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टाटा संस में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी, एन चंद्रशेखरन फरवरी 2027 तक संभालेंगे जिम्मेदारी, उसके बाद देंगे इस्तीफा

मुंबई: टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है। हालांकि, वे 20 फरवरी 2027 तक चेयरमैन की जिम्मेदारी संभालते रहेंगे। उनका यह निर्णय ऐसे समय आया है जब टाटा समूह में नेतृत्व और भविष्य की रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

चंद्रशेखरन ने 2017 में टाटा संस की कमान संभाली थी। वे टाटा परिवार से बाहर के पहले प्रोफेशनल मैनेजर थे, जिन्हें समूह का नेतृत्व सौंपा गया। करीब नौ साल के कार्यकाल में टाटा समूह ने एविएशन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी और डिजिटल कारोबार जैसे नए क्षेत्रों में विस्तार किया।

कार्यकाल बढ़ाने पर नहीं बन सकी सहमति

चंद्रशेखरन के अगले पांच साल के कार्यकाल को लेकर पहले बोर्ड स्तर पर सिफारिश की गई थी। हालांकि, बाद में उनके कार्यकाल और नए कारोबारों में किए गए बड़े निवेश को लेकर मतभेद सामने आए। टाटा ट्रस्ट्स के भीतर भी इस मुद्दे पर अलग-अलग राय होने की बात सामने आई।

चंद्रशेखरन के मुताबिक, उनके कार्यकाल के विस्तार का प्रस्ताव सर्वसम्मत समर्थन हासिल नहीं कर सका। करीब छह महीने तक इस मामले में स्पष्ट निर्णय नहीं होने के बाद उन्होंने नेतृत्व में समय रहते स्पष्टता लाने के लिए पद छोड़ने का फैसला किया।

फरवरी 2027 तक जारी रहेगा नेतृत्व

चंद्रशेखरन ने कहा कि टाटा संस के कई बड़े रणनीतिक प्रोजेक्ट महत्वपूर्ण चरण में हैं। ऐसे में कर्मचारियों, निवेशकों, साझेदारों और अन्य हितधारकों के लिए भविष्य के नेतृत्व को लेकर स्पष्टता जरूरी है। इसी वजह से उन्होंने अपने कार्यकाल की समाप्ति से पहले बदलाव की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है।

चंद्रशेखरन के कार्यकाल में तेजी से बढ़ा टाटा समूह

चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह का कारोबार काफी विस्तृत हुआ। वित्त वर्ष 2020 में समूह का रेवेन्यू करीब ₹7.89 लाख करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर लगभग ₹16.24 लाख करोड़ पहुंच गया। इसी अवधि में समूह का शुद्ध मुनाफा भी करीब ₹32 हजार करोड़ से बढ़कर ₹1.71 लाख करोड़ तक पहुंचा।

इस दौरान टाटा समूह ने एयर इंडिया के अधिग्रहण, सेमीकंडक्टर निर्माण, ईवी बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश किए।

अब नए चेयरमैन की तलाश अहम

मुंबई स्थित टाटा संस में चंद्रशेखरन के पद छोड़ने के फैसले के बाद नए नेतृत्व की तलाश महत्वपूर्ण हो गई है। नए चेयरमैन के चयन में टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बोर्ड की भूमिका अहम होगी।

टाटा संस टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है, जबकि टाटा ट्रस्ट्स इसके सबसे बड़े शेयरधारकों में शामिल हैं। दूसरी ओर, टाटा समूह के अंतर्गत टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा कंज्यूमर, एयर इंडिया सहित कई बड़ी कंपनियां आती हैं।

नए नेतृत्व के सामने सेमीकंडक्टर फैब, ईवी बैटरी, एयर इंडिया के एकीकरण और समूह के अन्य बड़े निवेश प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

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