बांदा। शहर कोतवाली क्षेत्र के झील का पुरवा स्थित बीएल विद्या मंदिर आवासीय विद्यालय में दो छात्रों की मौत के मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। दोनों छात्रों की तबीयत पेट दर्द और उल्टी की शिकायत के बाद बिगड़ी थी। इलाज के दौरान नितिन कुमार (कक्षा 6) और अरुण कुमार (कक्षा 2) की मौत हो गई, जबकि तीसरे छात्र योगेश की हालत इलाज के बाद ठीक होने पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
घटना के बाद विद्यालय प्रबंधक ओमप्रकाश और उनके बेटे सोनू के मोबाइल फोन बंद बताए जा रहे हैं। पुलिस जब विद्यालय पहुंची तो वहां ताला लगा मिला। दोनों के बयान दर्ज करने के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही है।
दो छात्रों की मौत, तीसरे की तबीयत भी बिगड़ी
सोमवार को विद्यालय में तीन छात्रों की तबीयत खराब हुई थी। गिरवां क्षेत्र के सरसवाह निवासी सुनील प्रजापति का बेटा नितिन कुमार और महेदू निवासी जय किशोर उर्फ पुष्कर का बेटा अरुण कुमार इलाज के दौरान दम तोड़ चुके हैं। वहीं गिरवां निवासी चंद्रपाल का बेटा योगेश भी बीमार हुआ था, लेकिन उपचार के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ।
परिजनों के अनुसार, बच्चों ने पेट दर्द और उल्टी की शिकायत की थी। इसके बाद परिजनों ने विद्यालय प्रबंधन पर समय से सूचना नहीं देने, इलाज में लापरवाही बरतने और दूषित भोजन खिलाने जैसे गंभीर आरोप लगाए। इन आरोपों की पुलिस और संबंधित विभाग जांच कर रहे हैं।
प्रबंधक और बेटे के खिलाफ मुकदमा दर्ज
अरुण के बाबा पूर्व फौजी विजयपाल और नितिन के पिता सुनील की तहरीर पर शहर कोतवाली में विद्यालय प्रबंधक ओमप्रकाश और उनके बेटे सोनू के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
मोमोज और फिंगर बेचने वाले दुकानदार के बयान दर्ज
जांच के दौरान विवेचक इंस्पेक्टर विपिन यादव ने उस दुकानदार गिल्ला और उसकी पत्नी नीरश्री के बयान दर्ज किए, जहां से विद्यालय का छात्र राहुल मोमोज और फिंगर लेकर गया था। खाद्य सुरक्षा विभाग ने भी दुकान से खाद्य पदार्थों के नमूने लिए हैं। इन नमूनों की जांच रिपोर्ट भी मामले में अहम मानी जा रही है।
पुलिस ने दोनों मृत छात्रों के परिजनों के अलावा विद्यालय में पढ़ने वाले उनके भाइयों से भी पूछताछ की है। अरुण के बड़े भाई उत्कर्ष और नितिन के छोटे भाई हर्ष के बयान दर्ज कर घटना के समय की परिस्थितियों और बच्चों की तबीयत बिगड़ने से जुड़ी जानकारी जुटाई गई।
प्रबंधक के बयान लेने की कोशिश
विवेचक के मुताबिक, विद्यालय प्रबंधक ओमप्रकाश और उनके बेटे सोनू के बयान दर्ज करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही पुलिस अन्य संभावित गवाहों की भी तलाश कर रही है।
इससे पहले अस्पताल में प्रबंधक ओमप्रकाश ने बच्चों की तबीयत खराब होने के कारण की जानकारी होने से इनकार किया था। उन्होंने विद्यालय के भोजन के खराब होने के आरोप को भी खारिज किया था। उनका कहना था कि यदि खाना खराब होता तो अन्य छात्र भी बीमार पड़ते।
नोटिस का जवाब नहीं मिलने पर मान्यता पर कार्रवाई की तैयारी
घटना के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने विद्यालय प्रबंधक को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा था, लेकिन शनिवार तक कोई जवाब नहीं मिला। बीएसए अव्यक्त राम के अनुसार, मुकदमा दर्ज होने के बाद प्रबंधक के सामने नहीं आने के कारण नोटिस का जवाब प्राप्त नहीं हुआ।
विभाग अब दो और नोटिस जारी करेगा। इसके बाद भी जवाब नहीं मिलने पर विद्यालय की मान्यता समाप्त करने की कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल पुलिस खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच, परिजनों और गवाहों के बयान तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही है। छात्रों की मौत की वास्तविक वजह जांच पूरी होने और मेडिकल व अन्य रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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