लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में शनिवार से नौ दिवसीय गोमती पुस्तक महोत्सव की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महोत्सव का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि डिजिटल दौर में यह मान लेना गलत है कि युवा किताबों से दूर हो गया है। आज भी युवाओं में पढ़ने की रुचि है, जरूरत केवल इतनी है कि अच्छी किताबें आसानी से उनके बीच पहुंचें।
मुख्यमंत्री ने युवाओं से नियमित रूप से किताबें पढ़ने और अपनी निजी लाइब्रेरी या ‘बुक बैंक’ बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम की पुस्तकों के साथ साहित्य, रचनात्मक लेखन, धर्म, संस्कृति और महापुरुषों की जीवनियां पढ़ना भी जरूरी है। किताबें व्यक्ति को नई सोच, प्रेरणा और जीवन की चुनौतियों से निपटने की दिशा देती हैं।
‘स्क्रीन दुनिया दिखाती है, किताबें दुनिया समझने की ताकत देती हैं’
कार्यक्रम में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि तकनीक आज के समय में जरूरी है, लेकिन बच्चों और युवाओं के जीवन में किताबों की भूमिका कम नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्क्रीन हमें दुनिया दिखाने का काम करती है, जबकि पुस्तकें दुनिया को समझने की क्षमता विकसित करती हैं। किताबों के माध्यम से बच्चों में ज्ञान, विचार, संस्कार, जिज्ञासा और कल्पनाशक्ति का विकास होता है।
युवाओं से ‘एग्जाम वॉरियर्स’ पढ़ने की अपील
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पुस्तक ‘एग्जाम वॉरियर्स’ पढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल विद्यार्थियों के लिए ही उपयोगी नहीं है, बल्कि हर युवा और नागरिक के लिए जीवन की चुनौतियों और परीक्षाओं का सामना करने की प्रेरणा दे सकती है।
योगी ने युवाओं से असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे सीख लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति अचानक सफलता के शिखर तक नहीं पहुंचता। संघर्ष और असफलताओं से गुजरते हुए ही व्यक्ति अपनी मंजिल तक पहुंचता है।
ग्राम सचिवालयों में भी बनाई गईं लाइब्रेरी
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में पुस्तकालयों की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि प्रदेश की करीब 57,600 ग्राम पंचायतों के ग्राम सचिवालयों में लाइब्रेरी बनाई गई हैं। इनमें नेशनल बुक ट्रस्ट की किताबें उपलब्ध कराने के साथ डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी दी गई है।
उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण इलाकों के छात्र और युवा अपने गांव में ही किताबों और डिजिटल संसाधनों के जरिए ज्ञान हासिल कर सकते हैं।
121 प्रकाशकों के करीब 250 स्टॉल
गोमती पुस्तक महोत्सव में इस बार करीब 121 प्रकाशकों ने 250 स्टॉल लगाए हैं। यहां हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, अवधी समेत विभिन्न भारतीय भाषाओं की हजारों किताबें उपलब्ध हैं।
महोत्सव में प्रवेश पूरी तरह निशुल्क रखा गया है। यह आयोजन 12 से 20 सितंबर तक चलेगा। नौ दिनों के दौरान पुस्तक विमोचन, लेखकों से संवाद और साहित्यिक गतिविधियों के साथ बच्चों और युवाओं के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
बच्चों के लिए विशेष बाल मंडप
पुस्तक महोत्सव में बच्चों के लिए विशेष बाल मंडप तैयार किया गया है। यहां कठपुतली शो, कहानी सुनाने के कार्यक्रम, नाटक, कविता पाठ, रचनात्मक लेखन, वैदिक गणित, माइंडफुलनेस, क्ले आर्ट और मंडला आर्ट जैसी गतिविधियां होंगी।
बच्चों के लिए ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के साथ विशेष संवाद कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। आयोजकों का कहना है कि पुस्तकें बच्चों को केवल जानकारी नहीं देतीं, बल्कि उनकी कल्पनाशक्ति और रचनात्मक सोच को भी मजबूत करती हैं।
भारतीय ज्ञान परंपरा का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की प्राचीन ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए नैमिषारण्य, काशी, प्रयागराज और शुकतीर्थ जैसे स्थानों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में ज्ञान को किसी सीमित दायरे में बांधने के बजाय चारों दिशाओं से ज्ञान हासिल करने की बात कही गई है।
उन्होंने कहा कि केवल स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय का पाठ्यक्रम पढ़ लेना पर्याप्त नहीं है। समाज, देश और दुनिया को बेहतर ढंग से समझने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों का ज्ञान हासिल करना आवश्यक है।
कार्यक्रम से पहले छात्रों को हिरासत में लिया गया
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। विरोध की आशंका के बीच समाजवादी छात्र सभा और NSUI से जुड़े कुछ पदाधिकारियों और सदस्यों को पुलिस ने हिरासत में लिया।
कार्यक्रम के दौरान कुछ छात्रों ने फीस वृद्धि वापस लेने और बंद किए गए स्कूलों को दोबारा शुरू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। छात्रों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी मांगें रखने की बात कही।
शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल सुविधाओं पर जोर
माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने पुस्तक महोत्सव को ज्ञान और शिक्षा से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण आयोजन बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल स्कूल और पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों के सर्वांगीण विकास का आधार है।
उन्होंने प्रदेश के विद्यालयों और पुस्तकालयों में डिजिटल सुविधाओं के विस्तार की जानकारी दी। कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी, विश्वविद्यालय के अधिकारी और अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
गोमती पुस्तक महोत्सव में अगले नौ दिनों तक किताबों के साथ साहित्य, संस्कृति, शिक्षा और रचनात्मक गतिविधियों का संगम देखने को मिलेगा। आयोजन का उद्देश्य बच्चों, छात्रों और युवाओं में पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना और उन्हें किताबों से दोबारा जोड़ना है।
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