नई दिल्ली: देशभर में आज मेडिकल स्टोर्स की हड़ताल है। फार्मासिस्ट, केमिस्ट और दवाइयों के डिस्ट्रीब्यूटर्स के संगठन ने मिलकर ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (एआईओसीडी) के साथ ये स्ट्राइक शुरू की है। इस वजह से ही देशभर के करीब 15 लाख से ज्यादा दवा डिस्ट्रीब्यूटर्स 20 मई, बुधवार को अपनी मेडिकल स्टोर्स बंद रखने वाले हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं कि आपके शहर की दुकानों के आज क्या हाल रहने वाले हैं। साथ ही एआईओसीडी की मांगों के बारे में भी जानते हैं। बता दें, संगठन ने दावा किया है कि कई राज्यों में मेडिकल स्टोर बंद रहेंगे, लेकिन जरूरी दवाओं की व्यवस्था अलग से की गई है।
किन राज्यों में सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा?
इसका सबसे ज्यादा असर मध्य प्रदेश और कर्नाटक के कई इलाकों में देखने को मिल सकता है। कर्नाटक में 20 हजार से ज्यादा केमिस्ट हड़ताल में शामिल हो रहे हैं, जबकि मध्य प्रदेश में 52 जिला संगठन बंद का समर्थन कर रहे हैं। चंडीगढ़ में भी कई दवा दुकानों ने हड़ताल का समर्थन किया है।
कुछ जगहों पर मेडिकल स्टोर खुले रखने की बात
वहीं, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, केरल, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, सिक्किम, लद्दाख और कई अन्य राज्यों के फार्मेसी संगठनों ने साफ किया है कि वहां मेडिकल स्टोर खुले रहेंगे और दवाओं की कमी नहीं होने दी जाएगी। तेलंगाना में प्रशासन ने लोगों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं, जबकि बड़े मेडिकल स्टोर खुले रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि मरीजों को परेशानी न हो।
आखिर क्यों भड़के दवा दुकानदार?
देशभर के दवा विक्रेता संगठन आज ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ अपना विरोध कर रहे हैं। इसके चलते ही सभी ने हड़ताल करने का भी फैसला कर लिया है। दवा दुकानदारों का कहना है कि इंटरनेट और तुरंत दवा पहुंचाने वाली कंपनियां नियमों को नजरअंदाज करके बिजनेस कर रही हैं, जिससे छोटे मेडिकल स्टोर मुश्किल में आ गए हैं। दवा विक्रेताओं का आरोप है कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना सही डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन के भी दवाएं बेच रहे हैं। उनका कहना है कि बाजार की मेडिकल दुकानों को हर दवा का रिकॉर्ड रखना पड़ता है, खासकर एंटीबायोटिक, नशीली दवाएं और प्रेग्नेंसी टेस्ट किट जैसी चीजों का। लेकिन ऑनलाइन कंपनियों पर उतनी सख्ती नहीं दिखती। इसको ही लेकर एआईओसीडी ने सरकार से जरूरी मांगें की हैं।
क्या हैं संगठन की मांगें?
दवा व्यापारियों की सबसे बड़ी मांग है कि सरकार ऑनलाइन दवा कंपनियों पर सख्त नियम लागू करे। उनका कहना है कि भारी छूट देकर बाजार खराब किया जा रहा है, जबकि छोटे दुकानदार इतने कम दाम में दवा बेच ही नहीं सकते। संगठन चाहता है कि फर्जी डॉक्टर पर्चियों पर रोक लगे और ऐसा सुरक्षित क्यूआर सिस्टम बने, जिसे एक बार इस्तेमाल करने के बाद दोबारा उपयोग न किया जा सके। इसके साथ ही सभी डॉक्टरों और दवा विक्रेताओं का सही रजिस्ट्रेशन भी अनिवार्य करने की मांग उठाई गई है। दवा विक्रेताओं का कहना है कि नकली और प्रतिबंधित दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। उनका साफ कहना है कि अगर सरकार सुरक्षित और पारदर्शी व्यवस्था लाती है तो वे पूरा सहयोग देने को तैयार हैं।
हड़ताल के समय जरूरी दवाइयां कहां मिलेंगी?
हड़ताल के समय भी मरीजों का पूरा ख्याल रखा जाएगा। सरकारी हॉस्पिटल और ब्लॉक स्तर के स्वास्थ्य केंद्र बंद के समय भी दवाओं की आपूर्ति जारी रहने वाली है। मरीजों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं हो, इसलिए इमरजेंसी सेवाओं की व्यवस्था भी रखी जा रही है। हॉस्पिटल फार्मेसी, प्रमुख चेन आउटलेट्स, सहकारी फार्मेसी, मुख्यमंत्री फार्मेसी आउटलेट और प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र भी खुले रहेंगे। राज्य औषधि नियंत्रण विभाग के मुताबिक, लगभग 5 हजार तक फार्मेसियां हर रोज की तरह की काम करती रहेंगी।
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