुए सभी मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्टों का गहन विश्लेषण कर रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित अंतरराज्यीय और संभावित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क हो सकता है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे और भी बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता पूरे गिरोह को बेनकाब कर उसके सभी सदस्यों को कानून के दायरे में लाना है।
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