नई दिल्ली। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के पहले चरण में जापान की अगली पीढ़ी की ई-10 शिंकानसेन ट्रेन का इंतजार नहीं किया जाएगा। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2027 में परियोजना के पहले खंड का परिचालन भारतीय हाई स्पीड ट्रेन से शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना को समयबद्ध तरीके से शुरू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।
विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के प्रारंभिक संचालन को जापान की नई ई-10 शिंकानसेन ट्रेन की उपलब्धता से नहीं जोड़ा जाएगा। सरकार का जोर इस बात पर है कि परियोजना के तैयार खंड पर निर्धारित समय के भीतर यात्री सेवाएं शुरू कर दी जाएं। इसके लिए भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित हाई स्पीड ट्रेन का इस्तेमाल किया जाएगा।
मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना है। करीब 508 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर के पूरा होने के बाद मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। वर्तमान में सड़क अथवा सामान्य रेल मार्ग से दोनों शहरों के बीच यात्रा में कई घंटे लगते हैं, जबकि बुलेट ट्रेन शुरू होने के बाद यह दूरी लगभग दो घंटे में पूरी किए जाने की संभावना है।
परियोजना की शुरुआत जापान की शिंकानसेन तकनीक के सहयोग से की गई थी। प्रारंभिक योजना में जापान की ई-5 सीरीज की हाई स्पीड ट्रेनों के उपयोग की चर्चा थी। बाद में जापान द्वारा विकसित की जा रही नई पीढ़ी की ई-10 शिंकानसेन ट्रेन को भारत लाने की संभावनाओं पर विचार शुरू हुआ। हालांकि नई ट्रेन के विकास और आपूर्ति में समय लगने की संभावना को देखते हुए अब केंद्र सरकार ने परिचालन शुरू करने के लिए उसका इंतजार न करने का निर्णय लिया है।
सरकार का मानना है कि परियोजना के निर्माण में पहले ही काफी समय लग चुका है। ऐसे में किसी नई विदेशी ट्रेन के इंतजार में तैयार कॉरिडोर को खाली रखना व्यावहारिक नहीं होगा। इसी कारण पहले चरण पर भारतीय हाई स्पीड ट्रेन के माध्यम से यात्री सेवा शुरू की जाएगी। बाद में आवश्यकता और तकनीकी उपलब्धता के आधार पर नई पीढ़ी की जापानी ट्रेनों को भी परियोजना में शामिल किया जा सकता है।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का निर्माण राष्ट्रीय हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की देखरेख में किया जा रहा है। गुजरात में परियोजना का अधिकांश सिविल निर्माण तेजी से आगे बढ़ चुका है। कई स्थानों पर पिलर, वायाडक्ट, पुल और स्टेशन निर्माण का कार्य पूरा होने की स्थिति में है। महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण शुरुआती वर्षों में कार्य की गति अपेक्षाकृत धीमी रही थी, लेकिन अब वहां भी निर्माण तेज किया गया है।
परियोजना के पहले चरण का परिचालन वर्ष 2027 में शुरू करने की तैयारी है। शुरुआती सेवा गुजरात के एक सीमित खंड पर शुरू होने की संभावना है। इस खंड के सफल संचालन के बाद धीरे-धीरे अन्य हिस्सों को भी यात्री सेवाओं से जोड़ा जाएगा। पूरा कॉरिडोर तैयार होने पर मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद और अहमदाबाद सहित प्रमुख शहर हाई स्पीड रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे।
इस हाई स्पीड रेल परियोजना में अत्याधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकांश मार्ग को जमीन से ऊंचे एलिवेटेड कॉरिडोर पर बनाया जा रहा है, जिससे सड़क यातायात और स्थानीय आवागमन पर कम प्रभाव पड़े। इसके अलावा नदियों, राजमार्गों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों को पार करने के लिए विशेष पुल और संरचनाएं बनाई जा रही हैं।
