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डीएम-एसपी ने परखी जेल की सुरक्षा व स्वास्थ्य व्यवस्था

– बंदियों को समय पर दवा व विधिक सहायता देने के निर्देश
– जेल का निरीक्षण कर बाहर आते डीएम व एसपी।
फतेहपुर। जिला कारागार की व्यवस्थाओं को परखने के लिए गुरुवार को जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स और पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने संयुक्त रूप से औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जेल की सुरक्षा व्यवस्था, बंदियों के भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं, महिला व पुरुष बैरकों की स्थिति व निरुद्ध कैदियों को दी जा रही शैक्षिक एवं विधिक सुविधाओं का बारीकी से परीक्षण किया गया। अधिकारियों ने व्यवस्थाओं को और अधिक संवेदनशील एवं व्यवस्थित बनाए रखने के निर्देश दिए। डीएम व एसपी सुबह जिला कारागार पहुंचे तो जेल प्रशासन में हलचल तेज हो गई। दोनों अधिकारियों ने सबसे पहले कंट्रोल रूम का निरीक्षण कर वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की कार्यशीलता जांची। सभी कैमरे सक्रिय मिलने पर सुरक्षा निगरानी को संतोषजनक बताया गया। इसके बाद पाकशाला (रसोईघर) पहुंचकर बंदियों के लिए तैयार किए जा रहे भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और निर्धारित मीनू के अनुसार बन रहे खाने का जायजा लिया। अधिकारियों ने साफ-सफाई बनाए रखने और भोजन वितरण में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतने की हिदायत दी। निरीक्षण के दौरान पुरुष एवं महिला बंदीगृहों का भी भ्रमण किया गया, जहां बंदियों से उनके रहने, भोजन, चिकित्सा और अन्य सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली गई। जिलाधिकारी ने बंदियों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और जेल प्रशासन को निराकरण के निर्देश दिए। महिला बंदीगृह के समीप संचालित आंगनवाड़ी केंद्र का भी निरीक्षण किया गया, जहां बच्चों एवं महिलाओं को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की समीक्षा की गई। इसके बाद अधिकारियों ने जिला कारागार स्थित चिकित्सालय का निरीक्षण कर दवाओं की उपलब्धता, स्वास्थ्य परीक्षण रजिस्टर तथा उपचार व्यवस्था को देखा। जिलाधिकारी ने प्रभारी चिकित्साधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिए कि बंदियों की सभी आवश्यक जांच समय से कराई जाएं तथा दवाइयों की उपलब्धता में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। गंभीर रोगियों की विशेष निगरानी रखने को भी कहा गया। जेल परिसर में संचालित राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान केंद्र का भी अवलोकन किया गया, जहां निरुद्ध बंदियों को शिक्षा से जोड़ने की पहल की समीक्षा हुई। जिलाधिकारी ने जेल अधीक्षक को निर्देशित किया कि निरुद्ध बंदियों को आवश्यकता के अनुरूप विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में उन्हें किसी तरह की असुविधा न हो।

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