लखनऊ। राजधानी लखनऊ में आयुष चिकित्सा पद्धति से जुड़े करीब 1,100 छात्र-छात्राओं ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु को मौके पर बुलाने की मांग की। छात्रों का कहना है कि जब तक सरकार की ओर से लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक वे प्रदर्शन समाप्त नहीं करेंगे।
छात्रों की प्रमुख मांग वर्तमान 7,500 रुपये मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की है। उनका कहना है कि वर्ष 2011 से अब तक स्टाइपेंड में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई, जबकि इस अवधि में महंगाई लगातार बढ़ी है।
बारिश के बीच धरने पर डटे छात्र
लखनऊ में बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में आयुष छात्र गांधी प्रतिमा पर जुटे रहे। कई छात्र छाता लेकर धरने पर बैठे नजर आए, जबकि कुछ ने पोस्टर को बारिश से बचाव के लिए सिर के ऊपर रख लिया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर कई पोस्टर और नारे भी लगाए।
छात्रों का कहना है कि वे पिछले कई दिनों से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी छात्रों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन छात्र लिखित आश्वासन मिलने तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
15 साल से स्टाइपेंड में बढ़ोतरी नहीं होने का दावा
प्रदर्शन में शामिल डॉक्टर प्रखर ने बताया कि आयुर्वेद की पढ़ाई के लिए छात्र नीट के जरिए प्रवेश लेते हैं। करीब साढ़े चार साल की पढ़ाई के बाद एक साल की इंटर्नशिप करनी होती है। उनके मुताबिक, 2011 से 2026 तक 15 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन स्टाइपेंड में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।
छात्रों का कहना है कि उन्हें करीब 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से स्टाइपेंड मिलता है। लखनऊ जैसे शहर में किराया, भोजन और अन्य जरूरी खर्चों को देखते हुए यह राशि बेहद कम है। कई छात्र किराए के कमरों में रहकर अपनी पढ़ाई और इंटर्नशिप पूरी कर रहे हैं।
MBBS इंटर्न के बराबर स्टाइपेंड की मांग
आयुष छात्रों का कहना है कि MBBS और BDS इंटर्न के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की गई है, जबकि आयुष छात्रों को अब भी पुराने स्टाइपेंड पर काम करना पड़ रहा है। छात्रों का तर्क है कि मरीजों के इलाज और अस्पताल से जुड़े कार्यों में उनकी जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है, इसलिए स्टाइपेंड में समानता होनी चाहिए।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि यदि सरकार आयुर्वेद, यूनानी और अन्य चिकित्सा पद्धतियों को स्वास्थ्य व्यवस्था का हिस्सा मानती है, तो इन क्षेत्रों में पढ़ने वाले छात्रों को भी समान अवसर और सुविधाएं मिलनी चाहिए।
कई दिनों से जारी है मांग को लेकर प्रदर्शन
छात्रों के अनुसार, वे पिछले करीब एक महीने से अपने-अपने कॉलेजों में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग उठा रहे हैं। जिलाधिकारी को ज्ञापन देने के बाद भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर छात्रों ने लखनऊ में प्रदर्शन शुरू किया।
छात्रों का आरोप है कि पहले भी उन्हें मांग पर विचार करने का भरोसा दिया गया, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी कोई ठोस फैसला सामने नहीं आया। इसी वजह से छात्र अब लिखित आश्वासन की मांग पर अड़े हुए हैं।
प्रदर्शनकारियों ने साफ किया है कि उनकी मांग केवल स्टाइपेंड बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे आयुष छात्रों के साथ चिकित्सा शिक्षा और इंटर्नशिप के दौरान समान व्यवहार की भी मांग कर रहे हैं।
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