परियोजना के तहत समुद्र के नीचे सुरंग का निर्माण भी किया जा रहा है। यह देश की पहली समुद्र के नीचे बनने वाली रेल सुरंग होगी। मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स से ठाणे के बीच बनने वाली इस सुरंग का हिस्सा समुद्र के नीचे से गुजरेगा। सुरंग निर्माण को भारतीय रेलवे और देश की आधारभूत संरचना के क्षेत्र में एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि माना जा रहा है।
बुलेट ट्रेन परियोजना में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। जापान की शिंकानसेन प्रणाली दुनिया की सबसे सुरक्षित हाई स्पीड रेल प्रणालियों में मानी जाती है। भारत में भी इसी स्तर की सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। इसमें ऑटोमैटिक ट्रेन कंट्रोल प्रणाली, आधुनिक सिग्नलिंग, भूकंप चेतावनी प्रणाली, समर्पित रेल ट्रैक और पूरे कॉरिडोर की फेंसिंग शामिल होगी।
इस कॉरिडोर पर ट्रेनें सामान्य रेल नेटवर्क से पूरी तरह अलग ट्रैक पर संचालित होंगी। इससे अन्य ट्रेनों या सड़क यातायात के साथ टकराव की संभावना समाप्त होगी। ट्रेन की गति, ब्रेकिंग प्रणाली और संचालन पर नियंत्रण पूरी तरह आधुनिक तकनीक से किया जाएगा। किसी भी आपात स्थिति में ट्रेन की गति स्वतः कम करने अथवा रोकने की व्यवस्था भी मौजूद रहेगी।
इस परियोजना में जापान भारत का प्रमुख तकनीकी और वित्तीय साझेदार है। जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी की ओर से परियोजना के लिए रियायती ब्याज दर पर दीर्घकालिक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है। जापानी विशेषज्ञ भारतीय इंजीनियरों और तकनीकी कर्मचारियों को हाई स्पीड रेल के संचालन, रखरखाव और सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण भी दे रहे हैं।
हालांकि सरकार अब परियोजना के शुरुआती चरण में भारतीय हाई स्पीड ट्रेन चलाने की तैयारी कर रही है। इससे देश में रेल निर्माण और आधुनिक परिवहन तकनीक के स्वदेशी विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। भारतीय रेलवे पहले से ही सेमी हाई स्पीड वंदे भारत ट्रेनों का निर्माण कर रहा है। आने वाले समय में भारतीय कंपनियों और रेलवे उत्पादन इकाइयों को हाई स्पीड ट्रेन निर्माण की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार बुलेट ट्रेन परियोजना का असर केवल यात्री परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा। कॉरिडोर के आसपास नए औद्योगिक केंद्र, व्यावसायिक क्षेत्र और रोजगार के अवसर विकसित हो सकते हैं। मुंबई, सूरत, वडोदरा और अहमदाबाद जैसे बड़े आर्थिक केंद्रों के बीच तेज संपर्क से उद्योग, व्यापार, पर्यटन और सेवा क्षेत्र को लाभ मिलने की संभावना है।
हाई स्पीड रेल सेवा शुरू होने से हवाई यात्रा और सड़क परिवहन पर निर्भरता भी कुछ हद तक कम हो सकती है। कम दूरी की विमान यात्राओं के मुकाबले बुलेट ट्रेन यात्रियों को शहर के केंद्र से शहर के केंद्र तक तेज और सुविधाजनक आवागमन का विकल्प देगी। इससे व्यावसायिक यात्रियों के साथ-साथ आम लोगों को भी लाभ मिलेगा।
मुंबई-अहमदाबाद परियोजना को भारत में भविष्य के हाई स्पीड रेल नेटवर्क की आधारशिला माना जा रहा है। इस परियोजना के सफल होने के बाद दिल्ली-वाराणसी, दिल्ली-अहमदाबाद, मुंबई-नागपुर, चेन्नई-बेंगलुरु-मैसूर और अन्य संभावित हाई स्पीड रेल कॉरिडोरों पर भी काम तेज हो सकता है।
सरकार के ताजा फैसले से यह संकेत स्पष्ट है कि बुलेट ट्रेन परियोजना को अब तकनीकी इंतजार के कारण और पीछे नहीं खिसकाया जाएगा। वर्ष 2027 में भारतीय हाई स्पीड ट्रेन से पहले चरण का परिचालन शुरू होने के साथ ही भारत तेज रफ्तार रेल परिवहन के नए युग में प्रवेश करेगा। यह परियोजना देश की आधुनिक इंजीनियरिंग क्षमता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और तेजी से विकसित होती आधारभूत संरचना का प्रतीक बनेगी।
News Wani
