“लापरवाही की हद: गलत ऑपरेशन के बाद बच्चेदानी को कचरे में फेंका, डॉक्टरों पर दर्ज FIR”

लखनऊ में सीतापुर रोड पर शालिनी अस्पताल के डॉक्टरों के खिलाफ बच्चेदानी निकालने के ऑपरेशन में गलत तरीका अपनाने पर एफआईआर दर्ज हुई है। ऑपरेशन के बाद महिला की तबीयत बिगड़ने लगी और वह दूसरी बीमारियों की चपेट में आ गई। बाद में उसे दूसरे अस्पताल में ऑपरेशन करवाना पड़ा। इस शिकायत पर सीएमओ ऑफिस ने अस्पताल संचालन पर रोक लगा दी गई थी। अब इस मामले में कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने शालिनी अस्पताल प्रबंधन के साथ डॉ. शिखा, डॉ. रितुज व अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

मड़ियांव के सेमरा गोढ़ी निवासी अमरजीत गौतम ने तहरीर में बताया कि मां के बीमार होने पर उन्होंने सीतापुर रोड पर शेरवानी नगर में शालिनी हॉस्पिटल में दिखाया था। डॉ. शालिनी ने चेकअप के बाद बच्चेदानी में दिक्कत बताई और इसे निकालने की जरूरत बताई। फिर 20 अक्टूबर 2023 की रात डॉ. शिखा और डॉ. रितुज ने ऑपरेशन किया था।

आरोप है कि पहले प्राइवेट पार्ट से बच्चेदानी निकालने की बात कही गई थी, लेकिन ऑपरेशन के दौरान पेट में चीरा लगाकर बच्चेदानी निकाली गई। ऑपरेशन के लिए 60 हजार रुपये लिए गए। डिस्चार्ज करते वक्त इलाज से जुड़े कागज नहीं दिए गए और बच्चेदानी को जांच के लिए लैब भेजने के बजाय फेंक दिया गया था।

तहरीर के मुताबिक, ऑपरेशन के कुछ दिन बाद दिक्कत होने पर मरीज ने फिर डॉ. शालिनी को दिखाया। उन्होंने हल्की सूजन की बात कहते हुए दवा लिख दी, लेकिन इससे सुधार होने के बजाय तबीयत और बिगड़ने लगी। इसके बाद डॉ. शालिनी ने बाहर से डॉक्टर बुलाया। डॉक्टरों की जांच में पता चला कि मरीज की पेशाब की थैली खिसक गई है और थर्ड ग्रेड सिस्टोलिस की चपेट में आ गई है। दूसरे अस्पताल में दिखाने पर ऑपरेशन में लापरवाही की बात सामने आई और फिर से ऑपरेशन करवाना पड़ा।

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