नई दिल्ली। ईरान के साथ चल रहे युद्ध के चलते होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी ने पूरी दुनिया में कच्चे तेल खत्म होने का खतरा तेजी से बढ़ा दिया है। तीन महीने पहले तक इसकी संभावना जीरो मानी जा रही थी, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। होर्मुज स्ट्रेट लगभग पूरी तरह बंद होने से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की भारी कमी का संकट गहराता जा रहा है।

(यह तस्वीर AI से बनाई गई है)
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के जल्द समाप्त होने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह संघर्ष लंबा खिंच सकता है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहेगी। ऑयल सप्लाई भी बेहद चिंताजनक स्थिति में बना हुआ है।

उत्पादन में भारी गिरावट
डेटा एनालिटिक्स फर्म केप्लर की रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी से 8 मई तक मिडिल ईस्ट में तेल आपूर्ति में कुल 78.2 करोड़ बैरल की कमी दर्ज की गई है। इस महीने के अंत तक यह आंकड़ा 1 अरब बैरल तक पहुंचने की आशंका है।
सऊदी अरब प्रतिदिन 30 लाख बैरल से अधिक तेल का उत्पादन खो रहा है, जो पूरे क्षेत्र के लिए बड़ा झटका है। इराक का दैनिक उत्पादन 28.8 लाख बैरल कम हो गया है। वहीं ईरान में 16.9 लाख बैरल प्रतिदिन की भारी गिरावट दर्ज की गई है। कुवैत भी रोजाना 17.5 लाख बैरल तेल उत्पादन घटने से प्रभावित हुआ है।

रिजर्व पर निर्भरता और IEA की चेतावनी
उत्पादन में बड़े पैमाने पर कमी आने के बाद दुनिया अब पहले से निकाले गए तेल के भंडार पर निर्भर हो गई है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने युद्ध से पहले कहा था कि दुनिया के तेल भंडार रिकॉर्ड स्तर पर हैं, लेकिन अब स्थिति उलट गई है। IEA ने चेतावनी दी है कि इस साल तेल की मांग सप्लाई से ज्यादा हो जाएगी।
‘द ऑयल प्राइज’ की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की नवीनतम मासिक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वैश्विक तेल आपूर्ति में रोजाना लगभग 39 लाख बैरल की कमी आ सकती है। हालांकि यह आंकड़ा वास्तविक स्थिति से काफी कम है। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि मध्य पूर्व में तेल आपूर्ति पहले ही 1.05 करोड़ बैरल प्रतिदिन घट चुकी है, जबकि वैश्विक मांग में केवल 4.2 लाख बैरल प्रतिदिन की गिरावट का अनुमान है। इस अंतर के कारण बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। अटलांटिक काउंसिल की वरिष्ठ फेलो एलेन वाल्ड ने वॉल स्ट्रीट जर्नल से कहा, ‘खपत को एक सीमा तक ही कम किया जा सकता है। जब भंडार खत्म होंगे तो वे सचमुच खत्म हो जाएंगे। मांग और सप्लाई के बीच बड़ी खाई पैदा होने पर बाजार बुरी तरह हिल जाएगा और कीमतें तेजी से बढ़ेंगी।

अरामको CEO और जेपी मॉर्गन की चेतावनी
सऊदी अरामको के सीईओ अमीन नासिर ने भी इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि जमीन पर मौजूद ईंधन भंडार रिकॉर्ड गति से घट रहे हैं। यह भंडार फिलहाल बाजार के लिए ‘एकमात्र सुरक्षा कवच’ बचा है, लेकिन तेजी से खाली हो रहा है।
जेपी मॉर्गन के कमोडिटी विश्लेषकों का अनुमान है कि अगले महीने तक विकसित देशों में व्यावसायिक तेल भंडार ‘ऑपरेशनल तनाव’ के स्तर तक पहुंच सकते हैं। जेपी मॉर्गन की वैश्विक कमोडिटी रणनीति प्रमुख नताशा कानेवा ने साफ कहा, ‘हमारा निष्कर्ष है कि किसी न किसी तरह जून में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलना ही होगा।’ अगर युद्ध नहीं रुका तो संकट केवल कीमतों के उछाल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रिफाइनिंग और अंतिम उपभोक्ता तक ईंधन पहुंचाने में गंभीर समस्या खड़ी हो जाएगी। अमीन नासिर ने यह भी बताया कि स्टोरेज में मौजूद सारा तेल वास्तव में उपलब्ध नहीं होता। यूरोप और अमेरिका में स्टोरेज से रोजाना अधिकतम 20 लाख बैरल तेल ही निकाला जा सकता है। केप्लर के अनुसार, मार्च के अंत से अब तक लगभग 6 करोड़ बैरल तेल भंडार से निकाला जा चुका है, लेकिन कुल 3 अरब बैरल भंडार अभी भी मौजूद है, हालांकि उसकी उपलब्धता स्पष्ट नहीं है।
कमजोर होता सुरक्षा कवच
विश्लेषकों का कहना है कि युद्ध जितना लंबा चलेगा, दुनिया का सुरक्षा कवच उतना ही कमजोर होता जाएगा। हालांकि, बाजार अब इस स्थिति का आदी होता जा रहा है।
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