– कृषक दुर्घटना योजना के लंबित आवेदनों पर जताई नाराजगी
– ई-ऑफिस से कामकाज तेज करने के निर्देश
– कलेक्ट्रेट कार्यालयों का निरीक्षण कर फाइलें देखतीं डीएम निधि गुप्ता वत्स।
फतेहपुर। जिले की नवागंतुक जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स ने शनिवार को कलेक्ट्रेट परिसर में औचक निरीक्षण कर सरकारी दफ्तरों की सुस्त कार्यशैली पर सख्त रुख दिखाया। अभिलेखागार, भूलेख और बंदोबस्त चकबंदी कार्यालय का जायजा लेते हुए उन्होंने बेतरतीब रखी पत्रावलियों, लंबित आवेदनों और पुराने ढर्रे पर चल रहे कामकाज पर नाराजगी जताई। डीएम ने साफ कहा कि मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के आवेदनों को अब किसी भी हाल में लटकाया न जाए और तहसील से लेकर जिला स्तर तक सत्यापन कराकर पात्र किसानों को तत्काल लाभ दिलाया जाए। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अभिलेखागार में मुआयना रजिस्टर, मूल बैनामा वापसी रजिस्टर, दाखिल दफ्तरी और माल पत्रावलियों की गहन पड़ताल की। वहीं भूलेख कार्यालय में किसानों से जुड़े प्रकरणों की फाइलें खंगालीं तो बंदोबस्त चकबंदी कार्यालय में लंबित वादों की स्थिति जानी। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन रैकों में फाइलें रखी गई हैं, उन पर स्पष्ट फ्लैक्सी लगाई जाए ताकि पत्रावलियों की पहचान और खोज में समय बर्बाद न हो। डीएम ने पाया कि कई महत्वपूर्ण नक्शों का डिजिटलीकरण अब तक अधूरा है। इस पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाते हुए जल्द से जल्द सभी नक्शों को डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल करने के आदेश दिए। साथ ही चकबंदी वादों के समयबद्ध निस्तारण और फाइलों के व्यवस्थित रखरखाव पर विशेष जोर दिया। सरकारी दफ्तरों को कागजी बोझ से मुक्त करने के लिए जिलाधिकारी ने ई-ऑफिस प्रणाली को पूरी तरह लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पत्रावलियों का आदान-प्रदान अब डिजिटल माध्यम से हो ताकि कामकाज में पारदर्शिता आए और अनावश्यक देरी पर रोक लगे। निरीक्षण के दौरान अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) डॉ. अविनाश त्रिपाठी, अपर जिलाधिकारी न्यायिक सुनील कुमार समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। डीएम के इस सख्त तेवर के बाद कलेक्ट्रेट के विभिन्न कार्यालयों में पूरे दिन हड़कंप का माहौल बना रहा।

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