कानपुर देहात/लखनऊ। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) 2026 का परिणाम जारी होने के बाद जहां लाखों अभ्यर्थियों में खुशी का माहौल है, वहीं ‘Rejected’ परिणाम ने बड़ी संख्या में शिक्षक अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा दी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि ओएमआर शीट पर रोल नंबर अथवा अन्य विवरण भरने में हुई छोटी मानवीय भूल के कारण उनका पूरा परिणाम निरस्त हो गया, जबकि उत्तर कुंजी से मिलान करने पर कई अभ्यर्थी उत्तीर्ण होने का दावा कर रहे हैं।
ऐसा ही मामला कानपुर देहात के मैथा क्षेत्र स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय औनहाँ के सहायक अध्यापक सैय्यद मोहम्मद फरहान का सामने आया है। फरहान के मुताबिक उन्होंने 3 जुलाई 2026 को प्रथम पाली में लखनऊ मंडल में UPTET की परीक्षा दी थी। परीक्षा के दौरान रोल नंबर भरते समय उनसे मानवीय भूल हो गई। उनका सही रोल नंबर 0521243097 था, जबकि गलती से 0521247097 अंकित हो गया। बाद में उन्होंने ओएमआर पर हुई त्रुटि में संबंधित अंक को सुधारते हुए ‘47’ को ‘43’ किया।
परिणाम से पहले ही आयोग को दी थी जानकारी
फरहान का कहना है कि उन्होंने इस त्रुटि के संबंध में 9 जुलाई 2026 को आयोग के समक्ष लिखित प्रत्यावेदन एवं सुधार प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर दिया था। यानी परिणाम घोषित होने से काफी पहले उन्होंने अपनी गलती की जानकारी संबंधित संस्था को दे दी थी।
उनके मुताबिक उत्तर कुंजी जारी होने के बाद उत्तरों का मिलान करने पर उनके 100 से अधिक अंक बन रहे थे। इससे उन्हें परीक्षा में सफल होने की पूरी उम्मीद थी, लेकिन 26 अगस्त को परिणाम जारी होने के बाद उनका रिजल्ट ‘Rejected’ दिखाई दिया।
अब उनका सवाल है कि परिणाम से पहले दिए गए प्रत्यावेदन पर विचार करते हुए क्या उनकी ओएमआर शीट, उपस्थिति और अन्य परीक्षा अभिलेखों का मिलान कर पुनर्विचार किया जाएगा?
हजारों अभ्यर्थियों के सामने एक जैसा संकट
अभ्यर्थियों के बीच और सोशल मीडिया पर ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं, जिनमें रोल नंबर गलत भरने, विषय संबंधी गोला न भर पाने अथवा ओएमआर में अन्य तकनीकी या मानवीय त्रुटियों के कारण परिणाम ‘Rejected’ दिखाई देने की बात कही जा रही है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि किसी उम्मीदवार ने परीक्षा दी है और उसके उत्तरों के आधार पर वह निर्धारित योग्यता अंक प्राप्त कर रहा है, तो केवल मानवीय भूल के कारण उसका भविष्य प्रभावित नहीं होना चाहिए। ऐसे मामलों में कम से कम अभिलेखों की जांच और नियमानुसार सुधार या पुनर्विचार का अवसर देने की व्यवस्था होनी चाहिए।
आयोग से उठ रहा सवाल—क्या खुलेगा सुधार का रास्ता?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ‘Rejected’ परिणाम वाले अभ्यर्थियों के लिए आयोग क्या व्यवस्था करता है। खासकर उन मामलों में अभ्यर्थी राहत की उम्मीद कर रहे हैं, जिनमें परिणाम घोषित होने से पहले ही गलती की जानकारी लिखित रूप से आयोग को दे दी गई थी।
पीड़ित अभ्यर्थियों की मांग है कि ‘Rejected’ मामलों की अलग से जांच कराई जाए, पूर्व में दिए गए प्रत्यावेदनों का रिकॉर्ड देखा जाए और ओएमआर शीट, परीक्षा केंद्र की उपस्थिति तथा अन्य उपलब्ध अभिलेखों का मिलान कराया जाए।
इसके साथ ही आयोग स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे कि ‘Rejected’ परिणाम के खिलाफ अभ्यर्थी कहां, कब और किस प्रक्रिया के तहत शिकायत अथवा प्रत्यावेदन कर सकते हैं।
अच्छे अंक के बावजूद रिजेक्ट तो क्या होगा भविष्य?
अभ्यर्थियों के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि यदि उत्तरों के मूल्यांकन में कोई उम्मीदवार निर्धारित योग्यता मानक से अधिक अंक हासिल करता है, लेकिन रोल नंबर अथवा ओएमआर संबंधी मानवीय त्रुटि के कारण उसका परिणाम ‘Rejected’ हो गया है, तो क्या उसे गलती सुधारने या पुनर्विचार का अवसर मिलेगा?
पीड़ित अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग को ऐसे मामलों में स्पष्ट शिकायत निवारण व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे वास्तविक रूप से परीक्षा देने वाले योग्य अभ्यर्थियों की वर्षों की मेहनत महज एक मानवीय भूल की वजह से बेकार न हो।
अब आयोग के जवाब का इंतजार
UPTET शिक्षक अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण परीक्षा है। ऐसे में ‘Rejected’ परिणाम को लेकर उठ रही शिकायतों पर आयोग का आधिकारिक रुख बेहद अहम होगा।
सवाल सिर्फ एक अभ्यर्थी के परिणाम का नहीं, बल्कि उन तमाम शिक्षक अभ्यर्थियों का है जो छोटी सी मानवीय भूल के कारण अपनी मेहनत का परिणाम खोने की आशंका से परेशान हैं। अब निगाहें आयोग पर हैं कि वह ऐसे मामलों में पुनर्विचार, सुधार अथवा शिकायत निवारण का कोई रास्ता खोलता है या नहीं।

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