न्यूज़ वाणी ब्यूरो, बांदा। दीपावली के अवसर पर स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और स्थानीय कारीगरों को बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बांदा में मंडलीय खादी एवं ग्रामोद्योग प्रदर्शनी और क्षेत्रीय माटी कला मेले का आयोजन किया जाएगा। यह दस दिवसीय मेला 1 नवंबर से 10 नवंबर तक शहर में बाबूलाल चौराहे के पास स्थित राइफल क्लब मैदान में लगेगा। प्रदर्शनी में विभिन्न क्षेत्रों से आए कारीगर अपने पारंपरिक उत्पादों के स्टॉल लगाएंगे।
मिट्टी के दीये और हस्तशिल्प होंगे खास आकर्षण
मेले में मिट्टी के दीये, ग्वालिन, खिलौने और माटी कला से तैयार विभिन्न सजावटी वस्तुएं लोगों के आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इसके अलावा खादी के कपड़े, अचार, मुरब्बा और ग्रामोद्योग से जुड़े घरेलू उपयोग के उत्पाद भी बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे। इससे स्थानीय शिल्पकारों को अपने हुनर का प्रदर्शन करने और सीधे ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।
दीपावली के दौरान स्वदेशी वस्तुओं की खरीदारी को प्रोत्साहित करने के साथ ही इस आयोजन का उद्देश्य पारंपरिक कला और ग्रामीण उद्योगों को नई पहचान दिलाना है। मेले में आने वाले लोग स्थानीय कारीगरों के बनाए उत्पाद खरीदकर उनके रोजगार और आजीविका को भी सहयोग दे सकेंगे।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों से बढ़ेगी मेले की रौनक
प्रदर्शनी के दौरान प्रतिदिन शाम 6 बजे से रात 8 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। बच्चों और युवाओं की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं भी कराई जाएंगी।
प्रतियोगिताओं का निर्धारित कार्यक्रम
- 2 नवंबर: शाम 4 से 6 बजे तक रंगोली प्रतियोगिता।
- 4 नवंबर: शाम 6 से 8 बजे तक एकल एवं समूह लोकनृत्य प्रतियोगिता।
- 5 नवंबर: शाम 6 से 8 बजे तक सुगम गायन प्रतियोगिता।
- 6 नवंबर: शाम 4 से 6 बजे तक ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ विषय पर पेंटिंग एवं नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता।
- 9 नवंबर: शाम 6 से 8 बजे तक ‘विकसित भारत’ विषय पर भाषण प्रतियोगिता।
इन कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी कला और कौशल दिखाने का अवसर मिलेगा। सांस्कृतिक गतिविधियां मेले को मनोरंजक बनाने के साथ लोगों की भागीदारी भी बढ़ाएंगी।
स्थानीय कारीगरों और ग्रामीण उद्योगों को मिलेगा प्रोत्साहन
माटी कला और खादी प्रदर्शनी पारंपरिक शिल्पकारों, छोटे उद्यमियों तथा ग्रामोद्योग से जुड़े लोगों के लिए अपने उत्पादों के प्रचार-प्रसार का महत्वपूर्ण मंच बनेगी। इससे स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ाने और कारीगरों को नए ग्राहकों से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
दीपावली के मौके पर आयोजित यह मेला स्वदेशी वस्तुओं की खरीदारी को प्रोत्साहित करने के साथ स्थानीय कला, संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। दस दिनों तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में लोग खरीदारी के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों और विभिन्न प्रतियोगिताओं का भी आनंद ले सकेंगे।
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