Breaking News

पाकिस्तान में सिस्टम कोलैप्स! 4 इलाकों में बगावत, आसिम मुनीर पर तख्तापलट का शक

-बलूचिस्तान में विद्रोह, KP में कबायली बगावत और PoK में आंदोलन से बढ़ा संकट; गृह मंत्री के ‘सिस्टम कोलैप्स’ वाले बयान ने बढ़ाई हलचल

इस्लामाबाद। पाकिस्तान की विदेश नीति भले ही इस समय मजबूत दिखाई दे रही हो, लेकिन देश के भीतर हालात लगातार चुनौतीपूर्ण होते जा रहे हैं। बलूचिस्तान से लेकर खैबर-पख्तूनख्वा (KP) और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) तक असंतोष और विरोध के स्वर तेज होने का दावा किया जा रहा है। इसी बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी के कथित ‘सिस्टम कोलैप्स’ वाले बयान ने राजनीतिक और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस और तेज कर दी है।

पाकिस्तान इस समय कम से कम चार बड़े आंतरिक मोर्चों पर दबाव में बताया जा रहा है। बलूचिस्तान में बलूच विद्रोही संगठनों की गतिविधियां लंबे समय से सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बनी हुई हैं। वहीं खैबर-पख्तूनख्वा में कबायली इलाकों में भी सरकार और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नाराजगी सामने आती रही है।

PoK में महंगाई और बुनियादी सुविधाओं को लेकर आंदोलन

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भी लोगों के बीच महंगाई, बिजली, खाद्य पदार्थों की कीमत और बुनियादी अधिकारों को लेकर विरोध देखने को मिला है। रावलकोट समेत कई इलाकों में प्रदर्शन और आंदोलन पाकिस्तान सरकार के लिए चिंता का विषय बने हैं।

11 जून 2026 को रावलकोट के ईदगाह मैदान में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने का दावा किया गया था। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में सस्ता आटा-चावल, बिजली की उपलब्धता और बुनियादी अधिकार शामिल थे। इस आंदोलन ने PoK में पाकिस्तान सरकार की नीतियों के खिलाफ बढ़ते असंतोष को सामने ला दिया।

बलूचिस्तान में सुरक्षा संकट

बलूचिस्तान पाकिस्तान के लिए सबसे गंभीर सुरक्षा चुनौतियों में से एक बना हुआ है। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) समेत कई सशस्त्र संगठनों की गतिविधियों के कारण इस क्षेत्र में लंबे समय से तनाव बना हुआ है। कुछ संगठनों की ओर से बड़े हिस्से पर प्रभाव या नियंत्रण के दावे भी किए जाते रहे हैं, हालांकि ऐसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग मामलों में मुश्किल रही है।

इसके अलावा तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) की गतिविधियां भी पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई हैं। खासकर अफगानिस्तान की सीमा से लगे इलाकों में आतंकी हिंसा और सैन्य कार्रवाई के बीच तनाव बना रहता है।

सेना की भूमिका पर उठ रहे सवाल

इन घटनाक्रमों के बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। पाकिस्तान के इतिहास में सेना का राजनीति में प्रभाव काफी गहरा रहा है। देश में पहले भी सैन्य हस्तक्षेप के जरिए सरकारें बदली गई हैं।

हालांकि मौजूदा हालात को सीधे तख्तापलट की तैयारी मानना अभी जल्दबाजी होगी। सेना के पास पाकिस्तान की राजनीति और प्रशासन में मजबूत प्रभाव जरूर है, लेकिन सत्ता पर सीधा कब्जा करने की किसी योजना की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

विदेश नीति मजबूत, लेकिन घर में बढ़ती चुनौतियां

पाकिस्तान ने हाल के समय में सऊदी अरब और तुर्किये के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने तथा अमेरिका-ईरान तनाव में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश की है। इससे उसकी विदेश नीति को लेकर सकारात्मक तस्वीर पेश की जा रही है। लेकिन घरेलू स्तर पर आर्थिक दबाव, सुरक्षा संकट, क्षेत्रीय असंतोष और राजनीतिक अस्थिरता सरकार के सामने बड़ी चुनौतियां हैं।

यही विरोधाभास पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति को दिलचस्प बनाता है—एक तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव बढ़ाने की कोशिश और दूसरी तरफ देश के भीतर कई इलाकों में असंतोष। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार इन संकटों को राजनीतिक तरीके से संभाल पाएगी या सेना का प्रभाव आने वाले दिनों में और बढ़ेगा?

About NW-Editor

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *