बेरूत। दक्षिणी लेबनान में इजराइल ने हिजबुल्लाह के एक बड़े भूमिगत नेटवर्क को निशाना बनाते हुए करीब 2 किलोमीटर से अधिक लंबी सुरंग को विस्फोट कर नष्ट करने का दावा किया है। धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास के क्षेत्रों में भूकंप जैसे झटके महसूस किए गए। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, घटना के बाद 4.1 तीव्रता के भूकंप जैसी हलचल दर्ज होने की बात सामने आई है।
इजराइली सेना के अनुसार, अली अल-ताहेर पहाड़ी के नीचे मौजूद इस सुरंग नेटवर्क में बड़ी मात्रा में हथियार और सैन्य सामग्री छिपाकर रखी गई थी। सेना का दावा है कि यहां ईरान में निर्मित रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन के अलावा मशीनगन, एंटी-टैंक मिसाइल तथा बड़ी संख्या में विस्फोटक और बारूदी सुरंगें भी मिलीं।
हिजबुल्लाह की बद्र यूनिट का कमांड सेंटर होने का दावा
इजराइली सेना ने बताया कि भूमिगत परिसर में हिजबुल्लाह की ‘बद्र’ यूनिट से जुड़ा कमांड सेंटर भी मौजूद था। यह यूनिट दक्षिणी लेबनान में संगठन की महत्वपूर्ण सैन्य इकाइयों में गिनी जाती है।
इजराइल का दावा है कि इस भूमिगत नेटवर्क को तैयार करने में करीब दो दशक लगे और इसके निर्माण के लिए ईरान से आर्थिक मदद मिलने की बात सामने आई है। इजराइली अधिकारियों ने इस पूरे ढांचे को हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमता का अहम हिस्सा बताया है।
सुरंग के अंदर पहुंचे इजराइली सैनिक
सुरंग को ध्वस्त करने से पहले इजराइली सेना के जवानों ने भूमिगत नेटवर्क के अंदर जाकर तलाशी अभियान चलाया। सेना की ओर से जारी फुटेज में सैनिक सुरंगों और उससे जुड़े कमरों की जांच करते दिखाई दे रहे हैं।
इजराइली सेना के मुताबिक, जून में हुए सीजफायर के बाद इस इलाके में करीब 50 हिजबुल्लाह लड़ाकों के छिपे होने की जानकारी थी। कार्रवाई के दौरान कई लड़ाकों के मारे जाने का दावा किया गया है। तलाशी अभियान में करीब 12 शव मिलने की बात भी सेना ने कही है।
सेना के अनुसार, कुछ लड़ाकों ने सुरंगों के जरिए बाहर निकलने की कोशिश की, जबकि कुछ के इलाके से भाग निकलने की आशंका भी जताई गई है।
नेतन्याहू ने कहा- अभियान का लक्ष्य हासिल हुआ
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सुरंग को नष्ट किए जाने के बाद अभियान को सफल बताया। इजराइल का कहना है कि कार्रवाई के बाद इस इलाके में जमीन के ऊपर और नीचे दोनों स्तरों पर उसकी पकड़ मजबूत हुई है।
दक्षिणी लेबनान में इजराइली सेना की मौजूदगी और हिजबुल्लाह के ठिकानों पर कार्रवाई को लेकर क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है।
2006 के युद्ध के बाद भूमिगत नेटवर्क पर बढ़ा जोर
2006 में इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच हुए युद्ध के बाद संगठन ने अपने सैन्य ढांचे को जमीन के नीचे ले जाने पर ज्यादा जोर दिया। खुले में मौजूद कमांड सेंटर और हथियार भंडार हवाई हमलों की चपेट में आने के बाद भूमिगत सुरंगों और बंकरों का नेटवर्क तैयार किया गया।
इन सुरंगों का इस्तेमाल हथियारों को छिपाने, लड़ाकों की आवाजाही, सैन्य कमांड और हमले के बाद सैन्य क्षमता को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है। भूमिगत ढांचा होने के कारण इन्हें ऊपर से निगरानी और हवाई हमलों के जरिए पहचानना और पूरी तरह नष्ट करना चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
इजराइल के लिए सुरंगों का नेटवर्क बड़ी चुनौती
सुरंगों का पूरा नेटवर्क जमीन के नीचे होने के कारण उसका वास्तविक आकार और संरचना आसानी से सामने नहीं आती। एक प्रवेश द्वार से कई रास्ते, कमरे और दूसरे हिस्से जुड़े हो सकते हैं। ऐसे में किसी सुरंग का पता लगाने के बाद उसके पूरे नेटवर्क की पहचान करना और उसे निष्क्रिय करना सैन्य अभियान का जटिल हिस्सा बन जाता है।
इजराइल ऐसे ठिकानों का पता लगाने के लिए खुफिया जानकारी, ड्रोन और विभिन्न निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल करता है। संभावित स्थान की पहचान के बाद जमीन पर मिले सुरागों और तकनीकी जानकारी के आधार पर भूमिगत ढांचे का पता लगाने की कोशिश की जाती है।
दक्षिणी लेबनान में फिर बढ़ा तनाव
पिछले कुछ दिनों में दक्षिणी लेबनान में इजराइली सैन्य कार्रवाई तेज होने की खबरें सामने आई हैं। क्षेत्र में संघर्ष विराम के बावजूद दोनों पक्षों के बीच तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
इजराइल का कहना है कि दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमता और उसके भूमिगत ठिकानों को कमजोर करना उसकी सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वहीं, लेबनान में इजराइली सैन्य मौजूदगी और हमलों को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है।
ऐसे में 2 किलोमीटर से अधिक लंबे सुरंग नेटवर्क को ध्वस्त किए जाने का दावा दक्षिणी लेबनान में जारी सैन्य तनाव के बीच एक बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
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