वॉशिंगटन/तेहरान। होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका ने ईरान के तीन तेल टैंकरों को निशाना बनाने की जानकारी दी है। अमेरिकी सेना का दावा है कि ये टैंकर तेल लेकर जा रहे थे। इस कार्रवाई से पहले खार्ग आइलैंड के पास एक ईरानी तेल टैंकर पर मिसाइल हमला किए जाने की खबर सामने आई थी।
अमेरिकी सेना के अनुसार, इससे पहले ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दो अमेरिकी युद्धपोतों की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं, हालांकि अमेरिका का दावा है कि ये हमले सफल नहीं हुए।
भूमिगत परमाणु ठिकाने पर हमले की चेतावनी
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए उसके एक बेहद सुरक्षित भूमिगत परमाणु ठिकाने पर संभावित हमले की चेतावनी दी है। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां इस परिसर की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही हैं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में कार्रवाई की जा सकती है।
यह भूमिगत परिसर ईरान के नतांज परमाणु क्षेत्र के पास स्थित बताया जाता है। जमीन के काफी नीचे बने इस ठिकाने में बड़े सुरंग सिस्टम मौजूद होने की बात कही जाती है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि यहां यूरेनियम संवर्धन से जुड़े उपकरण और सेंट्रीफ्यूज रखे जा सकते हैं।
जमीन के काफी नीचे स्थित होने के कारण इस परिसर को सामान्य हवाई हमलों से नुकसान पहुंचाना मुश्किल माना जाता है। ऐसे में यदि अमेरिका यहां सैन्य कार्रवाई करता है तो ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर संघर्ष और गंभीर हो सकता है।
खार्ग आइलैंड के पास तनाव का दुनिया पर असर
खार्ग आइलैंड और उसके आसपास का समुद्री क्षेत्र वैश्विक तेल व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के प्रमुख समुद्री तेल मार्गों में शामिल है और इस रास्ते से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की आपूर्ति होती है।
यदि क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने की आशंका है।
खार्ग आइलैंड ईरान के तेल निर्यात के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में यहां किसी बड़े हमले या समुद्री रास्ते में बाधा का सीधा असर ईरान की तेल से होने वाली आय पर पड़ सकता है।
ट्रम्प बोले- कार्रवाई से बड़ा युद्ध टला
डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई ने पश्चिम एशिया में बड़े क्षेत्रीय संघर्ष को रोकने में भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती तो इजराइल समेत पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता था।
ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के आधुनिक रडार सिस्टम को दो बार नष्ट किया। उनके मुताबिक, पहले रडार सिस्टम को निशाना बनाया गया और बाद में ईरान द्वारा नए सिस्टम स्थापित किए जाने पर उन्हें भी तबाह कर दिया गया।
ईरानी सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई का दावा
अमेरिकी सेना के अनुसार, हाल के दिनों में ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इन ठिकानों में एयर डिफेंस सिस्टम, रडार, समुद्री सैन्य उपकरण, संचार नेटवर्क और अन्य सैन्य क्षमताओं से जुड़े स्थान शामिल बताए गए हैं।
अमेरिका ने दावा किया कि कार्रवाई के दौरान नागरिकों को निशाना नहीं बनाया गया। वहीं ईरान ने अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा करते हुए नागरिक और गैर-सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है।
ईरान ने कहा- संप्रभुता का उल्लंघन
ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। ईरानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि देश की सेना ने अमेरिकी हमलों के जवाब में रक्षात्मक कार्रवाई की है।
ईरान के मुताबिक, पश्चिम एशिया में मौजूद कुछ अमेरिकी सैन्य ठिकानों से उसके खिलाफ सैन्य अभियानों की योजना और तैयारी की जा रही थी, इसलिए जवाबी कार्रवाई में ऐसे ठिकानों को निशाना बनाया गया।
होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ता तनाव अब केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रह गया है। इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय बाजार और पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है।
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