बांदा। जिले में आंखों के विशेषज्ञ डॉक्टर के जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) खाते में कथित वित्तीय गड़बड़ी का मामला सामने आया है। रिकॉर्ड में करीब 80 लाख रुपये की रकम को लेकर अंतर की स्थिति बताई जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि खाते में उपलब्ध राशि कम होने के बावजूद डॉक्टर के नाम पर करीब 35 लाख रुपये का लोन कैसे स्वीकृत हुआ।
मामले में ऑनलाइन और ऑफलाइन रिकॉर्ड के बीच अंतर सामने आने के बाद वित्तीय व्यवस्था और रिकॉर्ड संधारण को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। GPF खाते में दर्ज रकम और संबंधित दस्तावेजों में मौजूद जानकारी का मिलान किए जाने की जरूरत बताई जा रही है।
ऑनलाइन और ऑफलाइन रिकॉर्ड में अंतर
मामले की खास बात यह है कि डॉक्टर के GPF खाते से संबंधित ऑनलाइन रिकॉर्ड और ऑफलाइन दस्तावेजों में एकरूपता नहीं बताई जा रही है। दोनों रिकॉर्ड में अंतर होने से खाते में जमा राशि, निकासी और लोन से जुड़ी प्रविष्टियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।
कम रकम के बावजूद 35 लाख के लोन पर सवाल
GPF खाते में पर्याप्त रकम नहीं होने के बावजूद करीब 35 लाख रुपये का लोन दिए जाने की जानकारी सामने आने के बाद प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। सामान्य तौर पर किसी भी वित्तीय भुगतान या लोन से पहले संबंधित खाते और रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाता है। ऐसे में इस मामले में रिकॉर्ड और भुगतान प्रक्रिया की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
करीब 80 लाख की गड़बड़ी की चर्चा
मामले में करीब 80 लाख रुपये की राशि को लेकर गड़बड़ी या रिकॉर्ड में अंतर की बात सामने आ रही है। हालांकि वास्तविक वित्तीय नुकसान और जिम्मेदारी की स्थिति संबंधित रिकॉर्ड की विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अब जरूरी है कि डॉक्टर के GPF खाते से जुड़े ऑनलाइन डेटा, मूल अभिलेख, लोन स्वीकृति दस्तावेज और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड का आपस में मिलान किया जाए। जांच के बाद ही यह पता चल सकेगा कि रिकॉर्ड में अंतर किस स्तर पर हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
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