काठमांडू। नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर जनजीवन और बुनियादी ढांचे को प्रभावित किया है। तबाही के बाद क्षतिग्रस्त घरों, सड़कों, पुलों और दूसरी सार्वजनिक सुविधाओं के पुनर्निर्माण के लिए करीब 7,233 करोड़ नेपाली रुपए यानी लगभग ₹45 हजार करोड़ की जरूरत का अनुमान लगाया गया है। यह राशि नेपाल की GDP के करीब 11 प्रतिशत के बराबर बताई जा रही है।
बाढ़ और भूस्खलन की चपेट में आने से करीब 16 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। अब तक 1,377 लोगों की मौत और करीब 5,130 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। आपदा ने आवासीय इलाकों के साथ-साथ परिवहन, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के ढांचे को भी बुरी तरह प्रभावित किया है।
सड़क-पुल और बिजली व्यवस्था को सबसे ज्यादा नुकसान
पुनर्निर्माण की अनुमानित लागत का बड़ा हिस्सा सड़क, पुल, बिजली और दूसरी जरूरी सुविधाओं को दोबारा खड़ा करने में खर्च होने की संभावना है। बाढ़ से 7,570 घर, 48 सरकारी इमारतें, 18 स्कूल और 7 स्वास्थ्य केंद्र क्षतिग्रस्त हुए हैं।
कई इलाकों में अभी भी बाढ़ और भूस्खलन के निशान दिखाई दे रहे हैं। मलबा हटाने का काम लगातार जारी है, जबकि प्रभावित क्षेत्रों में राहत और स्वास्थ्य सेवाएं भी पहुंचाई जा रही हैं।
545 लापता लोगों की तलाश में रेस्क्यू अभियान
अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में लापता हुए 545 लोगों की तलाश के लिए प्रशिक्षित खोजी कुत्तों की मदद ली जा रही है। राहत दल सुरंगों, हेडवर्क्स और मलबे वाले क्षेत्रों में तलाशी अभियान चला रहे हैं।
बाढ़ के समय परियोजना में 1,433 लोग मौजूद थे। इनमें से 878 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि 545 लोग अभी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में दक्षिण कोरिया, चीन और भारत के नागरिक भी शामिल हैं।
नेपाली सेना के साथ ड्रोन टीम, दक्षिण कोरियाई विशेषज्ञ और शेरपा रेस्क्यू टीम भी खोज एवं बचाव अभियान में जुटी हुई हैं।
भारत ने नेपाल को भेजी 130 टन से ज्यादा राहत सामग्री
आपदा के बाद भारत की ओर से भी नेपाल को राहत और बचाव सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। 26 अगस्त से अब तक आठ विशेष उड़ानों के जरिए 130 टन से ज्यादा राहत सामग्री नेपाल भेजे जाने की जानकारी दी गई है।
भारत ने 54 विशेषज्ञों को भी राहत अभियान में लगाया है। इनमें सुरंग और मलबे में फंसे लोगों को निकालने वाली टीमें, मेडिकल विशेषज्ञ और फोरेंसिक कर्मी शामिल हैं।
राहत सामग्री में टेंट, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाइयों के अलावा गैस डिटेक्टर, ब्रीदिंग उपकरण, मड रेस्क्यू सूट, जनरेटर, लाइटिंग टावर और पानी निकालने वाले पंप भी शामिल हैं।
नेपाल के सामने अब लंबे पुनर्निर्माण की चुनौती
बाढ़ से हुए नुकसान के बाद नेपाल के सामने तत्काल राहत पहुंचाने के साथ-साथ बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण की चुनौती भी है। सड़क और पुलों के क्षतिग्रस्त होने से आवागमन प्रभावित हुआ है, जबकि घरों, स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों को दोबारा तैयार करने में लंबा समय लग सकता है।
विशेषज्ञों और राहत एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर सहायता उपलब्ध कराने, लापता लोगों की तलाश पूरी करने और आवश्यक बुनियादी सुविधाओं को जल्द बहाल करने की है। आने वाले समय में नेपाल को पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए बड़ी आर्थिक राशि जुटानी पड़ सकती है।
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