संतकबीर नगर/गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के बीच संतकबीर नगर की धनघटा विधानसभा सीट से एक पुलिसकर्मी के चुनाव लड़ने की तैयारी का मामला सामने आया है। गोरखपुर में डायल-112 में तैनात रहे सिपाही श्याम सुंदर चौहान पर लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के आरोप हैं। विभाग की ओर से उसे निलंबित किया जा चुका है।
श्याम सुंदर चौहान सोशल मीडिया पोस्ट और स्थानीय राजनीतिक कार्यक्रमों के जरिए धनघटा क्षेत्र में सक्रिय नजर आ रहे हैं। वह समाजवादी पार्टी के कार्यक्रमों में शामिल होते रहे हैं और पार्टी के समर्थन में सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखते दिखाई दिए हैं।
धनघटा से चुनाव लड़ने की तैयारी
श्याम सुंदर चौहान मूल रूप से संतकबीर नगर जिले के महुली थाना क्षेत्र के नैना झाला गांव के रहने वाले हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वह उत्तर प्रदेश पुलिस के 1994 बैच के सिपाही हैं और अब तक कई जिलों में तैनात रह चुके हैं। वर्ष 2023 में कुशीनगर से स्थानांतरण के बाद उनकी तैनाती गोरखपुर में डायल-112 में हुई थी।
बताया गया है कि गोरखपुर में तैनाती के दौरान ही उन्होंने धनघटा विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां शुरू कर दी थीं। सोशल मीडिया पर उनकी क्षेत्र से जुड़ी पुरानी पोस्ट वर्ष 2023 से दिखाई देती हैं। इसके बाद उन्होंने लगातार क्षेत्रीय कार्यक्रमों और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ी पोस्ट साझा कीं।
सपा के कार्यक्रमों में मंच से संबोधन
धनघटा विधानसभा क्षेत्र के लोहरेया में करीब एक महीने पहले सपा के बूथ अध्यक्ष, जोन प्रभारी और सेक्टर प्रभारियों की समीक्षा बैठक आयोजित हुई थी। इसमें श्याम सुंदर चौहान ने मंच से संबोधन किया।
उन्होंने खुद का परिचय देते हुए कहा कि वह श्याम सुंदर चौहान ‘सिपाही’ हैं। कार्यक्रम में उन्होंने बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनाव की तैयारियों से जुड़े विषयों पर बात की।
उन्होंने अपने संबोधन में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने की अपील भी की थी। उनके सोशल मीडिया पोस्ट में सपा के नेताओं के साथ तस्वीरें और पार्टी से जुड़े कार्यक्रमों के प्रचार से संबंधित सामग्री भी दिखाई देती है।
सोशल मीडिया पर राजनीतिक गतिविधियां
श्याम सुंदर चौहान के नाम से सोशल मीडिया पर कई पोस्ट सामने आई हैं, जिनमें उन्हें सपा के कार्यक्रमों में शामिल होते और पार्टी के बैनर-पोस्टर के साथ देखा जा सकता है। कुछ पोस्ट में वह लाल टोपी पहने नजर आते हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के स्वागत कार्यक्रमों के लिए भी उनके नाम से लोगों को आमंत्रित किया गया है।
उन्होंने धनघटा विधानसभा क्षेत्र के गांवों में लोगों से संपर्क करने और स्थानीय स्तर पर अपनी सक्रियता बढ़ाने की बात भी कही है। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए वह धनघटा सीट से पार्टी का टिकट मिलने की उम्मीद के साथ अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं।
सिपाही ने कहा- पुलिस विभाग में रहकर लोगों की मदद नहीं कर पा रहा था
श्याम सुंदर चौहान ने बातचीत में कहा कि वह शुरू से ही समाजवादी पार्टी की नीतियों से प्रभावित रहे हैं। उनका कहना है कि पुलिस विभाग में रहते हुए वह लोगों की अपेक्षा के मुताबिक उनकी मदद नहीं कर पा रहे थे, इसलिए उन्होंने राजनीति में आने का विचार बनाया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि वह करीब तीन साल से क्षेत्र में सक्रिय हैं और लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं में मदद करने का प्रयास कर रहे हैं।
ड्यूटी से अनुपस्थिति को लेकर विभागीय कार्रवाई
रिपोर्ट के अनुसार श्याम सुंदर चौहान लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहे। करीब तीन महीने पहले अधिकारियों को इसकी जानकारी हुई, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया। इसके बाद भी उनके पुलिस लाइन में हाजिर नहीं होने की बात सामने आई है।
गोरखपुर के एसपी क्राइम अयोध्या सिंह के अनुसार श्याम सुंदर चौहान काफी समय से निलंबित हैं और वह हाजिरी भी नहीं लगा रहे हैं। विभाग की ओर से उनसे संपर्क कर लगातार गैरहाजिर रहने का कारण जानने का प्रयास किया जा रहा है।
हालांकि, उनकी अनुपस्थिति के दौरान ड्यूटी रजिस्टर में हाजिरी किस तरह दर्ज होती रही, इस संबंध में विभागीय स्तर पर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।
सरकारी कर्मचारी के राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने पर नियम लागू
उत्तर प्रदेश सरकार की वेबसाइट पर उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1956 उपलब्ध है। सरकारी सेवकों के आचरण से जुड़े मामलों में संबंधित सेवा नियमों और विभागीय प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाती है।
इस मामले में सिपाही के राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होने, चुनाव लड़ने की तैयारी और ड्यूटी से अनुपस्थिति से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर विभागीय कार्रवाई की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल पुलिस विभाग की ओर से श्याम सुंदर चौहान के निलंबन और लगातार गैरहाजिर रहने की जानकारी दी गई है। उनके चुनाव लड़ने और टिकट की दावेदारी से जुड़ी अंतिम स्थिति पार्टी के निर्णय और आगामी चुनावी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
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