शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच सुरक्षित निवेश चाहने वाले सीनियर सिटीजन के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) एक बार फिर सबसे पसंदीदा विकल्प बनकर उभरा है। साल 2026 में रिटायरमेंट के बाद अपनी पूंजी की सुरक्षा और रेगुलर इनकम को प्राथमिकता देने वाले बुजुर्गों के लिए एफडी पर शानदार रिटर्न मिल रहा है।
सीनियर सिटीजन को आमतौर पर आम ग्राहकों के मुकाबले 0.50% (50 बेसिस पॉइंट्स) ज्यादा ब्याज मिलता है। ब्याज की ये दरें आरबीआई की पॉलिसी, निवेश की अवधि और बैंकों की नकदी स्थिति पर निर्भर करती हैं।

सरकारी और प्राइवेट बैंकों में ब्याज दरें
- सरकारी बैंकों में सीनियर सिटीजन के लिए एफडी दरें फिलहाल 7% के आसपास बनी हुई हैं।
- पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक और केनरा बैंक 444 और 555 दिनों जैसी चुनिंदा अवधि के लिए 7.10% तक ब्याज दे रहे हैं।
- वहीं, एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा 5 से 10 साल की लंबी अवधि पर 7.00% से 7.05% तक ब्याज ऑफर कर रहे हैं।
- प्राइवेट बैंकों में रिटर्न थोड़ा बेहतर है। इंडसइंड बैंक 18 महीने की अवधि के लिए 7.50% के साथ सबसे आगे है।
- कोटक महिंद्रा बैंक 7.30% और एक्सिस बैंक लंबी अवधि के लिए 7.20% ब्याज दे रहे हैं।
- आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक में यह दरें 7.00% से 7.10% के बीच हैं।
सरकारी बैंकों में FD पर ब्याज दरें
| बैंक का नाम | ब्याज दर (%) | अवधि (टेन्योर) |
| पंजाब नेशनल बैंक | 7.10% | 444 दिन |
| यूनियन बैंक ऑफ इंडिया | 7.10% | 444 दिन |
| केनरा बैंक | 7.10% | 555 दिन |
| भारतीय स्टेट बैंक (SBI) | 7.05% | 5 – 10 वर्ष |
| बैंक ऑफ बड़ौदा | 7.00% | 5 साल से ज्यादा और 10 साल तक |
प्राइवेट बैंकों में FD पर ब्याज दरें
| बैंक का नाम | ब्याज दर (%) | अवधि (टेन्योर) |
| इंडसइंड बैंक | 7.50% | 1 वर्ष 6 महीने से 1 वर्ष 7 महीने से कम |
| कोटक महिंद्रा बैंक | 7.30% | 2 वर्ष से 3 वर्ष से कम |
| एक्सिस बैंक | 7.20% | 5 – 10 वर्ष |
| आईसीआईसीआई (ICICI) बैंक | 7.10% | 3 वर्ष 1 दिन से 5 वर्ष |
| एचडीएफसी (HDFC) बैंक | 7.00% | 3 वर्ष 1 दिन से 4 वर्ष 7 महीने से कम |
स्मॉल फाइनेंस बैंक दे रहे हैं सबसे ज्यादा रिटर्न
रिटर्न के मामले में स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFBs) सबसे आगे हैं, जहां 8.5% तक ब्याज मिल रहा है। ईएसएएफ (ESAF) स्मॉल फाइनेंस बैंक 501 दिनों की एफडी पर 8.50% ब्याज दे रहा है।
इसके अलावा सूर्योदय, शिवालिक, इक्विटास और जना स्मॉल फाइनेंस बैंक भी अलग-अलग अवधि के लिए 8.00% से 8.30% तक ब्याज ऑफर कर रहे हैं। हालांकि, बड़े कमर्शियल बैंकों के मुकाबले इनमें जोखिम थोड़ा ज्यादा माना जाता है।
स्मॉल फाइनेंस बैंकों में FD पर ब्याज दरें
| स्मॉल फाइनेंस बैंक | उच्चतम ब्याज दर (%) | अवधि (उच्चतम दर) | 1 साल | 3 साल | 5 साल | 10 साल |
| ईएसएएफ (ESAF) स्मॉल फाइनेंस बैंक | 8.50% | 501 दिन | 5.25% | 6.50% | 6.25% | 6.25% |
| शिवालिक स्मॉल फाइनेंस बैंक | 8.30% | 21 महीने 1 दिन से 22 महीने | 6.50% | 7.25% | 6.75% | 6.75% |
| सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक | 8.25% | 30 महीने | 7.40% | 7.40% | 8.05% | 7.40% |
| इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक | 8.00% | 888 दिन | 7.40% | 7.50% | 7.50% | 7.50% |
| जन स्मॉल फाइनेंस बैंक | 8.00% | 1 साल से ज्यादा से 3 साल तक | 7.50% | 8.00% | 7.77% | 7.00% |
| उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक | 8.00% | 2 साल से 3 साल तक | 6.50% | 8.00% | 7.50% | 7.25% |
बुजुर्गों को एफडी से होते हैं ये 4 फायदे
रिटायरमेंट के बाद बुजुर्ग एफडी को कई वजहों से चुनते हैं:
- तय इनकम: निवेशक अपनी जरूरत के हिसाब से हर महीने, तिमाही या सालाना ब्याज पाने का विकल्प चुन सकते हैं।
- कम जोखिम: शेयर बाजार के मुकाबले एफडी में पैसा डूबने का डर नहीं रहता।
- टैक्स बेनेफिट: टैक्स-सेविंग एफडी में निवेश करने पर सेक्शन 80C के तहत छूट मिलती है।
- लिक्विडिटी: जरूरत पड़ने पर अलग-अलग अवधि के लिए एफडी कराकर पैसों का मैनेजमेंट (लैडरिंग) किया जा सकता है।
निवेश की स्ट्रैटेजी और टैक्स के नियम
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सारा पैसा एक साथ एक ही एफडी में लगाने के बजाय उसे छोटी, मध्यम और लंबी अवधि में बांटकर निवेश करना चाहिए। बेहतर मुनाफे के लिए एफडी के साथ सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) या पीपीएफ (PPF) को भी शामिल किया जा सकता है।
टैक्स की बात करें तो एफडी से होने वाली कमाई निवेशक के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होती है। बैंक इस पर टीडीएस (TDS) काटते हैं, लेकिन अगर सालाना आय टैक्स की सीमा से कम है, तो बुजुर्ग फॉर्म 15H जमा कर टीडीएस बचा सकते हैं।
क्या होता है फॉर्म 15H और लैडरिंग?
फॉर्म 15H: यह एक सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म है जिसे 60 साल से अधिक उम्र के लोग बैंक में जमा करते हैं, ताकि उनकी ब्याज आय पर टीडीएस न काटा जाए। यह तभी भरा जा सकता है जब आपकी कुल अनुमानित आय पर टैक्स जीरो हो।
FD लैडरिंग: अपनी कुल राशि को एक बड़ी एफडी बनाने के बजाय अलग-अलग समय (जैसे 1 साल, 2 साल, 3 साल) के लिए छोटी-छोटी एफडी में बांटना लैडरिंग कहलाता है। इससे ब्याज दरों में बदलाव का फायदा मिलता है और इमरजेंसी में पैसों की कमी नहीं होती।
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