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लखनऊ में एंबुलेंस ड्राइवरों का प्रदर्शन, नौकरी बहाली की मांग को लेकर रो पड़े कर्मचारी; बोले- कोरोना में सेवा की, अब रोजगार के लिए भटक रहे

लखनऊ। डायल-108 और डायल-102 एंबुलेंस सेवा से जुड़े ड्राइवरों ने शुक्रवार को नौकरी से निकाले जाने के विरोध में लखनऊ के हजरतगंज में प्रदर्शन किया। कर्मचारी गांधी प्रतिमा के पास पहुंचे और नौकरी बहाल करने की मांग को लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कई कर्मचारी भावुक होकर रोने लगे।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर एंबुलेंस सेवाएं दीं। उस समय उन्हें फ्रंटलाइन वॉरियर के तौर पर सम्मान मिला, लेकिन बाद में बड़ी संख्या में कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया। कर्मचारियों के मुताबिक, करीब 9 हजार लोग 2021 में रोजगार से बाहर हो गए और तब से वे दोबारा नौकरी पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

चारबाग में कर्मचारियों को हिरासत में लेने का आरोप

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि हजरतगंज पहुंचने से पहले चारबाग रेलवे स्टेशन पर उनके करीब 40 से 50 साथियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके बाद कुछ कर्मचारी गांधी प्रतिमा पर पहुंचे और वहां माल्यार्पण के साथ अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि बाद में पुलिस ने वहां मौजूद कुछ कर्मचारियों को भी हिरासत में लिया।

कर्मचारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर कोरोना काल में किए गए अपने काम का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान उन्हें सम्मानित किया गया, लेकिन नौकरी जाने के बाद परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।

सम्मान पत्र दिखाकर बोले- नौकरी नहीं तो इसका क्या फायदा

प्रदर्शन में शामिल नीतीश ने कहा कि कोरोना के दौरान कर्मचारियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना काम किया। उनके मुताबिक, इस दौरान कई कर्मचारियों की मौत भी हुई, लेकिन उनके परिवारों को पर्याप्त सहायता नहीं मिली।

नीतीश ने कोरोना काल में मिले सम्मान पत्र का जिक्र करते हुए कहा कि जब नौकरी ही नहीं है तो ऐसे प्रमाण पत्र का क्या फायदा। उन्होंने आरोप लगाया कि रोजगार जाने के बाद परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और बच्चों की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है।

पिता की पेंशन से चल रहा परिवार

प्रदर्शन में शामिल अजय अपनी स्थिति बताते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि 2021 में नौकरी जाने के बाद से वह लगातार रोजगार और न्याय के लिए प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कई बार स्वास्थ्य मंत्री के आवास के चक्कर लगाने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।

अजय के मुताबिक, इस समय उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। उन्होंने कहा कि पिता की पेंशन से परिवार का खर्च चल रहा है। नौकरी जाने के बाद उम्र के इस पड़ाव पर दोबारा रोजगार मिलना भी मुश्किल हो रहा है।

नौकरी बहाली और सरकार से हस्तक्षेप की मांग

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मामले में हस्तक्षेप करने और पूर्व कर्मचारियों को दोबारा रोजगार देने की मांग की। कर्मचारियों ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर आगे भी आंदोलन जारी रखेंगे।

प्रदर्शनकारियों ने कंपनी पर कर्मचारियों को नौकरी से हटाने के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक शोषण के आरोप भी लगाए। हालांकि, ये आरोप प्रदर्शनकारियों के दावे हैं।

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