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सऊदी अरब में हूतियों के हमले से मचा हड़कंप: अबहा एयरपोर्ट और सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना; 73 लोग हुए घायल

सना। यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। हूतियों ने सोमवार को सऊदी अरब के कई इलाकों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन हमलों में 73 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं।

हमलों में सऊदी अरब के अबहा एयरपोर्ट, किंग खालिद एयरबेस और अरामको की कुछ ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाए जाने की खबर है। सऊदी अरब के दक्षिणी हिस्सों में भी कई जगहों पर हमले किए गए।

यमन में जेल पर हमले के बाद बढ़ा तनाव

हूती हमलों से कुछ घंटे पहले संगठन ने आरोप लगाया था कि सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन के अल-हज्म शहर की एक जेल पर हवाई हमला किया। हूतियों के मुताबिक, इस हमले में 11 लोगों की मौत हुई, जिनमें एक बच्चा भी शामिल था।

बताया गया कि बच्चा अपनी मां के साथ जेल में बंद पिता से मिलने आया था। जेल प्रशासन के अनुसार, मलबे में एक महिला समेत करीब 35 कैदियों के फंसे होने की आशंका है। राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

सऊदी ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

सऊदी नेतृत्व वाले यमन गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि हूतियों ने सऊदी अरब के नागरिक और आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाया है। उन्होंने इन हमलों को सऊदी की संप्रभुता के खिलाफ बताया।

अल-मलिकी ने कहा कि गठबंधन इन हमलों का जवाब देने के लिए जरूरी सैन्य कार्रवाई करेगा और सऊदी नागरिकों की सुरक्षा के लिए खतरे को रोकने के कदम उठाए जाएंगे।

2022 के संघर्षविराम के बाद फिर बढ़ी हिंसा

यमन में 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता के बाद संघर्षविराम हुआ था। इसके बाद बड़े पैमाने पर लड़ाई में कमी आई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच स्थायी शांति समझौता नहीं हो सका।

अब एक बार फिर यमन में हूतियों और सऊदी समर्थित बलों के बीच तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। हूती विद्रोही यमन के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में मजबूत पकड़ रखते हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार को सऊदी अरब का समर्थन हासिल है।

सऊदी और हूतियों के बीच पुराना है संघर्ष

सऊदी अरब और हूतियों के बीच संघर्ष की जड़ें यमन के राजनीतिक संकट से जुड़ी हैं। 2014 में हूतियों ने राजधानी सना समेत यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार कमजोर हो गई।

2015 में सऊदी अरब ने कई अरब देशों के साथ मिलकर सैन्य गठबंधन बनाया और हूतियों के खिलाफ अभियान शुरू किया। इसका उद्देश्य तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दरब्बुह मंसूर हादी की सरकार को सत्ता में वापस लाना था।

कई वर्षों तक चले संघर्ष के बावजूद हूतियों को पूरी तरह पीछे नहीं धकेला जा सका। बाद में सऊदी अरब ने सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ बातचीत का रास्ता भी अपनाया।

वर्तमान में यमन का बड़ा उत्तरी हिस्सा हूतियों के नियंत्रण में है, जबकि दक्षिणी हिस्सों में अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार और उसके सहयोगी गुटों का प्रभाव है। ताजा मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है।

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