नई दिल्ली। दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने म्यांमार में उग्रवादियों को हथियार और ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग देने के आरोप में गिरफ्तार सात विदेशी नागरिकों को परिवार से मिलने के लिए विदेश जाने की अनुमति दी है। इनमें एक अमेरिकी नागरिक और छह यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं।
अदालत ने सभी आरोपियों को अधिकतम एक महीने के लिए अमेरिका और यूक्रेन जाने की अनुमति दी है। विदेश यात्रा पूरी करने के बाद उन्हें भारत लौटना होगा। भारत वापसी के 72 घंटे के भीतर उन्हें अदालत को इसकी जानकारी भी देनी होगी।
सातों विदेशी नागरिकों को मार्च 2026 में गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसी के आरोप के मुताबिक, ये लोग म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों से जुड़े लोगों को हथियारों और ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग देने में शामिल थे।
विदेश जाने की अनुमति पाने वाले यूक्रेनी नागरिकों में हुर्बा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुखमानोव्स्की, स्टेफानकिव मारियन, होंचारुक मैक्सिम उर्फ मैक्सिम और कामिन्स्की विक्टर शामिल हैं। अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक को भी अमेरिका जाने की अनुमति मिली है।
NIA ने कोर्ट में क्या कहा?
NIA ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी जारी है। जांच एजेंसी के अनुसार, फिलहाल आरोपियों की तत्काल मौजूदगी जांच के लिए जरूरी नहीं है। जरूरत पड़ने पर उनसे आवश्यक अंडरटेकिंग भी ली जा सकती है।
मैथ्यू आरोन वैनडाइक को इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट के तहत दर्ज कुछ अपराधों से डिस्चार्ज करने की अर्जी भी मंजूर की गई है। यह आवेदन 18 सितंबर को हुई कंपाउंडिंग के आधार पर दाखिल किया गया था।
टूरिस्ट वीजा पर भारत आने का आरोप
जांच एजेंसी के मुताबिक, सातों आरोपी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे और इसके बाद पूर्वोत्तर क्षेत्र की यात्रा की थी। उन पर मिजोरम के रास्ते अवैध रूप से म्यांमार में प्रवेश करने का आरोप है।
NIA का दावा है कि म्यांमार में आरोपियों ने जातीय सशस्त्र समूहों से जुड़े लोगों को हथियारों और ड्रोन युद्ध से संबंधित प्रशिक्षण दिया। जांच में यूरोप से ड्रोन लाकर प्रशिक्षण में इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आने का दावा किया गया है।
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