मॉस्को। रूस और NATO के बीच कैलिनिनग्राद को लेकर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चेतावनी दी है कि रूस के किसी भी क्षेत्र पर हमला हुआ तो मॉस्को अपनी उपलब्ध सैन्य क्षमताओं के साथ जवाब देगा। उन्होंने विशेष रूप से कैलिनिनग्राद को लेकर किसी तरह की कार्रवाई के खिलाफ चेताया है।
मॉस्को में वल्दाई फोरम के दौरान पुतिन ने कहा कि यदि NATO कैलिनिनग्राद को रूस से अलग करने या वहां दबाव बढ़ाने की कोशिश करता है तो रूस इसका तत्काल जवाब देगा। उन्होंने पश्चिमी देशों पर रूस के साथ संभावित सैन्य टकराव की तैयारी करने का आरोप भी लगाया।
यूरोप के बीच रूस का रणनीतिक इलाका है कैलिनिनग्राद
कैलिनिनग्राद रूस का मुख्य भू-भाग से अलग स्थित क्षेत्र है। यह बाल्टिक सागर के किनारे पोलैंड और लिथुआनिया के बीच स्थित है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वर्ष 1945 से यह क्षेत्र सोवियत संघ और बाद में रूस के नियंत्रण में है।
कैलिनिनग्राद रूस के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां रूस का बाल्टिक फ्लीट मौजूद है और क्षेत्र में आधुनिक सैन्य प्रणालियों की तैनाती भी की गई है। इसकी भौगोलिक स्थिति के कारण बाल्टिक सागर और आसपास के यूरोपीय क्षेत्रों पर सैन्य निगरानी के लिहाज से यह इलाका अहम है।
रूस ने NATO पर लगाया सैन्य दबाव बढ़ाने का आरोप
पुतिन ने बाल्टिक सागर में NATO के सैन्य अभ्यास और रूसी जहाजों से जुड़े घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए पश्चिमी देशों पर तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया। रूस का कहना है कि यूरोपीय देशों की सैन्य गतिविधियां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चिंता बढ़ा रही हैं।
रूस की ओर से यह दावा भी किया गया है कि NATO कैलिनिनग्राद और आसपास के क्षेत्र की हवाई तथा समुद्री नाकाबंदी की तैयारी कर रहा है। हालांकि, यह रूस का दावा है और इसके समर्थन में स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी खबर में नहीं दी गई है।
NATO ने कहा- कैलिनिनग्राद को निशाना बनाने की योजना नहीं
NATO ने रूस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि गठबंधन कैलिनिनग्राद को निशाना बनाने की तैयारी नहीं कर रहा है। NATO की ओर से रूस की परमाणु हथियारों से जुड़ी चेतावनियों की भी आलोचना की गई है।
NATO का कहना है कि वह एक रक्षात्मक गठबंधन है और उसकी सैन्य गतिविधियों का उद्देश्य रूस के किसी क्षेत्र पर हमला करना नहीं है। NATO प्रमुख मार्क रुटे ने भी रूस से परमाणु हमले की धमकियों को रोकने की अपील की है।
बाल्टिक सागर में सैन्य गतिविधियों से बढ़ी चिंता
बाल्टिक सागर के आसपास पिछले कुछ समय से NATO देशों की सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। NATO ने समुद्र के नीचे मौजूद संचार केबल और पाइपलाइन की सुरक्षा के लिए भी अभियान चलाया है।
रूस और NATO के बीच यूक्रेन युद्ध के बाद पहले से तनाव बना हुआ है। ऐसे में कैलिनिनग्राद जैसे रणनीतिक क्षेत्र को लेकर दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी ने यूरोप में सुरक्षा संबंधी चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
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