हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के समापन के बाद शहर और आसपास के क्षेत्रों में इस बार रिकॉर्ड स्तर पर कचरा जमा हो गया है। अनुमान के मुताबिक घाटों, सड़कों और प्रमुख धार्मिक स्थलों से हजारों टन से अधिक प्लास्टिक, बोतलें, फूल-मालाएं और अन्य अपशिष्ट एकत्र हुआ है। यात्रा के दौरान करोड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से नगर की सफाई व्यवस्था पर अभूतपूर्व दबाव पड़ा, जिसके चलते कई इलाकों में कचरा समय पर नहीं उठ पाया।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन, नगर निगम और गंगा सभा की संयुक्त टीमों ने बड़े पैमाने पर विशेष सफाई अभियान शुरू किया है। इसके तहत अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों की तैनाती की गई है, साथ ही मशीनों और ट्रैक्टर-ट्रॉली की मदद से घाटों और सड़कों की गहन सफाई की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, कई संवेदनशील क्षेत्रों में 24 घंटे शिफ्ट में सफाई कार्य चल रहा है।
सफाई अभियान के दौरान सार्वजनिक स्थानों, प्रमुख घाटों और भीड़भाड़ वाले इलाकों से भारी मात्रा में प्लास्टिक कचरा, पानी की बोतलें, खाने-पीने के पैकेट और अन्य अपशिष्ट हटाए गए हैं। महिलाओं के चेंजिंग रूम, अस्थायी शिविर स्थलों और विश्राम स्थलों पर भी गंदगी और अव्यवस्था मिलने से स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। स्थानीय लोगों ने भी कई जगहों पर सफाई की कमी को लेकर नाराजगी जताई है।
प्रशासन का कहना है कि अगले कुछ दिनों में शहर को पूरी तरह स्वच्छ करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए बाहर से भी सफाई कर्मियों की अतिरिक्त टीमें बुलाई गई हैं। साथ ही भविष्य में कांवड़ यात्रा के दौरान कचरा प्रबंधन को और मजबूत करने के लिए नई योजना पर काम किया जा रहा है, जिसमें अधिक डस्टबिन, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और सख्त नियम लागू करने की बात कही गई है।
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