न्यूज़ वाणी ब्यूरो, फतेहपुर। आकांक्षी जनपद फतेहपुर में बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और समुचित विकास को बढ़ावा देने के लिए ‘जीवन के प्रथम 1000 दिवस’ परियोजना के दूसरे चरण के तहत चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो गया है। 23, 24, 26 और 27 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस प्रशिक्षण में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग के करीब 89 अधिकारी-कर्मचारी हिस्सा ले रहे हैं। प्रशिक्षण के माध्यम से ऐसे मास्टर ट्रेनर तैयार किए जा रहे हैं, जो आगे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्यकर्मियों को बच्चों की बेहतर देखभाल के लिए प्रशिक्षित करेंगे।
दीप प्रज्वलित कर प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का उद्घाटन अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. इस्तियाक अहमद, वैन लीर फाउंडेशन के वरिष्ठ कार्यक्रम प्रबंधक अनुभव गर्ग, विक्रमशिला एजुकेशन रिसोर्स सोसायटी की कार्यक्रम प्रबंधक दूर्वा घोष और जिला कार्यक्रम प्रबंधक अजय लावरे ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
यह परियोजना वर्ष 2022 से जिला प्रशासन के नेतृत्व में संचालित की जा रही है। इसके क्रियान्वयन में वैन लीर फाउंडेशन और विक्रमशिला एजुकेशन रिसोर्स सोसायटी तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहे हैं। जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स के निर्देशन और मुख्य विकास अधिकारी पवन कुमार मीना के नेतृत्व में आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य बच्चों के विकास से जुड़ी सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना है।
बच्चों के मस्तिष्क विकास और पोषण पर विशेष जोर
प्रशिक्षण में दिल्ली की प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास विशेषज्ञ डॉ. अनुभा राजेश, लखनऊ विश्वविद्यालय के सामाजिक कार्य विभाग की प्रोफेसर डॉ. रूपा शंकर और ओडिशा की विशेषज्ञ प्रियदर्शिनी मोहंती प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दे रही हैं।
विशेषज्ञ बच्चों के मस्तिष्क विकास, प्रारंभिक शिक्षा, संतुलित पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और माता-पिता की सहभागिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दे रहे हैं। प्रतिभागियों को सात प्रमुख विषयों पर आधारित प्रशिक्षण मॉड्यूल के साथ ‘नींव’ फ्लिपबुक और ‘परवरिश की चौपाल’ तथा ‘परवरिश का आंगन’ जैसी सामुदायिक गतिविधियों की सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है।
जीवन के पहले 1000 दिन क्यों हैं महत्वपूर्ण?
परियोजना के तहत गर्भधारण से लेकर बच्चे के दूसरे जन्मदिन तक की अवधि को विशेष महत्व दिया गया है। इस दौरान बच्चे के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास की मजबूत नींव तैयार होती है। इसलिए गर्भवती महिलाओं की देखभाल, उचित पोषण, समय पर स्वास्थ्य सेवाएं, शुरुआती सीखने के अवसर और परिवार का सहयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचेगी प्रशिक्षण की जानकारी
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद मास्टर ट्रेनर विभागीय कर्मचारियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित करेंगे। इससे समुदाय स्तर पर बच्चों और उनके अभिभावकों तक बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और संवेदनशील परवरिश से जुड़ी जानकारी पहुंचाने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम के प्रबंधन और तकनीकी सहयोग की जिम्मेदारी विक्रमशिला एजुकेशन रिसोर्स सोसायटी की कार्यक्रम अधिकारी दिव्या भारती और आदर्श आर्य संभाल रहे हैं। इस पहल से फतेहपुर में शुरुआती बाल्यावस्था की देखभाल को मजबूत बनाने और बच्चों के बेहतर भविष्य की दिशा में प्रयासों को गति मिलने की उम्मीद है।
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