लखनऊ। 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने शनिवार को राजधानी लखनऊ में नियुक्ति की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के आवास के बाहर पहुंचे और करीब आधे घंटे तक नारेबाजी करते हुए अपनी मांगें उठाईं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी।
अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण संबंधी कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए सरकार से आयोग के आदेशों का पालन कराने और नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण से जुड़े नारे भी लगाए।
पुलिस पर अभ्यर्थियों से बदसलूकी का आरोप
प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने कार्रवाई की। अभ्यर्थियों का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरन प्रदर्शन स्थल से हटाया और कुछ लोगों के साथ बदसलूकी की। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने पुलिस पर कपड़े फाड़ने तक का आरोप लगाया है।
प्रदर्शन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों को पुलिसकर्मी उठाकर वहां से ले जाते हुए भी दिखाई दिए। इस दौरान काफी देर तक मौके पर हंगामे की स्थिति बनी रही।
मंत्रियों और अधिकारियों के सामने भी उठाया गया मामला
प्रदर्शन में शामिल तूफान सिंह ने दावा किया कि 10 सितंबर को अभ्यर्थियों की बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह और माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी के साथ बैठक हुई थी। बैठक में संबंधित विभागों के कई अधिकारी भी मौजूद थे।
तूफान सिंह के मुताबिक, बैठक के दौरान भर्ती में कथित गड़बड़ी और आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। उनका दावा है कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के स्तर पर भी इस मामले को लेकर आदेश जारी किए जा चुके हैं। अभ्यर्थियों का सवाल है कि जब उनकी शिकायतों पर आयोगों और अधिकारियों के स्तर पर चर्चा हो चुकी है, तो उन्हें नियुक्ति का लाभ अब तक क्यों नहीं दिया गया।
आठ साल से नियुक्ति का इंतजार
सीतापुर से प्रदर्शन में पहुंचे आशुतोष वर्मा ने कहा कि अभ्यर्थी पिछले करीब आठ वर्षों से नियुक्ति की उम्मीद में संघर्ष कर रहे हैं। उनके मुताबिक 2018 में 68,500 सहायक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी और उसी समय अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था।
अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे समय से चल रहे विवाद के कारण हजारों उम्मीदवारों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने सरकार से जल्द फैसला लेकर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने की मांग की है।
5 प्रतिशत छूट देकर नई चयन सूची की मांग
अभ्यर्थियों के अनुसार 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती में दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 5 प्रतिशत की छूट का प्रावधान था। उनका आरोप है कि इन श्रेणियों के उम्मीदवारों को कथित तौर पर इसका पूरा लाभ नहीं मिला और सामान्य अभ्यर्थियों के साथ परिणाम जारी कर दिया गया।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि भर्ती परीक्षा के निर्धारित उत्तीर्णांक में 5 प्रतिशत की छूट दी जाए। उनका कहना है कि 150 अंकों की परीक्षा में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत अंक को आधार मानते हुए परिणाम में संशोधन किया जाए और इसके बाद नई चयन सूची जारी की जाए।
सरकार से नियुक्ति प्रक्रिया स्पष्ट करने की मांग
अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग की है कि आरक्षण संबंधी विवाद का समाधान करते हुए आयोगों के निर्देशों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही लंबे समय से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों के हित में जल्द निर्णय लिया जाए।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वर्षों से चल रहे इस मामले में अब उन्हें स्पष्ट समाधान और नियुक्ति की उम्मीद है। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा।
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