उदयपुर। राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) की वर्ष 2022 की हिंदी व्याख्याता (स्कूल शिक्षा) भर्ती परीक्षा में फर्जी शैक्षणिक डिग्री के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जोधपुर निवासी अशोक विश्नोई उर्फ अशोक चोटिया को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने जाली शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों का इस्तेमाल कर आरपीएससी की भर्ती प्रक्रिया में भाग लिया और चयनित होकर सरकारी शिक्षक के पद पर नियुक्ति प्राप्त कर ली। एसओजी अब इस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में कौन-कौन लोग शामिल थे तथा क्या इस गिरोह के माध्यम से अन्य अभ्यर्थियों ने भी सरकारी नौकरियां हासिल की हैं।
एसओजी अधिकारियों के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायतें मिलने के बाद दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। जांच के दौरान आरोपी अशोक विश्नोई द्वारा प्रस्तुत शैक्षणिक डिग्रियों और अन्य प्रमाण-पत्रों में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। संबंधित विश्वविद्यालय और अभिलेखों से मिलान करने पर यह स्पष्ट हुआ कि प्रस्तुत किए गए दस्तावेज वास्तविक नहीं थे। इसके बाद एसओजी ने आरोपी के विरुद्ध मामला दर्ज कर जांच शुरू की और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर उसे गिरफ्तार कर लिया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने फर्जी डिग्री के आधार पर न केवल आरपीएससी की हिंदी लेक्चरर भर्ती परीक्षा में पात्रता प्राप्त की, बल्कि चयन के बाद सरकारी सेवा भी हासिल कर ली। इस मामले ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और दस्तावेज सत्यापन प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ और फर्जी प्रमाण-पत्र होने के बावजूद नियुक्ति कैसे मिल गई।
एसओजी अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। अब जांच इस दिशा में भी बढ़ाई जा रही है कि कहीं किसी संगठित गिरोह द्वारा फर्जी डिग्रियां तैयार कर प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को लाभ तो नहीं पहुंचाया जा रहा था। यदि ऐसा पाया जाता है तो इस पूरे नेटवर्क के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की जाएगी। जांच के दायरे में उन संस्थानों और व्यक्तियों को भी शामिल किया जा सकता है, जिनकी भूमिका फर्जी दस्तावेज तैयार कराने या सत्यापन प्रक्रिया को प्रभावित करने में रही हो।
सूत्रों के अनुसार, एसओजी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेजों, सेवा अभिलेखों और विश्वविद्यालय रिकॉर्ड का मिलान कर रही है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विश्वविद्यालयों, शिक्षा विभाग और आरपीएससी से भी विस्तृत जानकारी ली जाएगी। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा मिलीभगत सामने आती है तो उनके खिलाफ भी विधिक कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी नौकरियों में फर्जी डिग्री का इस्तेमाल न केवल कानून का गंभीर उल्लंघन है, बल्कि इससे योग्य और मेहनती अभ्यर्थियों के अधिकारों का भी हनन होता है। ऐसी घटनाएं भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। इसलिए समय-समय पर दस्तावेजों का डिजिटल सत्यापन और विश्वविद्यालयों के साथ ऑनलाइन डेटा मिलान की व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों के दौरान विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्तियों में पेपर लीक, फर्जी अभ्यर्थी, डमी उम्मीदवार तथा जाली दस्तावेजों से जुड़े कई मामले सामने आ चुके हैं। इन्हीं घटनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने एसओजी को भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं की जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। एसओजी लगातार पुराने मामलों की भी समीक्षा कर रही है और संदिग्ध नियुक्तियों का सत्यापन कराया जा रहा है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि जांच में आरोपी के विरुद्ध आरोप सिद्ध होते हैं तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धोखाधड़ी, जालसाजी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और उनका उपयोग कर सरकारी नौकरी प्राप्त करने से संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उसकी नियुक्ति निरस्त किए जाने और सेवा से बर्खास्तगी की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। इसके अतिरिक्त सरकारी वेतन और अन्य लाभों की वसूली जैसे पहलुओं पर भी विचार किया जा सकता है।
एसओजी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यह कार्रवाई केवल एक आरोपी तक सीमित नहीं रहेगी। जांच के दौरान यदि अन्य संदिग्ध अभ्यर्थियों या फर्जी डिग्री गिरोह के बारे में कोई जानकारी मिलती है तो उनके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। एजेंसी का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और सरकारी सेवाओं में फर्जीवाड़े पर प्रभावी अंकुश लगाना है।
फिलहाल गिरफ्तार आरोपी से गहन पूछताछ जारी है। एसओजी उसके मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि फर्जी डिग्री तैयार कराने और सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए किन-किन लोगों की भूमिका रही। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में सामने आने वाले प्रत्येक तथ्य के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
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